Wednesday, September 28, 2016

Poem to mend a Broken Heart

Poem to Mend a Broken Heart in English. Breaking Relationship, Shattered Love, Encouraging Words, Heal a Break Up, Inspirational Healing Rhyme, Mending Poetry.

 
It's Time to Awake

Your love, your care
I searched everywhere
Here and there
I found that nowhere.

I kept crying
But you didn't care
How cheap you are
You made me aware.

Promises you made
All proved fake
It's time to awake
Now no one can me break.

I am not a toy
with which you can enjoy
My dreams, Oh boy!
You never can destroy.

I can walk alone
Who cares you're gone
If you think I'm forlorn
then you are a moron.

By Monika Jain 'Panchhi'
 
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Thursday, September 22, 2016

Self Dependence, Development Essay in Hindi

आत्मनिर्भरता पर निबंध, स्वावलंबन, विज्ञान, तकनीक, आर्थिक विकास. Essay on Self Dependence, Reliance in Hindi. Development of Science and Technology, Paragraph.

विकास बनाम आत्मनिर्भरता

कुछ दिन पहले दो दिन तक शहर में नेट और मोबाइल सेवा ठप्प रही।...कारण था एक उधार लेने वाले ने उधार न चुकाने की मंशा के चलते उधार देने वाले की हत्या कर दी और उसके घर को भी लूट लिया। खैर! इस ख़बर की ओर ध्यान दिलाना मेरा उद्देश्य नहीं था। ऐसी ख़बरे तो आप रोज ही अख़बारों में पढ़ते हैं, टीवी पर देखते हैं। लेकिन हाँ, इन घटनाओं का कारण जरुर इस पोस्ट में मिल जाएगा।...तो मैं बात कर रही थी दो दिनों तक नेट और मोबाइल सेवा ठप्प होने की। कैसा महसूस होता है जब अचानक से इन्टरनेट या कॉल की सुविधा बंद हो जाती है? कैसा लगता है जब पूरे दिन बिजली नहीं आती? कैसा लगता है जब अचानक से यातायात के साधन किसी हड़ताल या अन्य किसी कारण से बंद हो जाए? कैसा लगता है जब धार्मिक उन्मादों के चलते शहर, मार्केट, कहीं भी आना-जाना सब बंद हो जाता है? कैसा लगता है जब किसी दिन घर का फ्रिज, पंखा, मिक्सर या कोई भी जरुरी मशीन काम करना बंद कर दे और कुछ दिनों तक कोई ठीक करने वाला उपलब्ध न हो? कैसा लगता है जब पूरी तरह से नौकरों पर निर्भर मालिक के यहाँ कुछ दिन नौकर न आये? और भी ऐसे कई सारे सवाल बनाये जा सकते हैं। हर एक सवाल का ज़वाब कई लोगों के लिए कुछ बेचैनी, परेशानी, किसी जरुरी काम का रुक जाना, पैसों का नुकसान, समय का नुकसान, चिड़चिड़ापन, घबराहट, चिंता, तनाव और ऐसी ही कई चीजें होंगी।

मेरा अगला सवाल यह कि विकास, तरक्की और आगे बढ़ने के आपके लिए क्या मायने हैं? अधिकांश लोगों का जवाब होगा वैज्ञानिक-तकनीकी उन्नति, सुख-सुविधा युक्त साधनों का बढ़ना, समय और मेहनत बचाने वाली मशीनों का आना, एक बटन दबाते ही सब कुछ हो जाए...ऐसा ही कुछ...है न? पर वाकई क्या विकास की यह परिभाषा सही है? विकास का आशय मैं लेती हूँ आत्मनिर्भरता का बढ़ते जाना। इस आत्मनिर्भरता का आशय सिर्फ आर्थिक आत्मनिर्भरता जितना संकुचित मत करना। उससे कई अधिक विस्तृत अर्थ है इस शब्द का...जिसकी अंतिम सीमा वहां तक पहुँचती है जहाँ पर आत्म के सिवा और कुछ भी शेष नहीं रह जाता। किसी चीज पर कोई निर्भरता नहीं। पूर्ण स्वतंत्रता...पूर्ण मुक्ति की स्थिति।

