Thursday, September 22, 2016

Self Dependence, Development Essay in Hindi

आत्मनिर्भरता पर निबंध, स्वावलंबन, विज्ञान, तकनीक, आर्थिक विकास. Essay on Self Dependence, Reliance in Hindi. Development of Science and Technology, Paragraph.

विकास बनाम आत्मनिर्भरता

कुछ दिन पहले दो दिन तक शहर में नेट और मोबाइल सेवा ठप्प रही।...कारण था एक उधार लेने वाले ने उधार न चुकाने की मंशा के चलते उधार देने वाले की हत्या कर दी और उसके घर को भी लूट लिया। खैर! इस ख़बर की ओर ध्यान दिलाना मेरा उद्देश्य नहीं था। ऐसी ख़बरे तो आप रोज ही अख़बारों में पढ़ते हैं, टीवी पर देखते हैं। लेकिन हाँ, इन घटनाओं का कारण जरुर इस पोस्ट में मिल जाएगा।...तो मैं बात कर रही थी दो दिनों तक नेट और मोबाइल सेवा ठप्प होने की। कैसा महसूस होता है जब अचानक से इन्टरनेट या कॉल की सुविधा बंद हो जाती है? कैसा लगता है जब पूरे दिन बिजली नहीं आती? कैसा लगता है जब अचानक से यातायात के साधन किसी हड़ताल या अन्य किसी कारण से बंद हो जाए? कैसा लगता है जब धार्मिक उन्मादों के चलते शहर, मार्केट, कहीं भी आना-जाना सब बंद हो जाता है? कैसा लगता है जब किसी दिन घर का फ्रिज, पंखा, मिक्सर या कोई भी जरुरी मशीन काम करना बंद कर दे और कुछ दिनों तक कोई ठीक करने वाला उपलब्ध न हो? कैसा लगता है जब पूरी तरह से नौकरों पर निर्भर मालिक के यहाँ कुछ दिन नौकर न आये? और भी ऐसे कई सारे सवाल बनाये जा सकते हैं। हर एक सवाल का ज़वाब कई लोगों के लिए कुछ बेचैनी, परेशानी, किसी जरुरी काम का रुक जाना, पैसों का नुकसान, समय का नुकसान, चिड़चिड़ापन, घबराहट, चिंता, तनाव और ऐसी ही कई चीजें होंगी।

मेरा अगला सवाल यह कि विकास, तरक्की और आगे बढ़ने के आपके लिए क्या मायने हैं? अधिकांश लोगों का जवाब होगा वैज्ञानिक-तकनीकी उन्नति, सुख-सुविधा युक्त साधनों का बढ़ना, समय और मेहनत बचाने वाली मशीनों का आना, एक बटन दबाते ही सब कुछ हो जाए...ऐसा ही कुछ...है न? पर वाकई क्या विकास की यह परिभाषा सही है? विकास का आशय मैं लेती हूँ आत्मनिर्भरता का बढ़ते जाना। इस आत्मनिर्भरता का आशय सिर्फ आर्थिक आत्मनिर्भरता जितना संकुचित मत करना। उससे कई अधिक विस्तृत अर्थ है इस शब्द का...जिसकी अंतिम सीमा वहां तक पहुँचती है जहाँ पर आत्म के सिवा और कुछ भी शेष नहीं रह जाता। किसी चीज पर कोई निर्भरता नहीं। पूर्ण स्वतंत्रता...पूर्ण मुक्ति की स्थिति।

खैर! यह शीर्ष की बात है। हम फिर से पीछे लौटते हैं। ऊपर जिस तरक्की की मैंने बात की और जिसे आप विकास बताएँगे वहां आत्मनिर्भरता का हश्र कैसा है यह सोचने और समझने वाली बात है। जहाँ एक दिन भी अगर इन्टरनेट उपलब्ध न हो तो त्राहि-त्राहि मच जाती है। यातायात सेवा ठप्प हो जाए, फ़ोन घुम हो जाए, शहर बंद हो जाए, बिजली चली जाए तो इंसान बौखला जाता है। हमारा तथाकथित विकास हमें इस कदर अन्य लोगों और वस्तुओं पर निर्भर बनाता जा रहा है कि हम साधनों को साध्य समझ बैठे हैं। ऐसे में अध्यात्म का जीवन में समावेश इसलिए भी जरुरी है क्योंकि यह अंधाधुंध विकास की दौड़ में थोड़ा ठहरकर हमें वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ले जाता है। कहते हैं कि भगवान् महावीर की आत्मनिर्भरता ऐसी थी कि उन्हें भोजन करने की जरुरत नहीं होती थी...तब भी उनका शरीर बलिष्ठ था। शरीर से अद्भुत कांति चारों ओर बिखरी रहती थी...वस्त्रों की उन्हें जरुरत नहीं थी...महलों की उन्हें जरुरत नहीं थी। आत्मनिर्भरता के असल मायने तो यही हैं जहाँ बाहरी साधनों पर निर्भरता और आसक्ति घटती ही जाए। ऐसी आत्मनिर्भरता तक हम पहुचं जाएँ तब तो कितनी समस्यायों का समाधान हो जाएगा। भले ही हम आवश्यकता और समय की मांग के अनुरूप कुछ साधनों का प्रयोग करें लेकिन वे हमारे लिए जीवन और मरण का प्रश्न तो नहीं बनेंगे।

अब सोचने वाली बात यह है कि महज तकनीकी सुविधाओं के विकास के द्वारा हम कितने आत्मनिर्भर और विकसित बन रहे हैं? इस पोस्ट द्वारा मैं तकनीकी विकास का विरोध नहीं कर रही...यह पोस्ट भी आप तक तकनीकी सुविधा के उपयोग के जरिये ही पहुँच रही है। लेकिन विकास के नाम पर जो अति हो रही है उसके बारे में चिंतन हेतु मैं कुछ तर्क दे रही हूँ। वह अति विकास क्या काम का जो प्रकृति से नीचे गिराकर फिर से हमें प्रकृति की ओर लौटने को मजबूर करे? हम कब तक पहले आग लगाकर फिर कुआँ खोदने का उपक्रम करते रहेंगे? कब तक? बेहतर होता विषमता की खाईयों को बढ़ाते जाने की बजाय हम संतुलित बाह्य विकास और आत्म विकास की ओर ध्यान देते। बेहतर होता विज्ञान का उपयोग जगत और जीवन के रहस्यों की खोज में मुख्य रूप से होता। केवल सुविधा के साधन जुटाते जाने वाला विज्ञान विकास नहीं विनाश का पर्याय लगता है। क्योंकि जितनी अधिक हमारी दूसरों पर निर्भरता होगी, उतने ही हम गुलाम और उतनी ही हमारे जीवन की चाबी किसी और के हाथों में होगी...फिर चाहे हम वस्तुओं के गुलाम बनें या फिर व्यक्तियों के।

By Monika Jain ‘पंछी’

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Wednesday, September 21, 2016

Karma Yoga, Geeta Gyan in Hindi

भागवत गीता ज्ञान के उपदेश, कर्मयोग क्या है? Karma Yoga in Hindi. Bhagavad Geeta Updesh, Gita Gyan, Selfless Service, Detachment in Fruits of Action, Karm Yog.

(1)

कर्मयोग

वह एक शेयर ट्रेडिंग फर्म थी। मार्केट वोलेटिलिटी के समय ब्रोकरेज की कमाई बढ़ जाती है, तो ऐसे समय में उस फर्म के ओनर तालियाँ पीट-पीट कर हँसते और ठहाके लगाते नज़र आते थे। उनके किसी कस्टमर का फ़ोन आता जिसका पैसा डूबने वाला हो, जो घबराया हुआ हो, तब भी उनकी ख़ुशी देखते ही बनती थी...वही ठहाकों वाली हंसी। बहुत अजीब से एक्सप्रेशन्स होते थे उनके चेहरे के। मेरे लिए यह बहुत हैरान करने वाली बात होती थी। वैज्ञानिक तकनीकी विकास और ग्लोबलाइजेशन के नाम पर हमने लाइफ साइकिल को बहुत ज्यादा कॉम्पलीकेटेड बना दिया है। ऐसे में किसी एक का नुकसान किसी एक का फायदा होगा, यह तो होता ही है। कुछ मिलता है हमें तो ख़ुश होना भी स्वाभाविक है। लेकिन किसी और के दुःख में हम एकदम असंवेदनशील ठहाकों की गुंजाईश कैसे खोज पाते हैं?

खैर! यह कईयों के लिए बहुत छोटी सी बात होगी...क्योंकि असंवेदनशीलता इस कदर व्याप्त है कि इन्हीं ठहाकों के बीच मौत भी खरीदी और बेची जाती है। इन्हीं ठहाकों के बीच खाने-पीने की चीजों में मिलावट कर पूरी मानव जाति को जहर परोसा दिया जाता है और इन्हीं ठहाकों के बीच जिन्दा शरीरों का अपहरण कर ज़िन्दगी जहन्नुम बना दी जाती है।...तो फिर जो कानूनन हो रहा है उसमें ठहाके लगाना क्या गलत? लेकिन कानून के दायरे में भी अक्सर ही हमारा फल किसी के लिए दुष्फल हो रहा होता है। इसलिए भी फल में अत्यधिक आसक्ति को त्यागना संवेदनशीलता और समानुभूति का ही पर्याय है। बाकी कोशिश यह की जानी चाहिए कि हर समय बाहर से प्रभावित हमारी ख़ुशी घटते-घटते एक दिन भीतर से छलकने और झलकने लगे। ख़ुश होना, हँसना, मुस्कुराना बहुत ख़ुशी की बात है। बस इसकी कीमत क्या है इस पर थोड़ा ध्यान रहे। कीमत केवल वह नहीं जो आपकी जेब से जाने वाली है, कीमत वह भी जो किसी और के आंसू बनने वाली हो। इसलिए सबसे पहले तो हम ऐसे कर्म का चुनाव करें जिसमें किसी और का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नुकसान न्यूनतम हो (अगर समाज सेवा का कर्म चुन सकें तो सबसे बेहतर है) और उसके बाद यह जरुरी है कि फल में हमारी आसक्ति कम से कम हो। हमारा पूरा ध्यान बस कर्म करने पर हो। यही कर्मयोग है। यही वास्तविक आनंद का हेतु है।

By Monika Jain ‘पंछी’

(2)

गीता ज्ञान

(लेखन/कविता के क्षेत्र में अच्छी खासी महाभारत चल रही है। सिर्फ युद्ध शुरू करने के लिए नहीं, युद्ध रोकने के लिए भी गीता ज्ञान की जरुरत पड़ती है।)

हे लेखक!

क्यों व्यर्थ झगड़ा करते हो? किससे व्यर्थ लड़ते हो? कौन तुम्हें हरा सकता है? आत्मा न हारती है, न जीतती है। आत्मा तो लिखती भी नहीं। जो लिखा गया अच्छा था। जो लिखा जा रहा है अच्छा है। जो लिखा जाएगा वह भी अच्छा होगा। भूत-भविष्य की चिंता छोड़ो, वर्तमान चल रहा है।

तुम्हारा क्या गया जो तुम लड़ते हो? तुम क्या लाये थे जो तुम झगड़ते हो? तुमने क्या लिखा था जो तुमने खो दिया? तुम न कोई कविता लेकर आये थे, न कोई लेख लेकर जाओगे। तुमने शब्द यहीं से लिए, तुमने विचार यहीं से लिए। जो लिखा वह यहीं पर दिया। खाली हाथ आये थे खाली हाथ चले जाओगे। जो शब्द/विचार आज तुम्हारे हैं कल किसी और के होंगे, परसों किसी और के। तुम इन्हें अपना समझकर मग्न हो रहे हो बस यही तुम्हारे दु:खों का कारण है।

लिखते समय दृष्टा बनों फिर खुद को लेखक नहीं पाओगे। लड़ते समय भी दृष्टा और साक्षी बनों...फिर लड़ नहीं पाओगे। ये शब्द और विचार न तुम्हारे हैं, न तुम इन शब्दों और विचारों के। तुम इन शब्दों और विचारों को ईश्वर/शून्य को अर्पित करो। यही सबसे उत्तम है। यही आनंद का रहस्य है।

तुम्हारा कृष्ण!

By Monika Jain ‘पंछी’

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Poem on Peace in Hindi

विश्व शांति दिवस पर कविता, अंतरराष्ट्रीय अमन, सुकून शायरी. Poem on International Peace Day in Hindi. Peaceful Inner World Poetry Lines, Harmony Rhymes, Slogans.

शांति कैसे हो?

शांति कैसे हो?
भीतर कोलाहल, बाहर कोलाहल
भीतर का शोर पहुँचता है बाहर
बाहर का शोर पहुँचता है भीतर
चक्र कैसे टूटे?
सम्बन्ध कैसे छूटे?

अलग कर देना खुद को
शोर और श्रोता से,
बन जाना मात्र साक्षी
मन अंकित करेगा ध्वनियों को
कान सुनेंगे आवाजें सारी...
पर तुम न मन बनना
और न ही कान
तुम बन जाना बस एक प्रमाण!

वह प्रमाण जो प्रभावों से हैं शून्य
जो नहीं बहता संग आवाजों के...
विस्फोटों के बीच भी
जो बचा पाता है अपनी कांति
बस वही लाएगा जीवन में
प्रेम और शांति।
बस वही लाएगा जीवन में
प्रेम और शांति।

By Monika Jain ‘पंछी’

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Tuesday, September 20, 2016

Great People Quotes in Hindi

महान व्यक्तियों के अनमोल वचन, महापुरुषों के विचार, सुविचार. Great People Quotes in Hindi. Mahapurushon ke Kathan, Mahan Vyaktitva, Personalities, Thinkers.

Great People Quotes

  • सरलतापूर्वक कहे गए वचन को अन्यथा नहीं समझना चाहिए। ~ अश्वघोष / Ashvaghosha
  • सादगी का मतलब है सीमित बिस्तर के साथ ज़िन्दगी का सफ़र तय करना। ~ चार्ल्स वार्नर / Charles Warner
  • वही मानव सुखी है जो आज को अपना कह सके और निश्चिन्तता के साथ कल से बेफिक्र हो। ~ ड्राइडेन / Dryden
  • प्रसन्नता परम स्वास्थयवर्धक है, देह और मन दोनों के लिए मित्र तुल्य। ~ थॉमस अल्वा एडिसन / Thomas Alva Edison
  • छोटी-छोटी बातों का आनंद उठाइए क्योंकि हो सकता है कि किसी दिन आप मुड़कर देखें तो आपको अनुभव हो कि ये तो बड़ी बातें थीं। ~ रोबर्ट ब्राइट / Robert Bright
  • लोग इसलिए अकेले होते हैं क्योंकि वे मित्रता का पुल बनाने की बजाय दुश्मनी की दीवारें खड़ी कर लेते हैं। ~ जोसेफ कोर्ट न्यूटन / Joseph Newton
  • मुझे ऐसे मित्र की आवश्यकता नहीं जो मेरे साथ-साथ बदले और मेरी हाँ में हाँ भरे। ऐसा तो मेरी परछाई कहीं बेहतर कर लेती है। ~ प्लूटार्क / Plutarch
  • दोस्त वह है जो आपको अपनी तरह जीने की पूरी आज़ादी दे। ~ जिम मॉरिसन / Jim Morrison 
  • यदि आप अपने दुश्मन के साथ शांति चाहते हैं तो आपको उसके साथ काम करना होगा। तब वो आपका साथी बन पायेगा। ~ नेल्सन मंडेला / Nelson Mandela
  • रेल के इंजन के पास खड़े होकर देखो! काम करने वाली भाप का स्वर कोई नहीं सुनता, केवल व्यर्थ जाने वाली भाप ही शोर मचाती है। जो ऊर्जा और शक्ति तुम्हारे भीतर उपयोग हो रही है, वह गुप्त और अज्ञात रहती है। तुम जो शोर मचाते फिरते हो और उपद्रव करते हो, यह बेकार जाने वाली और बिना काम की ऊर्जा है। ~ जेम्स एलन / James Allen
  • मानव ह्रदय में साहस बोने वाला व्यक्ति सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक है। ~ कार्ल वोन नेबेल / Karl Von 
  • खतरे में हिम्मत रखना आधी लड़ाई जीतने जैसा है। ~ टाइटस मेक्सियस प्लौटस / Titus Maccius Plautus 
  • यदि शांति पाना चाहते हो तो लोकप्रियता से बचो। ~ अब्राहम लिंकन / Abraham Lincoln
  • साहसी व्यक्ति कभी भी बुरा कार्य नहीं करता। ~ विष्णु प्रभाकर / Vishnu Prabhakar 
  • स्वीकार की हुई गलती एक विजय है। ~ कैरोलीन / Karoleen 
  • कोई गलती न करना मनुष्य के बूते की बात नहीं है। लेकिन गलतियों से वह भविष्य के लिए बुद्धिमता सीख लेता है। ~ प्लूटार्क / Plutarch
  • क्रोध मुर्खता से प्रारंभ और पश्चाताप पर खत्म होता है। ~ पाईथागोरस / Pythagoras 
  • जिन विषयों के गंभीर अध्ययन से मनुष्य का मस्तिष्क परिष्कृत और ह्रदय सुसंस्कृत होता है, उसमें समय लगता है और उसके लिए बाजार आसानी से नहीं मिलता है। ~ हजारी प्रसाद द्विवेदी / Hazari Prasad Dwivedi 
  • एक अच्छी किताब पढ़ने का पता तब चलता है, जब आखिरी पन्ना पलटते हुए आपको लगे कि आपने एक मित्र को खो दिया। ~ पॉल स्वीनी / Paul Sweeney 
  • सभी अच्छी पुस्तकों को पढ़ना पिछली शताब्दियों के बेहतरीन व्यक्तियों के साथ संवाद करने जैसा है। ~ रेने डकार्टेस / Rene Descartes 
  • मैं नरक में भी उत्तम पुस्तकों का स्वागत करूँगा, क्योंकि इनमें यह शक्ति है कि जहाँ ये होंगी, वहां अपने आप ही स्वर्ग बन जायेगा। ~ लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक / Bal Gangadhar Tilak 
  • मनुष्य का मन यदि किसी चीज की कल्पना या उसमें विश्वास कर सकता है तो वह उसे प्राप्त भी कर सकता है। ~ Napoleon Hill / नेपोलियन हिल 
  • मनुष्य को आपत्ति का सामना करने में सहायता देने के लिए मुस्कान से बड़ी कोई चीज नहीं है. ~ संत तिरुवल्लुवर / Saint Thiruvalluvar
  • मौत से मत डरो, ना ही जी गयी जिंदगी से डरो, तुम्हें हमेशा के लिए नहीं जीना है, तुम्हे सिर्फ जीना है। ~ नैटली बैबिट / Natalie Babbitt
  • असली घुम्मकड़ मृत्यु से नहीं डरता, मृत्यु की छाया से वह खेलता है लेकिन हमेशा उसका लक्ष्य रहता है, मृत्यु को परास्त करना। वह अपनी मृत्यु द्वारा उस मृत्यु को परास्त करता है। ~ राहुल सांकृत्यायन / Rahul Sankrityayan
  • हरेक अपनी व्यक्तिगत इकाई को सत्य सिद्ध करने का भ्रमपूर्ण प्रयास करता है। उसे इस भ्रम का ज्ञान अवश्य रहता है, क्योंकि हिंसा की भावना उत्पन्न होने से मनुष्य को कभी आनंद प्राप्त नहीं होता। ~ अमृत लाल नागर / Amrit Lal Nagar
  • परिस्थितियां मानव नियंत्रण से बाहर है लेकिन हमारा आचरण हमारे ही नियंत्रण में है। ~ बेंजामिन फ्रेंकलिन / Benjamin Franklin 
  • भलाई में आनंद है, क्योंकि वह तुम्हारे स्वास्थ्य और सुख में वृद्धि करता है। ~ जरथुष्ट्र / Zarathustra 
  • भलाई अमरत्व की ओर ले जाती है, बुराई विनाश की ओर। ~ व्हिटमैन / Whitman 
  • परोपकार न कर सको तो कोई बात नहीं, पर किसी का अपकार हरगिज न करो। ~ प. मदन मोहन मालवीय / Madan Mohan Malviya 
  • भलाई करना मानवता है, भला होना दिव्यता है। ~ मार्टिन लूथर किंग / Martin Luther King
  • मनुष्य स्थावर वृक्ष का नहीं है। वह जंगम प्राणी है। चलना मनुष्य का धर्म है, जिसने इसे छोड़ा, वह मनुष्य होने का अधिकारी नहीं है। ~ राहुल सांकृत्यायन / Rahul Sankrityayan
  • सबसे उत्तम दान यह है कि आदमी को इतना योग्य बना दो कि वह बिना दान के काम चला सके। ~ तालमुद / Talmud
  • आज तक अहंकार ने जितना नरसंहार किया है, मनुष्य की किसी अन्य मनोवृति ने नहीं किया होगा। ~ चन्द्रप्रभ / Chandra Prabh
  • रूढ़ियाँ कभी धर्म नहीं होती. वे एक-एक समय की बनी हुयी सामाजिक शृंखलाएँ हैं। वे पहले की शृंखलाएँ जिनसे समाज में साफ़ सुथरापन था, मर्यादा थी, पर अब वह जंजीरें बन गयी हैं। ~ सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' / Suryakant Tripathi Nirala
  • अहिंसा में व्यक्ति और परिस्थिति के सब अंगों के प्रति सत्कार के भाव का समावेश है। ~ जैनेन्द्र कुमार / Jainendra Kumar
  • दुनिया वैसी ही है, जैसा हम इसके बारे में सोचते हैं। हम अपने विचार बदल लें, तो दुनिया बदल सकते हैं। ~ एच एम टॉमिलसन / H M Tomlinson 
  • हम जो हैं, वही बने रहकर वह नहीं बन सकते, जो हम बनना चाहते हैं। ~ मैवस डेप्री / Max Depree 
  • या तो परिस्थितियों को जैसी हैं, वैसी ही स्वीकार करें अन्यथा उन्हें बदलने का उत्तरदायित्व पूरा करें। ~ डेविड बेटले / David Battley 
  • कोई भी बात इसलिए सच्ची नहीं हो सकती कि वह बहुत दिनों से बहुत लोगों द्वारा कही जाती रही है।~ शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय / Sharat Chandra Chattopadhyay
  • स्नेह एक ऐसा चिकना और परिव्यापक भाव है कि उसमें व्यक्तित्व नहीं रहते। स्नेह अपने स्नेह पात्र को कभी 'याद' नहीं करता क्योंकि वह उसे कभी भूलता नहीं। ~ सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन / Sachchidananda Hirananda Vatsyayan
  • जीवन में जो भी स्थायी ख़ुशी है उसका नब्बे प्रतिशत उत्तरदायी प्रेम है। ~ सी एस लुईस / C S Lewis
 