खैर! यह शीर्ष की बात है। हम फिर से पीछे लौटते हैं। ऊपर जिस तरक्की की मैंने बात की और जिसे आप विकास बताएँगे वहां आत्मनिर्भरता का हश्र कैसा है यह सोचने और समझने वाली बात है। जहाँ एक दिन भी अगर इन्टरनेट उपलब्ध न हो तो त्राहि-त्राहि मच जाती है। यातायात सेवा ठप्प हो जाए, फ़ोन घुम हो जाए, शहर बंद हो जाए, बिजली चली जाए तो इंसान बौखला जाता है। हमारा तथाकथित विकास हमें इस कदर अन्य लोगों और वस्तुओं पर निर्भर बनाता जा रहा है कि हम साधनों को साध्य समझ बैठे हैं। ऐसे में अध्यात्म का जीवन में समावेश इसलिए भी जरुरी है क्योंकि यह अंधाधुंध विकास की दौड़ में थोड़ा ठहरकर हमें वास्तविक अर्थों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ले जाता है। कहते हैं कि भगवान् महावीर की आत्मनिर्भरता ऐसी थी कि उन्हें भोजन करने की जरुरत नहीं होती थी...तब भी उनका शरीर बलिष्ठ था। शरीर से अद्भुत कांति चारों ओर बिखरी रहती थी...वस्त्रों की उन्हें जरुरत नहीं थी...महलों की उन्हें जरुरत नहीं थी। आत्मनिर्भरता के असल मायने तो यही हैं जहाँ बाहरी साधनों पर निर्भरता और आसक्ति घटती ही जाए। ऐसी आत्मनिर्भरता तक हम पहुचं जाएँ तब तो कितनी समस्यायों का समाधान हो जाएगा। भले ही हम आवश्यकता और समय की मांग के अनुरूप कुछ साधनों का प्रयोग करें लेकिन वे हमारे लिए जीवन और मरण का प्रश्न तो नहीं बनेंगे।

अब सोचने वाली बात यह है कि महज तकनीकी सुविधाओं के विकास के द्वारा हम कितने आत्मनिर्भर और विकसित बन रहे हैं? इस पोस्ट द्वारा मैं तकनीकी विकास का विरोध नहीं कर रही...यह पोस्ट भी आप तक तकनीकी सुविधा के उपयोग के जरिये ही पहुँच रही है। लेकिन विकास के नाम पर जो अति हो रही है उसके बारे में चिंतन हेतु मैं कुछ तर्क दे रही हूँ। वह अति विकास क्या काम का जो प्रकृति से नीचे गिराकर फिर से हमें प्रकृति की ओर लौटने को मजबूर करे? हम कब तक पहले आग लगाकर फिर कुआँ खोदने का उपक्रम करते रहेंगे? कब तक? बेहतर होता विषमता की खाईयों को बढ़ाते जाने की बजाय हम संतुलित बाह्य विकास और आत्म विकास की ओर ध्यान देते। बेहतर होता विज्ञान का उपयोग जगत और जीवन के रहस्यों की खोज में मुख्य रूप से होता। केवल सुविधा के साधन जुटाते जाने वाला विज्ञान विकास नहीं विनाश का पर्याय लगता है। क्योंकि जितनी अधिक हमारी दूसरों पर निर्भरता होगी, उतने ही हम गुलाम और उतनी ही हमारे जीवन की चाबी किसी और के हाथों में होगी...फिर चाहे हम वस्तुओं के गुलाम बनें या फिर व्यक्तियों के।

By Monika Jain ‘पंछी’

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Wednesday, September 21, 2016

Karma Yoga, Geeta Gyan in Hindi

भागवत गीता ज्ञान के उपदेश, कर्मयोग क्या है? Karma Yoga in Hindi. Bhagavad Geeta Updesh, Gita Gyan, Selfless Service, Detachment in Fruits of Action, Karm Yog.

(1)

कर्मयोग

वह एक शेयर ट्रेडिंग फर्म थी। मार्केट वोलेटिलिटी के समय ब्रोकरेज की कमाई बढ़ जाती है, तो ऐसे समय में उस फर्म के ओनर तालियाँ पीट-पीट कर हँसते और ठहाके लगाते नज़र आते थे। उनके किसी कस्टमर का फ़ोन आता जिसका पैसा डूबने वाला हो, जो घबराया हुआ हो, तब भी उनकी ख़ुशी देखते ही बनती थी...वही ठहाकों वाली हंसी। बहुत अजीब से एक्सप्रेशन्स होते थे उनके चेहरे के। मेरे लिए यह बहुत हैरान करने वाली बात होती थी। वैज्ञानिक तकनीकी विकास और ग्लोबलाइजेशन के नाम पर हमने लाइफ साइकिल को बहुत ज्यादा कॉम्पलीकेटेड बना दिया है। ऐसे में किसी एक का नुकसान किसी एक का फायदा होगा, यह तो होता ही है। कुछ मिलता है हमें तो ख़ुश होना भी स्वाभाविक है। लेकिन किसी और के दुःख में हम एकदम असंवेदनशील ठहाकों की गुंजाईश कैसे खोज पाते हैं?