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Good Quotes in Hindi

अच्छे विचार, वचन, सुविचार, सुवचन, अच्छाई. Good Quotes in Hindi. Goodness Sms, Achhe Vichar, Vachan, Suvichar, Achhai Quotations, Status, Thoughts, Sayings.

Good Quotes

  • बुराई की विजय के लिए बस इतना चाहिए कि अच्छे लोग कुछ ना करें। ~ ई ब्रुक / E Brook
  • इतिहास उठाकर देखें तो पता चलेगा कि अच्छाई एक ऐसा मोती है जो बहुत ही कम मिलता है। जिस शख्स में अच्छाई का यह मोती होता है वह श्रेष्ठतम होता है। ~ विक्टर ह्यूगो / Victor Hugo 
  • जैसे आग में डालने पर सोना काला नहीं पड़ता, वैसे ही जिस शिक्षक के सिखाने में किसी प्रकार की भूल न दिखलाई पड़े, उसे ही सच्ची शिक्षा कहते हैं। ~ कालिदास / Kalidas 
  • किसी के गुणों की प्रशंसा करने में, अपना समय बर्बाद मत करो, उसके गुणों को अपनाने का प्रयास करो। ~ Karl Marx / कार्ल मार्क्स 
  • एक अच्छा दिमाग और एक प्यार भरा ह्रदय एक आद्वितीय मिश्रण होता है लेकिन जब आप अच्छा बोलने और लिखने लगते हैं तो यह बताता है कि आप में कुछ महत्वपूर्ण बात भी है। ~ नेल्सन मंडेला / Nelson Mandela 
  • महत्व इस बात का नहीं है, कि आप कितने अच्छे हैं। महत्व तो इस बात का है कि आप कितना अच्छा बनना चाहते हैं। ~ पॉल ऑर्डन / Paul Arden 
  • अच्छी आदतें डालना उतना ही आसान है, जितनी बुरी। ~ टिम मैक्कार्बर / Tim Mccarver
  • अपनी शक्ति को छोटा न समझें, एक छोटी सी चिंगारी भी विशाल वन को जलाकर राख कर सकती है। ~ वाल्तेयर / Voltaire
  • हमारे जीवन का उस दिन अंत होना शुरू हो जाता है, जिस दिन हम उन विषयों के बारे में चुप रहना शुरू कर देते हैं जो मायने रखते हैं। ~ मार्टिन लूथर किंग / Martin Luther King
  • दुनिया बहुत कष्ट सहती है। बुरे लोगों की हिंसा के कारण नहीं, अच्छे लोगों के मौन के कारण। ~ नेपोलियन बोनापार्ट / Napoleon Bonaparte
  • कविता प्रकाश और अन्धकार की वह संधि रेखा है, जहाँ पहुंचकर मनुष्य का मन परिचित विश्व को छोड़कर अपरिचित जगत से परिचय लाभ करता है। ~ रामधारी सिंह 'दिनकर' / Ramdhari Singh Dinkar
  • विज्ञान जहाँ तक घूमता फिरता है, यदि विश्व वहीँ समाप्त है तो मेरे कवि! कविता बनाना छोड़ दे। तू विज्ञान का अनुचर नहीं, उसका पूरक है। ~रामधारी सिंह 'दिनकर' / Ramdhari Singh Dinkar
  • जब तक हम खुद माता-पिता नहीं बन जाते, तब तक माता पिता के प्यार को नहीं जान पाते। ~ हेनरी वार्ड बीचर / Henry Ward Beecher 
  • आंसू दर्द की मौन भाषा है। ~ वाल्टेयर / Voltaire
  • धमनियों की कठोरता की तुलना में दिलों में कठोरता रखने वाले लोग जल्दी बूढ़े होते हैं। ~ अज्ञात / Unknown
  • सही अवसर ना मिलने पर क्षमता के मायने बेहद सीमित हो जाते हैं। ~ नेपोलियन बोनापार्ट / Napoleon Bonaparte 
  • अवसर सूर्योदय की तरह होते हैं। यदि आप ज्यादा देर तक प्रतीक्षा करते हैं तो आप उन्हें गँवा देते हैं। ~ William Arthur Ward / विलियम आर्थर वार्ड
  • वास्तविकता से आँखे मूंदी जा सकती हैं लेकिन स्मृतियों से नहीं। ~ मार्गेट कार्टी / Margaret Carty
  • लोग इसलिए अकेले होते हैं क्योंकि वे दोस्ती का पुल बांधने की बजाय दुश्मनी की दीवार खड़ी कर लेते हैं। ~ जोसेफ फोर्ट न्यूटन / Joseph Fort Newton
  • आप सही रास्ते पर भी हो तो भी पीछे रह जायेंगे, यदि आप बैठे ही रहे। ~ विल रॉजर्स / Will Rogers
  • मानव हेतु आलस्य देह में रहने वाला महान शत्रु है। उद्यम के समान कोई मित्र नहीं। उद्यमी दुःख नहीं पाता है। ~ भृतहरि / Bhrithari
  • ऐसे दो मुख्य पाप हैं जिनसे अन्य सभी पापों की उत्पत्ति होती है : अधीरता और आलस्य। ~ फ्रेंज काफ्का / Franz Kafka
  • अकर्मण्यता का दूसरा नाम मृत्यु है। ~ मुसोलिनी / Mussolini
  • महत्वकांक्षी बनो और उसकी कोई सीमा ना होने दो। अकर्मण्यता के जीवन से यशस्वी जीवन और यशस्वी मृत्यु अधिक अच्छी है। ~ सर सी वी रमन / C V Raman
  • काम में लगा मेहनती आदमी हमेशा ख़ुश रहता है। आलसी इंसान ही खुद को बेबस समझकर दु:खी होता है। ~ बेंजामिन फ्रेंकलिन / Benjamin Franklin
  • हंसी के क्षणों के बिना बीता दिन सबसे ख़राब दिन है। ~ ई. ई. कमिंग्स / E. E. Cummings
  • तारीखें और सन् संवत की सूची बनाने से इतिहास पूर्ण नहीं होता। उसका गौरव कृति में है। देशकाल और पात्रों के समन्वय से कृति को समन्वय करना ही इतिहास है। ~ रत्नाकर शास्त्री / Ratnakar Shastri 
  • शरीर को रोगी और निर्बल रखने के समान दूसरा कोई पाप नहीं है। ~ अज्ञात / Unknown 
  • आनंद का पहला स्त्रोत है - स्वास्थ्य। ~ कर्टिस / Curtis
  • बीमारी की कड़वाहट से मनुष्य स्वास्थ्य की मधुरता समझ पाता है। ~ कैतिलायाई कहावत 
  • समय और स्वास्थ्य दो बहुमूल्य संपत्तियां हैं। जिनकी कीमत हम तब तक नहीं समझते जब तक उनका नाश नहीं हो जाता। ~ डेनिस वेटले / Denis Waitley 
  • जब तक रुग्णता का सामना नहीं करना पड़ता, तब तक स्वास्थ्य का महत्व समझ में नहीं आता है। ~ थॉमस फुल्लर / Thomas Fuller 
  • मेरे विचार से आप प्रतिदिन दो में से कोई एक कार्य करते हैं ~ स्वास्थ्यवर्धन करना या शरीर में रोग पैदा करना। ~ एडेल्लेय / Adelle
  • जिसके पास स्वास्थ्य है, उसके पास उम्मीदें हैं और जिसके पास उम्मीदें है उसके पास सब कुछ है। ~ थॉमस कार्लाईल / Thomas Carlyle
  • मैं बात करता हूँ और बात करता हूँ और मैंने लोगों को पिछले पचास साल में उतना नहीं सिखाया जितना मेरे पिता ने मुझे एक उदाहरण से एक हफ्ते में सिखा दिया था। ~ मारियो क्युमो / Mario Cuomo
  • चापलूसी एक तरह का नकली सिक्का है और नकली सिक्के की तरह वह अंततः आपको कष्ट में डाल देगी, जब कभी आप इसे चलाने का प्रयत्न करेंगे। ~ डेल कारनेगी / Dale Carnegie
  • परमात्मा ने जो कुछ तुमको दिया है, उसके लिए परमात्मा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करो। ~ वाल्मीकि रामायण / Valmiki Ramayan
  • लक्ष्यों के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात है उनका होना। ~ जेफ्री एफ एबर्ट / Jeffrey F Abort
  • रुकावटें वे वस्तुएं हैं, जिन्हें आप तब देखते हैं जब आप अपना ध्यान लक्ष्य से हटा लेते हैं। ~ अज्ञात / Unknown
  • हमारे लक्ष्य निर्धारित करते हैं कि हम क्या बनने जा रहे हैं। ~ जूलियस इरविंग / Julius Erving
  • हमारा युग दुर्बलताओं और ध्वंस का युग है। दुर्बलता और ध्वंस जितने प्रसारगामी होते हैं, शक्ति और निर्माण उतने नहीं हो सकते। ~ Mahadevi Verma / महादेवी वर्मा
  • असंतुष्ट व्यक्ति के लिए सभी कर्त्तव्य नीरस होते हैं। उसे तो कभी भी किसी वस्तु से संतोष नहीं होता। फलतः उसका जीवन असफल होना स्वाभाविक है। ~ अज्ञात / Unknown
  • अच्छा निर्णय अनुभव से प्राप्त होता है। लेकिन दुर्भाग्यवश अनुभव का जन्म अक्सर ख़राब निर्णयों से होता है। ~ रीटा माए ब्राउन / Rita Mae Brown

Monday, September 19, 2016

Golden Quotes in Hindi

सुनहरे, स्वर्णिम शब्द. Golden Quotes in Hindi. Great People Words of Life for Kids, Sunhare Thoughts, Swarnim Sms, Sayings, Sentences, Messages, Status, Lines.

Golden Quotes

  • शिक्षा किसी बाल्टी को भरने जैसी नहीं है, बल्कि आग में रोशनी देने जैसी होती है। ~ अब्दुल कलाम / Abdul Kalam
  • सारा जगत स्वतंत्रता के लिए लालायित रहता है, फिर भी प्रत्येक जीव अपने बन्धनों को प्यार करता है। ~ Arvind Ghosh / अरविन्द घोष 
  • अन्याय और अत्याचार करने वाला, उतना दोषी नहीं जितना कि उसे सहन करने वाला। ~ लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक / Bal Gangadhar Tilak 
  • ब्रह्माण्ड में कोई भी टुकड़ा अतिरिक्त नहीं है। हर कोई यहाँ इसलिए हैं क्योंकि उसे कोई जगह भरनी है, हरेक टुकड़े को बड़ी पहेली में फिट होना है। ~ दीपक चोपड़ा / Deepak Chopra 
  • श्रवण की कला सीखना परम आवश्यक है। गुरु तो चारों तरफ हैं किन्तु यदि सुनने की कला नहीं आती, तो सभी सिद्ध पुरुष व्यर्थ हैं। गुरु उसी समय उपयोगी होता है, जब व्यक्ति में श्रवण की सामर्थ्य उत्पन्न हो जाये। ~ गुरु नानक / Guru Nanak 
  • धन-समृद्धि से युक्त बड़े-बड़े राज्यों के राजा-महाराजाओं की तुलना भी उस चींटी से नहीं की जा सकती जिसमें ईश्वर का प्रेम भरा हो। ~ गुरु नानक देव / Guru Nanak 
  • दान देकर तुम्हें खुश होना चाहिए क्योंकि मुसीबत दान की दीवार कभी नहीं फांदती। ~ हजरत मोहम्मद / Hazrat Muhammad 
  • मुझे दया के लिए भेजा है, शाप देने के लिए नहीं। ~ हजरत मोहम्मद / Hazrat Muhammad 
  • ईश्वर एक है और वह एकता को पसंद करता है। ~ हजरत मोहम्मद / Hazrat Muhammad 
  • विश्वास वह शक्ति है, जिससे उजड़ी हुई दुनिया को फिर से रोशन किया जा सकता है। ~ हेलन केलर / Helen Keller 
  • खुद की तुलना ज्यादा भाग्यशाली लोगों से करने की बजाय हमें अपने साथ के ज्यादातर लोगों से अपनी तुलना करनी चाहिए और तब हमें लगेगा कि हम कितने भाग्यवान हैं। ~ हेलन केलर / Helen Keller 
  • जिस तरह जौहरी ही असली हीरे की पहचान कर सकता है, उसी तरह गुणी ही गुणवान की पहचान कर सकता है। ~ कबीर / Kabir
  • जीवन में उम्र के साथ जो वस्तु मिलती है, उसका नाम है अनुभव। केवल पुस्तकें पढ़कर इसे पाया नहीं जा सकता और न पाने तक इसका मूल्य मालूम नहीं होता। यह बात भी याद रखनी चाहिए कि अनुभव, दूरदर्शिता आदि केवल शक्ति ही प्रदान नहीं करते, शक्ति का हरण भी करते हैं। ~ शरतचंद्र चटर्जी / Sharat Chandra Chatterji
  • अपने कर्मों के प्रति बहुत संकोची ना बनें। पूरी जिंदगी एक अनुभव है। ~ रॉल्फ वाल्डो एमर्सन / Ralph Waldo Emerson
  • दो वैर करने वालों के बीच ऐसे रह कि यदि वे मित्र बन जाएँ तो तू लज्जित न हो। ~ शेख सादी / Sheikh Saadi 
  • अपने दुश्मनों को हमेशा माफ़ कर दीजिये। उन्हें इससे अधिक और कुछ परेशान नहीं करता। ~ ऑस्कर वाइल्ड / Oscar Wilde
  • शत्रुओं को मित्र बनाकर क्या मैं उन्हें नष्ट नहीं कर रहा। ~ अब्राहम लिंकन / Abraham Lincoln 
  • जब कोई व्यक्ति अहिंसा की कसौटी में पूरी तरह उतर जाता है, तो अन्य व्यक्ति स्वयं ही उसके पास आकर वैर भाव भूल जाता है। ~ महर्षि पतंजलि / Maharshi Patanjali
  • मेरी चापलूसी करो, तो मैं आप पर भरोसा नहीं करूँगा। मेरी आलोचना करो, मैं आपको पसंद नहीं करूँगा। मेरी उपेक्षा करो, मैं आपको माफ़ नहीं करूँगा। मुझे प्रोत्साहित करो और मैं कभी आपको नहीं भूलूंगा। ~ विलियम ऑर्थेर वार्ड / William Arthur Ward
  • जिंदगी में कुछ करने की इच्छाशक्ति रखने वाले व्यक्ति के लिए कुछ भी असंभव नहीं होता है। जरुरत बस इच्छाशक्ति की होती है। ~ अब्राहम लिंकन / Abraham Lincoln 
  • देश का भविष्य नेताओं और मंत्रियों की मुट्ठी में नहीं है, बल्कि जनता के ही हाथ में है। ~ यशपाल / Yashpal 
  • जनतंत्र इसी आस्था पर आधारित है कि साधारण लोगों में असाधारण संभावनाएं छिपी है। ~ हैरी इमर्सन फ्रासडिक / Henry Emerson Fosdick
  • अगर किसी देश को भ्रष्टाचार मुक्त और सुन्दर मन वाले लोगों का देश बनाना है तो, मेरा दृढ़तापूर्वक यह मानना है कि समाज के तीन प्रमुख सदस्य ये कर सकते हैं, पिता, माता और गुरु। ~ अब्दुल कलाम / Abdul Kalam
  • प्रश्न कर पाने की क्षमता ही मानव प्रगति का आधार है। ~ इंदिरा गाँधी / Indira Gandhi
  • ऐसा छात्र जो सवाल पूछता है, वह सिर्फ पांच मिनट के लिए मुर्ख रहता है लेकिन जो पूछता ही नहीं, वह जिंदगी भर के लिए मूर्ख रहता है। ~ चीनी कहावत / Chinese Proverb
  • उत्सुकता का बोध प्रकृति की मौलिक पाठशाला है। ~ स्माइली ब्लैटन / Smiley Blanton
  • किसी निर्माण और रचना में बड़ा अंतर यह है कि निर्माण को उसके बनने के बाद सराहा जाता है, लेकिन रचना, सृजन के अस्तित्व में आने से पहले भी उसके लिए दिल में चाहत होती है। ~ चार्ल्स डिकेंस / Charles Dickens
  • एक रचनाशील व्यक्ति कुछ पाने की इच्छा से प्रेरित होता है, न कि अन्य लोगों को हराने की इच्छा से। ~ ऐन रेन्ड 
  • जब किसी कार्य में रूचि और उसे करने के हुनर का संगम हो तो उत्कृष्ठता स्वाभाविक है। ~ जॉन रस्किन / John Ruskin
  • अरचनात्मक मस्तिष्क गलत जवाब पकड़ सकता है। गलत सवालों को पकड़ने के लिए रचनात्मक मस्तिष्क चाहिए। ~ ए. जे. / A. J.
  • कला और धर्म भाई बहन है। दोनों दृश्य के परे देखते हैं। दोनों सामने के परदे को हटाना चाहते हैं। सरलता दोनों की शक्ति और ज्ञान दोनों का बोल है। ~ रामधारी सिंह 'दिनकर' / Ramdhari Singh ‘Dinkar’
  • कला सम्पूर्णता की ओर जाने का प्रयास है, व्यक्ति की अपने को सिद्ध करने की चेष्टा है। ~ अज्ञेय / Agyeya
  • प्रतिस्पर्धियों को भूल जाइये, आप सिर्फ ग्राहकों पर ध्यान लगाइए। ~ जैक मा / Jack Ma
  • केवल दिल से ही इंसान सही ढंग से देख सकता है, जो जरुरी है वह आँखों को दिखता ही नहीं। ~ फ़्रांसिसी लेखक
  • मित्र का सम्मान करो, पीठ पीछे प्रशंसा करो और आवश्यकता पड़ने पर उसकी सहायता करो। ~ अज्ञात / Unknown
  • क्या तुम चाहते हो कि लोग तुम्हारी प्रशंसा करें तो आत्म प्रशंसा कभी मत करना। ~ पास्कल / Pascal 
  • जीवन की त्रासदी इसमें नहीं है कि आप लक्ष्य तक नहीं पहुंचे। त्रासदी इस बात की है कि आपके पास कोई लक्ष्य ही नहीं है। ~ बेंजामिन मेस / Benjamin Messi
  • आप जो निशाने नहीं लगाते उन्हें शत प्रतिशत चूकते हैं। ~ वैन ग्रेटजकि / Wayne Gretzky
  • अगर किसी व्यक्ति को मालूम ही नहीं कि उसे किस बंदरगाह की ओर जाना है तो हवा की हर दिशा उसे अपने विरुद्ध ही प्रतीत होगी। ~ सैनेका, रोमन दार्शनिक / Seneca, Roman Philosopher
 
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Thursday, September 15, 2016

Ignorance Quotes in Hindi

अज्ञान, अज्ञानता, जड़ता, अविद्या. Ignorance Quotes in Hindi. Stupidity, Ignorant, Agyan, Agyanta, Ignoring, Unawareness, Unconsciousness Sms, Status, Messages.