खैर! यह कईयों के लिए बहुत छोटी सी बात होगी...क्योंकि असंवेदनशीलता इस कदर व्याप्त है कि इन्हीं ठहाकों के बीच मौत भी खरीदी और बेची जाती है। इन्हीं ठहाकों के बीच खाने-पीने की चीजों में मिलावट कर पूरी मानव जाति को जहर परोसा दिया जाता है और इन्हीं ठहाकों के बीच जिन्दा शरीरों का अपहरण कर ज़िन्दगी जहन्नुम बना दी जाती है।...तो फिर जो कानूनन हो रहा है उसमें ठहाके लगाना क्या गलत? लेकिन कानून के दायरे में भी अक्सर ही हमारा फल किसी के लिए दुष्फल हो रहा होता है। इसलिए भी फल में अत्यधिक आसक्ति को त्यागना संवेदनशीलता और समानुभूति का ही पर्याय है। बाकी कोशिश यह की जानी चाहिए कि हर समय बाहर से प्रभावित हमारी ख़ुशी घटते-घटते एक दिन भीतर से छलकने और झलकने लगे। ख़ुश होना, हँसना, मुस्कुराना बहुत ख़ुशी की बात है। बस इसकी कीमत क्या है इस पर थोड़ा ध्यान रहे। कीमत केवल वह नहीं जो आपकी जेब से जाने वाली है, कीमत वह भी जो किसी और के आंसू बनने वाली हो। इसलिए सबसे पहले तो हम ऐसे कर्म का चुनाव करें जिसमें किसी और का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नुकसान न्यूनतम हो (अगर समाज सेवा का कर्म चुन सकें तो सबसे बेहतर है) और उसके बाद यह जरुरी है कि फल में हमारी आसक्ति कम से कम हो। हमारा पूरा ध्यान बस कर्म करने पर हो। यही कर्मयोग है। यही वास्तविक आनंद का हेतु है।

By Monika Jain ‘पंछी’

(2)

गीता ज्ञान

(लेखन/कविता के क्षेत्र में अच्छी खासी महाभारत चल रही है। सिर्फ युद्ध शुरू करने के लिए नहीं, युद्ध रोकने के लिए भी गीता ज्ञान की जरुरत पड़ती है।)

हे लेखक!

क्यों व्यर्थ झगड़ा करते हो? किससे व्यर्थ लड़ते हो? कौन तुम्हें हरा सकता है? आत्मा न हारती है, न जीतती है। आत्मा तो लिखती भी नहीं। जो लिखा गया अच्छा था। जो लिखा जा रहा है अच्छा है। जो लिखा जाएगा वह भी अच्छा होगा। भूत-भविष्य की चिंता छोड़ो, वर्तमान चल रहा है।

तुम्हारा क्या गया जो तुम लड़ते हो? तुम क्या लाये थे जो तुम झगड़ते हो? तुमने क्या लिखा था जो तुमने खो दिया? तुम न कोई कविता लेकर आये थे, न कोई लेख लेकर जाओगे। तुमने शब्द यहीं से लिए, तुमने विचार यहीं से लिए। जो लिखा वह यहीं पर दिया। खाली हाथ आये थे खाली हाथ चले जाओगे। जो शब्द/विचार आज तुम्हारे हैं कल किसी और के होंगे, परसों किसी और के। तुम इन्हें अपना समझकर मग्न हो रहे हो बस यही तुम्हारे दु:खों का कारण है।

लिखते समय दृष्टा बनों फिर खुद को लेखक नहीं पाओगे। लड़ते समय भी दृष्टा और साक्षी बनों...फिर लड़ नहीं पाओगे। ये शब्द और विचार न तुम्हारे हैं, न तुम इन शब्दों और विचारों के। तुम इन शब्दों और विचारों को ईश्वर/शून्य को अर्पित करो। यही सबसे उत्तम है। यही आनंद का रहस्य है।

तुम्हारा कृष्ण!