Ignorance Quotes

  • बुद्ध की निश्छलता और बच्चों की निश्छलता में एक बड़ा अंतर होता है, जिसे ज्ञान कहते हैं। बुद्ध बच्चे हैं लेकिन बच्चे बुद्धू (अबोध) हैं। हालाँकि बच्चों में भी अलग-अलग मात्रा में राग-द्वेष, अहंकार आदि वृत्तियाँ पायी जाती है, लेकिन इनका क्षेत्र बहुत सीमित होता है क्योंकि उनका मन अविकसित होता है और सामाजिक प्रभाव भी बहुत कम हुए होते हैं। इसलिए बच्चे सरल और निर्दोष होते हैं। और उनकी सरलता और निर्दोषिता ईश्वरत्व की कुछ झलक दे जाती है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • अपनी अज्ञानता (बंधनों) को पहचानना ज्ञान (मुक्ति) की दिशा में बढ़ाया गया पहला कदम है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • किसी भी महापुरुष के विचारों को जितना खतरा उसके आलोचकों से नहीं होता उससे कई ज्यादा खतरा उसके अंध समर्थकों और अंधभक्तों से होता है। महावीर अपनी साधना के 12 वर्षों तक मौन क्यों रहे अब समझ में आता है। जब वे बोलते थे तब भी निश्चयात्मक कथन क्यों नहीं कहते थे...यह भी अब समझ में आता है। उन्होंने कभी कोई पंथ और संप्रदाय बनाने या समर्थकों की भीड़ जुटाने में रूचि नहीं ली। हालाँकि उनके पीछे एक संप्रदाय बन ही गया। उन्होंने स्यादवाद और अनेकान्तवाद का सिद्धांत क्यों दिया...उन्होंने वर्ण व्यवस्था, आश्रम व्यवस्था, कर्म-कांडों को क्यों नहीं स्वीकारा यह आज अच्छे से समझा जा सकता है। जड़ व्यवस्थाओं और जड़ परम्पराओं ने मनुष्यता की जितनी क्षति की है उतनी और किसी चीज ने नहीं की...और ऐसा भी नहीं कि यह जड़ता सिर्फ धर्म के क्षेत्र में हो। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • कभी-कभी लगता है सूचना के साधन जितने बढ़े और विकसित हुए हैं अज्ञान उतना ही गहराने लगा है। यह अति सक्रिय मस्तिष्क का दौर है। सोशल मीडिया जिसमें आग में घी की भूमिका निभा रहा है। बिना सोचे-समझे और जाने हर ओर बस गैरजिम्मेदार निष्कर्षों का ढेर पसर रहा है। इन तुरत-फुरत की धारणाओं और पूर्वाग्रहों से बचना बेहद जरुरी है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • हम पूछ लेते हैं तो ज्यादा से ज्यादा उस समय मुर्ख साबित हो सकते हैं (वह भी किससे पूछा जा रहा है उसके व्यवहार और सोच पर निर्भर करता है)। लेकिन नहीं पूछते तो हमेशा मुर्ख ही रह जाते हैं। इसके अलावा किसी को कुछ बताना और समझाना स्वयं हमें सीखने में काफी मदद करता है। जो न समझ आये बेझिझक पूछिए और इंतजार करिए...उत्तर अवश्य मिलेगा। लेकिन सिर्फ पूछने के लिए पूछने से बचिए। वहां उत्तर मिलने की कोई गारंटी नहीं। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • बर्तन साफ़ करते समय मेरी आदत है - एक बार सारे बर्तनों की अतिरिक्त गन्दगी हटाने के लिए पहले कोरे पानी से साफ़ कर लेती हूँ, उसके बाद डिश सोप/लिक्विड लगाती हूँ और फिर पानी से साफ़ करती हूँ। मेरे ख़याल से ज्यादातर लोग ऐसा ही करते होंगे। एक बार हुआ यूँ कि मैं अपना फर्स्ट स्टेप कर रही थी तो मेरी एक दोस्त मुझे अजीब नज़रों से देख रही थी। मैंने पूछा क्या हुआ? वह हैरान होकर बोली, तुम बिना सोप के बस ऐसे ही बर्तन साफ़ करती हो? :o मैंने कहा, 'आगे देख तो लो लड़की!' फिर कुछ देर बाद उसकी हैरानी नार्मल हुई। :) Moral of the Story : पूर्वाग्रहों (prejudgement) से बचें। ;) ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • मनुष्य के दुखों का एक मात्र कारण है - अज्ञान। ~ अज्ञात / Unknown
 
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Wednesday, September 7, 2016

Theory of Relativity in Hindi

आइंस्टीन का सापेक्षता सिद्धांत, विरोधाभास. Theory of Relativity in Hindi. Albert Einstein. Paradox, Contradiction, Limitation of Languages, Duality, Dualism.

सापेक्षता का सिद्धांत

साइंस स्ट्रीम नहीं रहा आगे तो आइंस्टीन का सापेक्षता का सिद्धांत तो कभी पढ़ना और समझना नहीं हुआ डिटेल में। हालाँकि कभी पढ़ना और अच्छे से समझना चाहूंगी। लेकिन जिस सापेक्षता को मन काफी समय से सूक्ष्म रूप से समझ रहा है वहां एक ही समय में दो विरोधाभासी कथनों से भी बिल्कुल सहमत हुआ जा सकता है।

जैसे : मृत्यु एक शाश्वत सच है और मृत्यु एक शाश्वत झूठ भी है।
जैसे : सरल होना सबसे जटिल है और सरल होना ही सबसे सरल है।
जैसे : पूर्ण स्वीकार का क्षण ही पूर्ण निस्तार का क्षण बनता है।
जैसे : सबसे मैत्री (पूर्ण स्वीकार) किसी से मैत्री (पूर्ण निस्तार) नहीं होती।
जैसे : धर्म (तथाकथित) संहारक है और धर्म (विशुद्ध) ही संरक्षक है। और संरक्षक वाला धर्म राजनीति क्या दुनिया की हर एक नीति को सकारात्मक दिशा में लाने के लिए जरुरी है।

तो कहना बस ये था कि आप सापेक्षता को समझिये, भाषा की सीमाओं को समझिये, शब्दों के अलग-अलग सन्दर्भों में अर्थ को समझिये...फिर आधे से अधिक विवाद तो पल भर में खत्म हो जायेंगे। 
 
कुछ भी लिखा हुआ सामान्यीकरण नहीं होता, सापेक्ष ही होता है। कितनी भी सावधानी बरत लो तब भी पूर्ण सत्य कभी लिखा/कहा या सोचा जा ही नहीं सकता। एक ही बिंदु को देखने के अनन्त कोण होते हैं। इसलिए किसी भी समय शब्दों के रूप में हमारे मन, वचन या लेखन में आया कोई भी विचार एक ही समय में सत्य और असत्य दोनों ही सिद्ध हो जाता है। सारे पॉइंट ऑफ़ व्यूज से मैं जब भी अपने लिखे को जांचने की कोशिश करती हूँ तो उसे असत्य ही पाती हूँ। इसलिए कभी-कभी लिखते-लिखते रुक जाती हूँ और कभी-कभी लिखकर मिटा देती हूँ।...और भीतर कहीं गहराई में मैं सब कुछ की तरह ही लिखना भी छोड़ना चाहती हूँ। यह कोई पलायन नहीं...यह विरोधाभास और द्वन्द्वों जनित इस समस्त जीवन से मुक्ति की ही तड़प होती है जो दुनिया के हर एक प्राणी के भीतर दबी रहती है। मुख्य रूप से कर्मयोग का सिद्धांत समाधान रूप में यही से निकलता है। बाकी बात बस इतनी सी है कि सापेक्षता के दृष्टिकोण से सभी का लिखने का तरीका यही रहेगा। जरुरत बस समझ और जागरूकता के बढ़ाने की है तब आवश्यक क्या है और अनावश्यक क्या है यह अपने आप स्पष्ट होता जाएगा।

प्रश्न : ‘लिखना भी छोड़ना चाहती हूँ, सब कुछ की तरह!’ कर्मयोग का सिद्धांत यहाँ से कैसे निकलता है?

उत्तर : समाधान रूप में कई तरीके बताये गए हैं जैसे ज्ञान योग, भक्ति योग, क्रिया योग, कर्मयोग ...हालांकि ये विभाजन सुविधा के लिए हैं। ओवरलैप करता है बहुत कुछ। इसमें से कर्मयोग निष्काम कर्म के बारे में कहता है। हर किसी के लिए सन्यास संभव नहीं, यह व्यवहारिक भी नहीं...ऐसे में जागरूक होकर कर्म करें, परिणाम में आसक्ति यथासंभव न रखें। हम सचेत रहें तो अनावश्यक कर्म वैसे भी छूट ही जायेंगे।

प्रश्न : आपने बहुत अच्छा समझाया है। आपका शब्द शिल्प प्रेरणास्पद है। कुछ बातें जोड़ना चाहूंगी। प्रथम तो क्वांटम फीजिक्स से वापिस न्यूटोनियन फिजिक्स पर आते हैं, जहाँ सरफिशियल मूवमेंट के लिए जिस प्रकार घर्षण एक आवश्यक किन्तु विरोधी बल है, मतलब घर्षण नहीं हो तो मूवमेंट नहीं होगा, हालाँकि घर्षण गति की डायरेक्शन के खिलाफ काम करता है। उसी प्रकार यदि किसी लिखे हुए या कहे हुए का उल्टा अर्थ (जो लिखने वाला या कहने वाला भाव देना चाहता है, उसका उल्टा) लोग निकालें तो यह कोई विसंगति नहीं है, सामान्य बात है। क्योंकि यदि लिखे हुए या कहे हुए के अनेक अर्थ न निकलें तो लेखन ही क्या हुआ? भावों को रूपांतरित करने के लिए भाषा का अविष्कार हुआ है। ज़ाहिर है कि घर्षण उसमें भी होगा। नहीं होगा तो फिर भाषा नहीं हमें टैलिपैथी की तकनीक खोजनी होगी।
फिर मौन किसी का समाधान हो सकता हो, इसमें संदेह है। ओशो ने हजारो घण्टे स्पीचेज़ दी है। इसी कोशिश में कि भाषा का जितना अधिक विस्तार कर पाएं उतना बेहतर है, और रिलेटिव ही कहा है। किन्तु अर्थ का अनर्थ न हो, इसलिए भाषा की वृहदता का उपयोग कर अपने भाव को स्पष्ठ करने के पूर्ण प्रयास किए हैं। सप्रेम :)

उत्तर : शुक्रिया। :) कई अर्थ निकलते हैं यह स्वाभाविक है। लेकिन घर्षण को अत्यधिक से कम करते जाना तो हमारे ही हाथ में है। ओशो की बातों के कितने अनर्थ होते हैं इस बारे में आप ध्यान दीजियेगा। ओशो खुद बहुत विवादस्पद रहे हैं। खैर! यह चर्चा का विषय नहीं। लेकिन फ़िलहाल तक मैं जिस निष्कर्ष पर पहुंची हूँ वहां पर मौन अंतिम मंजिल भी लगती है और उस मंजिल तक पहुँचने की जीवन यात्रा में हर समस्या का समाधान भी मौन (ध्यान) (थोड़ा विस्तृत अर्थ में है यहाँ) से ही निकलता है। बाकी मैं कितना भी संक्षेप में लिखूं पर लिखते समय अपनी ओर से जितना मेरे लिए संभव है सतर्क रहती हूँ। फायदा किसी को हो न हो यह नहीं पता लेकिन काउंट करने लायक नुकसान नहीं होगा इसकी जिम्मेदारी मैं समझती हूँ। हालाँकि सकारात्मक परिवर्तन सम्बन्धी प्रतिक्रियाएं ही मिली है अब तक ज्यादातर और आगे भी यही कोशिश रहेगी। लेकिन लिखना छोड़ने की चाह या बहुत अधिक चर्चा में न पड़ने की चाह व्यक्तिगत अनुभूतियों से ही निकलती है। जैसे आप अपने जॉब से संतुष्ट नहीं है। ऐसे ही दुनिया में किसी भी कार्य से स्थायी संतुष्टि नहीं मिल सकती। मन जिस स्थायी सुख की खोज में रहता है वह मन के मिट जाने में ही निहित होता है और वही सबसे मुश्किल होता है।

प्रश्न : मन जिस स्थाई सुख की खोज में रहता है वह मन के मिट जाने में ही निहित है, कैसे? और ये सम्भव कैसे हो?

उत्तर : इच्छाएं ही दुःख का कारण है। इसलिए इच्छाओं का अंत ही समाधान। यह कैसे संभव है इस पर तो ढेर सारे महापुरुष लिख गए हैं। कई हमारे स्वयं के अनुभव होते हैं। दूसरों के अनुभव शुरूआती तौर पर सहायक हो सकते हैं, लेकिन वास्तविकता यही है कि कोई भी पहले से लिखे गए नियम आदि समाधान नहीं दे सकते। समाधान हमें खुद ही खोजना पड़ता है और हर व्यक्ति का समाधान उसके अनुरूप अलग होता है। आपने अभी रूचि लेना शुरू किया है। धीरे-धीरे आप महसूस करने लगेंगी यह बात। :)

प्रश्न : ज्यादा समझदार होना , अपने ओथेन्टिकल जीवन से दूर ले जाता है मुझे। जीवन एक यात्रा है...इसका कोई भी उद्देश्य नहीं, मुक्ति की चाहत रखना बेवकूफी है। वैसे 'theory of relativity' को समझ कर बहुत सारी सच्चाइयां समझी जा सकती है। (बाकि ,आपके बातों से सहमत हूँ।)

उत्तर : मुक्ति की चाह कोई इरादतन या कहीं से प्रभावित चाह नहीं होती। यह एक सहज इच्छा है जिसका ही प्रतिबिम्ब है दुनिया की तमाम इच्छाएं। बाकी ओथेन्टिकल क्या है और क्या नहीं यह भी विवादस्पद ही है। यह भी व्यक्ति दर व्यक्ति अलग होता जाएगा।

By Monika Jain ‘पंछी’

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Tuesday, September 6, 2016

Michhami Dukkadam - Kshamavani Parva in Hindi

क्षमावाणी पर्व, क्षमा दिवस. Michhami Dukkadam, Daslakshan Kshamavani Parva, Jain Paryushan Uttam Kshama Divas, Samvatsari Kshamapana Messages, Khamat Khamna Sms.

क्षमत क्षमापना

हर दिवस विशेष पर यह बात सुनने को मिलती ही है कि वर्ष में सिर्फ एक ही बार क्यों? बात सही भी है कि वर्ष में सिर्फ एक ही दिन क्यों? तो सबसे पहले तो हमसे किसने और कब मना किया कि हम किसी चीज को वर्ष में सिर्फ एक ही बार अहमियत दें? किसी ने किया क्या? चलो हम वर्ष में सिर्फ एक दिन मनाना भी छोड़ देते हैं। लेकिन क्या सिर्फ उससे हम वर्ष में बाकी सब दिन वह मानने लगेंगे। बल्कि मुझे तो यह लगता है कि ये सब दिवस हमारी भागदौड़ वाली जीवन शैली की ही देन है कि जिन चीजों को रोजमर्रा की ज़िन्दगी में अहमियत मिलनी चाहिए थी...कम से कम उन्हें हम साल में एक बार तो याद कर लें।

एक दृष्टान्त देती हूँ : एक ही परिवार के दो सदस्य थे। दोनों में किसी विवाद के बाद से 8-10 वर्षों तक अनबोला रहा। दोनों कभी परिवार में साथ-साथ होते तब भी अजनबियों की तरह होते थे। मन में एक तरह का तनाव या खिंचाव रहता ही होगा। अहम् बड़ा था इसलिए किसी ने बात करने की शुरुआत भी नहीं की। फिर एक दिन क्षमापना दिवस के दिन परिवार के बाकी सदस्यों को बात करते देख उनमें से एक ने किसकी गलती थी और किसकी नहीं इस बात को पूरी तरह से नजरंदाज कर क्षमा मांग ली...और फिर सब कुछ पहले की तरह से नार्मल हो गया। उसके बाद कभी बात बंद होने की स्थिति नहीं आई।

तो इस तरह से कोई दिन विशेष प्रेरणा का काम भी कर सकता है। बल्कि इन दिवसों का वास्तविक उद्देश्य भी यही है कि ये हमारे लिए प्रेरक बनें। तो जब कोई क्षमावाणी जैसे पर्व पर भी व्यंग्य करता हुआ या उसका विरोध करता हुआ दिखाई देता है तो यह नकारात्मकता की अति लगती है। यह मैं इसलिए नहीं कह रही क्योंकि मेरे नाम के साथ ‘जैन’ का टैग लगा है। यह मैं इसलिए कह रही हूँ क्योंकि यह कहना जरुरी है। बाकी न ही ‘जैन’ शब्द पर और न ही ‘क्षमा’ शब्द पर किसी का भी एकाधिकार है। ‘क्षमा’ का अर्थ तो सभी जानते ही हैं बाकी ‘जैन’ शब्द भी ‘जिन’ शब्द से बना है। ‘जिन’ का अर्थ होता है जिसने ‘राग’ और ‘द्वेष’ को जीत लिया हो...और इस नाते जैन वे सब होंगे जो इस मार्ग के अनुयायी होंगे। खैर! किसी को जैन कहलवाना न कहलवाना मेरा उद्देश्य नहीं है। मुझे तो खुद ही ख़याल नहीं रहता कि सिर्फ किसी शब्द के जुड़ जाने से मैं किसी से अलग भी हो सकती हूँ। पर हाँ, अगर इस क्षमा पर्व के सम्बन्ध में कोई चीज है जो प्रकृति को, लोगों को, प्राणियों आदि को नुकसान पहुँचा रही हो तो मैं खुद आपके साथ उसका विरोध करुँगी। लेकिन कृपया विरोध करने के लिए विरोध या व्यंग्य करना बंद कीजिये। यह अच्छा नहीं है।

खैर! आज यह सब बातें करने का समय नहीं है। जब भी लगता है गलती की है, तो क्षमा मांगने का ख़याल रहता है। लेकिन आज विशेष दिन है :

तो सबसे पहले उन मित्रों से क्षमा जो फेसबुक के शुरूआती दिनों में बने थे। कुछ स्कूल जाने वाले बच्चे थे। एक बार किसी ने कहा था, ‘मोनिका दी, आप बहुत बदल गयी हो। पता नहीं क्या-क्या लिखती हो। हमें पहले वाली मोनिका दी चाहिए।‘ :) बदलाव तो खैर प्रकृति का नियम है। मैं इससे अछूती कैसे हो सकती हूँ? पहले जैसी रहूँ न रहूँ, संपर्क रहे न रहे। लेकिन मन में स्नेह और दुआएं हमेशा रहेंगी। बचपन, स्कूल और कॉलेज के मित्रों की भी यही शिकायत होगी। अत: उनसे भी अंतर्मन से क्षमा याचना।

क्षमा उन सभी मित्रों से जो जीवन और फेसबुक की यात्रा के दौरान अमित्र हुए या ब्लॉक किये गए। ऐसे लोग नगण्य हैं। लेकिन उनसे बस इतना कहना है कि कभी-कभी दूर होना शायद दोनों के ही हित में होता है। समय के गर्भ में क्या है पता नहीं...लेकिन मन में किसी के लिए भी किसी तरह का द्वेष न रहे इसका पूरा प्रयास रहेगा।

क्षमा उन सभी मित्रों से जिन्हें मेरी किसी भी बात, पोस्ट, कमेंट, व्यवहार आदि ने आहत किया। भावनाओं के प्रवाह में कभी-कभी ऐसी गलतियाँ हो जाती है जो सामने वाले को आहत कर जाती है। इसके अलावा मतों में भिन्नता को भी दिल पर ले जाते हैं हम लोग। मतभेद मिटे न मिटे, लेकिन मनभेद न रहे इसका पूरा प्रयास रहेगा।

क्षमा उन सभी मित्रों से जिन्होंने कभी कोई सन्देश भेजा हो और उसका जवाब मैंने न दिया हो। मेरा दिल निश्चय ही इतना बड़ा नहीं कि मैं हर या किसी भी तरह के सन्देश का जवाब दे सकती हूँ। लेकिन उपेक्षा आहत करती है और इसके लिए क्षमा याचना।

क्षमा उन मित्रों से जिनसे मैंने अनावश्यक अपेक्षाएं की हों और उन्हें बुरा लगा हो। अपेक्षाओं से पूर्ण मुक्ति बहुत मुश्किल है। इसलिए अभी आपसे क्षमा की अपेक्षा है। :)

क्षमा सृष्टि के हर जीव से, अजीव से...जिनसे भी मैंने जाने-अनजाने में, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी रूप से राग या द्वेष का सम्बन्ध बनाया हो। यह क्षमा राग व द्वेष को जीतकर विशुद्ध प्रेम के प्रकट होने में हमारी मदद करे इसी मंगल कामना के साथ क्षमत-क्षमापना। :)

By Monika Jain ‘पंछी’

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Sunday, September 4, 2016

Anmol Vichar in Hindi

अनमोल विचार, आदर्श वाक्य, अमूल्य वचन, बहुमूल्य कथन. Anmol Vichar in Hindi. Adarsh Vakya, Amulya Vachan, Bahumulya Kathan, Priceless, Precious, Valuable Messages.