By Monika Jain ‘पंछी’

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Poem on Peace in Hindi

विश्व शांति दिवस पर कविता, अंतरराष्ट्रीय अमन, सुकून शायरी. Poem on International Peace Day in Hindi. Peaceful Inner World Poetry Lines, Harmony Rhymes, Slogans.

शांति कैसे हो?

शांति कैसे हो?
भीतर कोलाहल, बाहर कोलाहल
भीतर का शोर पहुँचता है बाहर
बाहर का शोर पहुँचता है भीतर
चक्र कैसे टूटे?
सम्बन्ध कैसे छूटे?

अलग कर देना खुद को
शोर और श्रोता से,
बन जाना मात्र साक्षी
मन अंकित करेगा ध्वनियों को
कान सुनेंगे आवाजें सारी...
पर तुम न मन बनना
और न ही कान
तुम बन जाना बस एक प्रमाण!

वह प्रमाण जो प्रभावों से हैं शून्य
जो नहीं बहता संग आवाजों के...
विस्फोटों के बीच भी
जो बचा पाता है अपनी कांति
बस वही लाएगा जीवन में
प्रेम और शांति।
बस वही लाएगा जीवन में
प्रेम और शांति।

By Monika Jain ‘पंछी’

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Tuesday, September 20, 2016

Great People Quotes in Hindi

महान व्यक्तियों, महापुरुषों पर विचार, अनमोल वचन, सुविचार. Quotes on Great People in Hindi. Mahapurushon ke Kathan, Mahan Vyaktitva, Personalities, Thinkers.

Great People Quotes

  • सोच रही थी कि लोगों ने जिन-जिन महापुरुषों को अपनी-अपनी संपत्ति बना रखा है, अगर वे महापुरुष उनके वर्तमान व्यक्तिगत जीवन में निकट सम्बन्धी होते या आसपास ही होते तो उनके उनसे कैसे सम्बन्ध या उनके प्रति कैसे विचार होते? :p ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जब महावीर से पूछा गया, 'आप दुनिया को कैसी बनाना चाहते हैं?’ तो उन्होंने कहा, ‘जैसी यह है।' अहिंसा का चरम है यह। जहाँ पूर्ण स्वीकार होता है। जहाँ व्यक्ति अकर्ता बन जाता है। जहाँ अहंकार खत्म हो जाता है। अकर्ता के कर्म निश्चय ही दुनिया की भलाई के लिए ही होंगे लेकिन साथ ही उन्हें सब कुछ स्वीकार भी होगा। उनका किसी से कोई बैर नहीं होगा। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • ओशो, सद्गुरु, महावीर, बुद्ध, कृष्ण...बहुत थोड़ा पढ़ा है, पर सभी को पढ़ते हुए जो मूल, गहन और सूक्ष्म बात है, उसमें हमेशा समानता ही पायी है।...और इस समानता को महसूस कर पाना भी एक अद्भुत अनुभव है। अगर अंतर है तो सिर्फ रास्तों में है, तरीकों में है...और ये रास्तें और तरीके भी कई तरह से ओवरलैप कर जाते हैं। बस हर व्यक्ति अनूठा है इसलिए उसे अपनी क्षमताओं, रूचि और परिस्थितियों के अनुरूप अपना रास्ता चुनना होता है। जिसका इस बात से अधिक सम्बन्ध नहीं कि आप किस धर्म के टैग के साथ जन्मे हैं। सबको पढ़िए लेकिन पूर्वाग्रहों और अहंकार से थोड़ा मुक्त होकर। हर जगह बहुत कुछ अच्छा मिल जाएगा, बस उद्देश्य अच्छा तलाशने का होना चाहिए। जिसे विवेक गलत कहता हो, उसे पकड़ने की जरुरत है ही नहीं। इसके अतिरिक्त व्यक्ति भौतिकवादी हो, आध्यात्मिक हो, कट्टर हो, समाज सुधारक हो या कुछ भी...तलाश सभी की एक ही है। अंतर बस इतना ही है कि कुछ भटक रहे हैं, कुछ संभल रहे हैं, कुछ संभल कर भटक रहे हैं। बहुत थोड़े से लोग होते हैं जो भटक कर फिर संभल जाते हैं और सँभलने के बाद फिर नहीं भटकते। :) मंजिल सभी की एक ही है फिर ये इतनी समस्याएं क्यों आती है? समस्या सिर्फ हमारी गृहणशीलता में है, और कहीं भी नहीं। हाँ, इस समस्या के कारण कई सारे हो सकते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • ज्ञानी बड़ा कार्य आरम्भ करने पर भी नहीं घबराते। ~ हितोपदेश 
  • महान कवि हों, इसके लिए जरुरी है कि अच्छे श्रोता भी हों। ~ वाल्ट व्हिटमैन / Walt Whitman 
  • एक महान आदमी एक प्रतिष्ठित आदमी से इस तरह से अलग होता है कि वह समाज का नौकर बनने को तैयार रहता है। ~ डॉ भीम राव अम्बेडकर / Dr Bhim Rao Ambedkar 
  • जो लोग महान होते हैं, वे अपनी शरण में आये हुए नीच लोगों से भी वैसा ही व्यवहार करते हैं और अपनापन बनाये रखते हैं, जैसा सज्जनों के साथ। ~ कालिदास / Kalidas 
  • महान लोग हमेशा आपको अनुभूति करवाते हैं कि आप भी महान बन सकते हैं। ~ मार्क ट्वेन / Mark Twain 
  • एक नायक सौ में एक पैदा होता है, एक बुद्धिमान व्यक्ति हजारों में एक पाया जाता है, लेकिन एक सम्पूर्ण व्यक्ति शायद एक लाख लोगों में भी ना मिले। ~ प्लेटो / Plato 
  • स्वामी जी ने पूरब और पश्चिम, धर्म और विज्ञान, अतीत और वर्तमान का समायोजन किया। यही वजह है कि वह महान है। ~ सुभाष चन्द्र बोस / Subhash Chandra Bose