अनमोल विचार

  • कृतज्ञता सबसे सुन्दर फूल है जो आत्मा की गहराई से खिलता है। ~ हेनरी वार्ड बीचर / Henry Ward Beecher
  • कृतज्ञता मित्रता को चिरस्थायी रखती है और नए मित्र बनाती है। ~ बेंजामिन फ्रेंकलिन / Benjamin Franklin
  • किसी ने यह नहीं मापा है, कवियों ने भी नहीं कि मानव ह्रदय में कितना कुछ समा सकता है। ~ जेड फिट्ज्गेराल्ड / Zelda Fitzgerald
  • मेरे लिए तो मनुष्य एक सजीव कविता है। कवि की कृति सजीव कविता का शब्द चित्र मात्र है, जिससे उसका व्यक्तित्व व संसार के साथ एकता जानी जाती है। वह एक संसार में रहता है व उसने अपने भीतर अधिक सुन्दर संसार बसा रखा है। ~ महादेवी वर्मा / Mahadevi Verma 
  • चाहे कविता किसी भाषा में हो, चाहे किसी वाद के अंतर्गत, चाहे उसमें पार्थिव विश्व की अभिव्यक्ति हो और चाहे अपार्थिव की, उसके अमूल्य होने का रहस्य यही है कि वह मनुष्य के ह्रदय से प्रभावित हुई है। ~ महादेवी वर्मा / Mahadevi Verma 
  • मैं तैयारी करूँगा और एक दिन मेरा मौका आएगा। ~ अब्राहम लिंकन / Abraham Lincoln 
  • कोई भी महान व्यक्ति अवसरों की कमी की शिकायत नहीं करता। ~ रॉल्फ वाल्डो इमर्सन / Ralph Waldo Emerson
  • पानी की याददाश्त उत्तम होती है, वो हमेशा वहीँ जाने का प्रयास करता है जहाँ वो था। ~ टोनी मोरिसन / Toni Morrison
  • हम अकेले चलना सीखें तो ठीक है। किसी के सहारे चलना अपने व्यक्तित्व का नाश करना है। ~ सुभाष चन्द्र बोस / Subhash Chandra Bose
  • विचरण करते-करते अपने अनुरूप यदि कोई सज्जन न मिले तो दृढ़ता के साथ अकेले ही विचरण करें। ~ गौतम बुद्ध / Gautam Buddha
  • पानी में अगर काई हो तो मनुष्य उसमें अपना प्रतिबिम्ब नहीं देख सकता। इसी प्रकार जिसका चित्त आलस्य से पूर्ण होता है, वह अपना हित नहीं समझ सकता, दूसरों का हित कैसे समझेगा। ~ गौतम बुद्ध / Gautam Buddha 
  • हास्य के माध्यम से आप अपने जीवन के सबसे बड़े आघात को भी नरम कर सकते हैं। ~ बिल कोस्बी / Bill Cosby
  • मनुष्य ही ऐसा प्राणी है, जिसे हंसने का गुण प्रदान किया गया है। ~ ग्रेविल्ले / Greville
  • सच्चा ज्ञानी वही है जिसने विषय कषाय की निवृत्ति के लिए इन्द्रियों का संयम किया है। ~ अज्ञात / Unknown
  • बुद्धिमता आपकी आंतरिक शक्ति का वह किला है जिसे कोई दुश्मन नष्ट नहीं कर सकता। ~ थिरुकुरल / Thirukkural
  • सही मायने में बुद्धिपूर्ण विचार हजारों दिमागों में आते रहें हैं। लेकिन उनको अपना बनाने के लिए हमको ही उन पर गहराई से तब तक विचार करना चाहिए जब तक कि वे हमारी अनुभूति में जड़े न जमा लें। ~ जॉन डबल्यू गोथे / John W. Goethe
  • किसी को राय देने की तुलना में किसी की अच्छी राय से फायदा उठाने के लिए ज्यादा बुद्धिमता चाहिए। ~ जे. कॉलिन्स / J Collins
  • किसी मुर्ख व्यक्ति की पहचान उसकी वाचालता से होती है जबकि बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान उसके मौन से होती है। ~ पाइथागोरस / Pythagoras
  • ईमानदारी और बुद्धिमानी के साथ किया काम व्यर्थ नहीं जाता। ~ हजारी प्रसाद द्विवेदी / Hazari Prasad Dwivedi
  • विकल्पों का न होना बुद्धि को बढ़िया ढंग से परिमार्जित कर देता है। ~ हेनरी ए किसिंगेर / Henry A Kissinger
  • सबसे बुद्धिमान व्यक्ति के लिए अभी भी कुछ सीखना बाकी होता है। ~ जॉर्ज संटायना / George Santayana
  • बुद्धिमान व्यक्ति को जितने अवसर मिलते हैं, उससे अधिक तो वह पैदा कर सकता है। ~ बेकन / Bacon
  • जो मन अज्ञान के कारण रात्रि है वही प्रज्ञा के प्रकाश में दिवस भी बन जाता है। ~ ओशो / Osho
  • पृथ्वी में कुआं जितना गहरा खुदेगा, उतना ही अधिक स्वच्छ जल निकलेगा। वैसे ही मानव की जितनी अधिक शिक्षा होगी, उतनी ही तीव्र बुद्धि बनेगी। ~ संत तिरुवल्लुवर / Saint Thiruvalluvar
  • महान आदर्श महान मस्तिष्क का निर्माण करते हैं। ~ रॉल्फ वाल्डो इमर्सन / Ralph Waldo Emerson
  • ईमानदारी के लिए किसी छद्म वेशभूषा या साज श्रृंगार की जरुरत नहीं होती, सादगी अपनाएं। ~ औटवे 
  • ईमानदारी वैभव का मुंह नहीं देखती, वह तो मेहनत के पालने पर किलकारियां मारती है। ~ रांगेय राघव / Rangeya Raghav
  • इतिहास कुछ भी नहीं करता, उसके पास अपार धन नहीं होता, वो लड़ाइयाँ नहीं लड़ता, वो तो मनुष्य है वास्तविक, जीवित जो ये सब करते हैं। ~ कार्ल मार्क्स / Karl Marx 
  • इतिहास तो एक सिलसिलेवार मुकम्मल चीज है। जब तक तुम्हें यह मालूम न हो कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में क्या हुआ, तुम किसी एक देश का इतिहास समझ ही नहीं सकते। ~ जवाहरलाल नेहरु / Jawaharlal Nehru
  • जिसके पास स्वास्थ्य है उसके पास आशा है और जिसके पास आशा है, उसके पास सब कुछ है। ~ अरबी कहावत / Arab Proverb
  • सबसे बड़ी भूल जो कोई मनुष्य कर सकता है, वह है - किसी भी प्रकार के हित साधन के लिए स्वास्थ्य का त्याग करना। ~ ए. शोपनहोवर / A. Schopenhauer
  • विश्व की सभी तरह की औषधियों में विश्राम और उपवास रुपी औषधियां सर्वोत्तम है। ~ बेंजामिन फ्रेंकलिन / Benjamin Franklin
  • हमारा कर्त्तव्य है कि हम अपने शरीर को स्वस्थ रखें, अन्यथा हम अपने मन को सक्षम और स्वस्थ नहीं रख पाएंगे। ~ गौतम बुद्ध / Gautam Buddha 
  • एक पिता अपने बच्चों के लिए जो सबसे प्रमुख चीज कर सकता है वो उनकी माँ से प्रेम करना। ~ थीओडर हेस्बर्ग / Theodore Hesburgh
  • अपराध होने ही न देना, उसके लिए सजा देने से कहीं बेहतर है। ~ अज्ञात / Unknown 
  • लगातार बीते समय के बारे में सोच-सोचकर अक्सर हम लोग अपना आने वाला भविष्य बिगाड़ बैठते हैं। ~ पर्सियस / Perseus 
  • श्रद्दालु पुरुष ही ज्ञान प्राप्त कर सकता है और ज्ञान प्राप्त होने पर ही इन्द्रियों की संयम-साधना हो सकती है। ~ गीता / Geeta 
  • जितने भी संयोग सम्बन्ध है वे सब अनित्य है। ~ अज्ञात / Unknown 
  • यह सबसे बड़ा आश्चर्य है कि व्यक्ति को स्वयं का अपराध, अपराध नहीं लगता। ~ अज्ञात / Unknown 
  • जो भी तुमसे मांगता है उसे दो, जो तुम्हारा सामान ले जाएँ उनसे दुबारा मत पूछो और जैसा व्यवहार तुम उन लोगों से चाहते हो, वैसा उनके साथ करो। ~ जीसस / Jesus
  • भला मानव स्वतंत्रता की ह्रदय से चाह रखता है। शेष लोग तो स्वछंदता प्रेमी होते हैं। ~ जॉन मिल्टन / John Milton 
  • योग्यता को छिपाने की कला जानना ही सच्ची योग्यता है। ~ फ्रेंकोइस डे ला रोशेफोकोल्ड / Francois De La Rochefoucauld 
  • मनुष्य अपने गुणों से आगे बढ़ता है न कि दूसरों की कृपा से। ~ लाला लाजपतराय / Lala Lajpat Rai 
  • मनसा, वाचा, कर्मणा किसी को दुःख न पहुंचाओं। क्रोध को क्षमा से, विरोध को अनुरोध से, घृणा को दवा से और द्वेष को प्रेम से जीतो। ~ Maharshi Dayanand Saraswati / महर्षि दयानंद सरस्वती

Saturday, September 3, 2016

Science Quotes in Hindi

विज्ञान और धर्म, वैज्ञानिक दृष्टिकोण. Science and Religion Quotes in Hindi. Scientific Quotations, Vigyan Dharma par Vichar, Slogans, Sayings, Sms, Status.

Science Quotes

  • 'पूर्वाग्रह' विज्ञान (प्रयोग आधारित) और अंतर्ज्ञान (प्रयोग रहित) दोनों के ही मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं, सहायक है। लेकिन फिर भी अंतर्ज्ञान विज्ञान से कई कदम आगे हैं। विज्ञान कभी वहां तक पहुँच पायेगा जहाँ तक अंतर्ज्ञान पहुँचता है, कहना मुश्किल है। इसका मुख्य कारण यह भी है कि विज्ञान मुख्य रूप से सुविधाएँ जुटाने और तकनीकी विकास का ज्ञान बनता जा रहा है। विज्ञान की भूमिका को नकारा बिल्कुल नहीं जा सकता। लेकिन साथ ही यह भी हम सबके लिए सोचने वाली बात है कि जब एक पत्ते की जरुरत हो तो हम एक ही तोड़ें, जब उसकी भी जरुरत नहीं तो हम क्यों तोड़ें? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • धर्म/अध्यात्म का विज्ञान से कोई बैर नहीं है...रत्ती भर भी बैर नहीं है। धर्म तो गति का कारक है। बैर तो मन की उपज है जो अधर्म को धर्म के रूप में स्थापित करने लगता है और विज्ञान को भी गर्त की दिशा में ले जाने लगता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • जितने भी 'घोर' लोग होते हैं, फिर चाहे वे 'घोर आस्तिक' हो, चाहे 'घोर नास्तिक', 'घोर समर्थक' हो चाहे 'घोर विरोधी', वे सभी पूर्वाग्रहों से ग्रसित महा अन्धविश्वासी होते हैं। क्योंकि वास्तव में जो वैज्ञानिक मन-मस्तिष्क होता है, उसे पता होता है कि अभी बहुत कुछ जानना शेष है, अभी बहुत कुछ सीखा जाना बाकी है, बहुत से विचार आने वाले समय में बदल सकते हैं, क्योंकि अभी खोज जारी है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • बिना जाने विश्वास किया जाए या अविश्वास...दोनों अन्धविश्वास ही है। अपवादों को छोड़ दें तो यहाँ नास्तिकता और आस्तिकता दोनों ही अन्धविश्वास की तरह दिखाई पड़ रहे हैं। एक प्रवाह जिसमें बस बहे जा रहे हैं लोग। पता नहीं जो चीज जानी ही नहीं गयी, अनुभव ही नहीं की गयी, उसके बारे में इतनी कट्टरता के साथ कैसे कह देते हैं लोग? अपने हर शब्द, कार्य, विचार, अपने जीवन और आसपास होने वाली हर घटना, हर वस्तु, हर प्राणी के प्रति सजगता और संवेदनशीलता का समावेश जब जीवन में होने लगेगा तब धीरे-धीरे अनुभव होने लगेगा कि बहुत कुछ रहस्यमयी है, पर कहीं गहरे में वह विज्ञान और कारण-कार्य-सिद्धांत पर पूरी तरह खरा भी उतरता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • चमत्कार जैसा कुछ नहीं होता। हर चीज का कोई कारण अवश्य होता है। हाँ, बस वह कारण ज्ञात या अज्ञात हो सकता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • लम्बे उपवास का सबसे सही समय वर्षा ऋतु मानी जाती है। और खाने का सही समय सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच होता है। धर्म और विज्ञान अलग-अलग नहीं होते। अलग हैं तो बदल डालें। और अलग नहीं तो थोड़ा प्रकाश डालें। धर्म जड़ता नहीं गति है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • विज्ञान हमारे आसपास के संसार की एक अवधारणा है। विज्ञान एक जगह है, जहाँ प्रकृति प्रदत्त चीजों को पाने की ख़ुशी आपको मिलती है। ~ सुब्रह्मण्यम चन्द्रशेखर / Subrahmanyan Chandrasekhar  
  • आधुनिक भौतिक विज्ञान उन्हीं निष्कर्षों तक पहुंचा है जिन तक वेदांत युगों पहले पहुँच चूका था। ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda

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Friday, September 2, 2016

Poem on Forgiveness in Hindi

क्षमापना दिवस. क्षमा वाणी पर्व कविता, मिच्छामी दुक्कड़. Poem on Forgiveness in Hindi. Uttam Kshama Yachna, Maafi Shayari, Sorry Sms, Apology Status, Messages.

क्षमा

क्षमा से नफ़रत के शूल गलते हैं
क्षमा से ही प्यार के फूल खिलते हैं
क्षमा का प्रभाव है कुछ ऐसा
दुश्मन भी बन दोस्त गले मिलते हैं।

जितना सुन्दर शब्द है ये
उतना ही सुन्दर इसका होना
क्षमा बनाती है निर्मल
मन मंदिर का हर एक कोना।

क्षमा मांगने और कर देने से
बनता है एक पूर्ण व्यक्तित्व
अहंकार न टिक पाता
जहाँ होता है क्षमा का अस्तित्व।

न देकर गलतियों की माफ़ी
कर रहे हम अपने साथ नाइंसाफी
घूम रहे हैं लेकर बोझ
बने हुए खुद के अपराधी।

तो आओ इस क्षमा दिवस पर
कर दे हम एक दूजे को माफ़
दिल में भरा जो कूड़ा करकट
कर दे उसको बिल्कुल साफ़।

By Monika Jain 'पंछी'

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Thursday, September 1, 2016

Essay on Gautam Buddha in Hindi

गौतम बुद्ध, डाकू अंगुलिमाल, आत्म विकास पर निबंध. Essay on Mahatma Gautam Buddha in Hindi. Enlightenment, Problem and Solution, Selfishness, Self Improvement.

बुद्ध...सच्चे अर्थों में स्वार्थी

कभी-कभी लगता है लोगों को अंगुलिमाल उतना बेचैन नहीं करता जितना कि बुद्ध करते हैं। उनकी समस्या अंगुलिमाल की हिंसा नहीं बुद्ध की अहिंसा बन जाती है। :) ...तब जबकि वे खुद कभी अंगुलिमाल को नहीं बदल पाए। अंगुलिमाल को कैद किया जा सकता है...कठोर दंड दिया जा सकता है। जरुरी है तो होना भी चाहिए। लेकिन यह ख़याल रहे कि अंगुलिमाल बुद्ध के प्रभाव में ही बदलते हैं। बहरहाल तो इस युग में अंगुलिमाल जैसे बदलने वाले भी कम ही मिलेंगे। गुरु और शिष्य दोनों के ही उत्कृष्ट स्तर का उदाहरण है यह। लेकिन अगर दोषी को छोड़कर हमारी आलोचना का केंद्र निर्दोष बनते हैं तो थोड़ा ठहरकर सोचने की जरुरत है कि दोषिता से निर्दोषिता के बीच हम कहाँ खड़े हैं? बहुत संभावना है कि हम दोषिता के निकट हों। क्षणिक और स्थायी...समाधान दोनों ही जरुरी होते हैं, लेकिन उनके अंतर को हमें समझना होगा। समस्या के कारण (अज्ञान) को समझना होगा। समस्या के समाधान (ज्ञान) को समझना होगा और समाधान के मार्ग (सजगता) को भी समझना होगा।

प्रश्न : लोगों के बारे में तो कहा नहीं जा सकता लेकिन अपनी बात अगर करूँ तो ज़रूर किसी सो कॉल्ड बुद्ध से मिलना, उसे देखना चाहूंगी। जनता ने अपने आस-पास अंगुलिमाल तो एक्ससेस में देखे सुने हैं, निर्भया वाले, अभी हरियाणा में भी एक...सब अंगुलिमाल ही तो थे। बुद्ध ने अपने समय में कितने अंगुलिमाल सुधार दिए, इसकी सच्चाई पर तो बस अंदाज़े ही लगाए जा सकते हैं। आज के समय में कोई बुद्ध हों, तो उनकी ज़रूरत सच में पड़ेगी। इस से बुद्धत्व की डोक्ट्रिन भी टेस्ट हो जाएगी कि बुद्धत्व कितना ओवररेटेड है, और कितना अंडररेटेड।

उत्तर : बुद्ध और अंगुलिमाल प्रतीक हैं जिनके माध्यम से यह पोस्ट समस्त दुनिया में और किसी व्यक्ति विशेष में ही व्याप्त सत्व और तम की ओर इशारा करती है। फांसी, कैद या जितने भी अन्य उपाय हैं वह समाज की तात्कालिक आवश्यकताओं के अनरूप उचित हो सकते हैं। फौरी तौर पर एक संतुलन बना रहे इसके लिए जरुरी हो सकते हैं। ये एक भय जरुर पैदा कर सकते हैं, लेकिन क्या ये किसी इंसान का अंतस बदल सकते हैं? क्या गलत से गलत को स्थायी रूप से बदला जा सकता है? इंसान का अंतस तभी बदलेगा जब वह अपने सत्व को पहचानेगा। जब वह अपने अज्ञान से ऊपर उठेगा।...और यह प्रेरणा उसे कहीं से भी मिल सकती है। वह प्रेरक तत्व जो भी होगा वह सत्व ही होगा।

और ऐसे तो आपको ढेरों उदाहरण मिल जायेंगे जहाँ किसी की अच्छाई या व्यक्तित्व से प्रेरित होकर किसी में सुधार आया हो। आप खुद के जीवन में ऐसे उदाहरण खोज सकती हैं। मेरे पास तो ऐसे कई उदाहरण है। रही बात रेटेड की तो हर चीज मूल्य लगाने के लिए नहीं होती। पर लगाना भी हो तो जिस अच्छाई को आप समाज में देखना चाहती हैं क्या उसके चरम को इग्नोर कर सकती हैं? आदर्श तो वही होगा। बाकी दुनिया को सुधार देने की भावना जितनी प्रबल होती है वहां उतना ही अहंकार छिपा होता है। जैसे आतंकवादी भी अपनी ओर से यही कर रहे होते हैं।

जिस क्षण हम खुद बदलते हैं उस क्षण ही पूरी दुनिया बदलती है। अन्यथा तो हम बस एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में ही लगे रहते हैं। हम खुद को पूर्ण निर्दोष बनाये बगैर दुनिया को सुधारने की बात करें...यह प्रचलित और जरुरी हो तब भी कहीं गहराई में बहुत अजीब है। क्योंकि जितना भी दोष हममें विद्यमान है उसका ही थोड़ा बड़ा रूप किसी अपराधी में है...और यह जो अजीब वाली फीलिंग है यह भी किसी सिदार्थ को बुद्धत्व की ओर प्रेरित करती है। बाकी तो यह ऊपर ही स्पष्ट है कि समाज की तात्कालिक जरूरतों के अनुरूप कानून और न्याय व्यवस्था होनी ही चाहिए। लेकिन यह अंतिम समाधान नहीं। दोषों का दूर होना स्वयं निर्दोष बन जाने में ही निहित है। हाँ, इससे फैला उजास अवश्य वह परिवर्तन ला सकता है जो क्रांति की अनगिनत मशालें नहीं ला सकती। तो जो लोग यह कहते हैं कि बुद्ध और महावीर स्वार्थी हैं, वे अनजाने में ही सही बिल्कुल सही कहते हैं। क्योंकि कोई भी व्यक्ति सच्चे अर्थों में 'परमार्थी' बन ही नहीं सकता जब तक वह सच्चे अर्थों में 'स्वार्थी' न बन जाए। :)


By Monika Jain ‘पंछी’

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