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Good Quotes in Hindi

अच्छे विचार, वचन, सुविचार, सुवचन, अच्छाई. Good Quotes in Hindi. Goodness Sms, Achhe Vichar, Vachan, Suvichar, Achhai Quotations, Status, Thoughts, Sayings.

Good Quotes

  • सिखाने का उन्माद इतना अधिक न हो कि कोई सीखने से विद्रोह कर बैठे। बहुत कुछ सीखने की जरुरत होती है सिखाने वाले को। जैसे सिखाने की इच्छा अति बलवती हो तो सबसे पहले तो यह अति छोड़ना ही सीख लेना चाहिए। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जितना आसान है विज्ञान का विद्यार्थी बनना...उतना ही मुश्किल है वैज्ञानिक चिंतन का विकसित होना और उससे भी अधिक मुश्किल है सहज धर्म का उदय होना। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • खुद को ज्यादा समझदार समझना तो नासमझी है ही लेकिन दूसरों को ज्यादा समझदार समझ लेना भी नासमझी ही है। :p :) ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • अजीब है न? हमें लगभग हर एक उत्सव को इको फ्रेंडली मनाने की अपील जारी करनी पड़ती है...और हम उन्हें उत्सव कहते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • किसी की भी अनासक्ति का कारण समस्त जगत/जीवन के विरोधाभास/द्वंद्व/द्वैत को समझ पाने की संवेदना ही रहा होगा...नहीं? ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • जब भी कोई मेरा विश्वास तोड़ता है या मेरे दिल को ठेस पहुंचाता है तो मैं खुद से एक वादा करती हूँ कि मैं पूरी कोशिश करुँगी कि ऐसा किसी के साथ ना करूँ...अच्छे और सच्चे लोगों के साथ तो बिल्कुल भी नहीं। क्योंकि मेरे लिए धर्म किसी पत्थर के सामने हाथ जोड़कर अपने सुख, समृद्धि और सफलता के गिड़गिड़ाना नहीं है। मेरे लिए धर्म लोगों के साथ वैसा ही आचरण और व्यवहार करना है जैसा मैं खुद के लिए उनसे चाहती हूँ। अच्छाई की ओर कदम बढ़ाने की प्रेरणा के लिए मुझे किसी अच्छे इंसान की तलाश कभी नहीं करनी पड़ती। बुराई और बुरे लोग मेरे लिए उत्प्रेरक का कार्य करते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • दूसरों की नजरों में अच्छा बनने की चाह रखने से पहले हमें खुद की नजरों में अच्छा बनना चाहिए। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • अच्छाई किसी भय के अधीन नहीं होनी चाहिए, फिर चाहे वह ईश्वर का भय ही क्यों न हो। अच्छाई तो स्वाभाविक होनी चाहिए, जो ईश्वर के अस्तित्व या कर्म फल से अप्रभावित होती है। ~ Monika Jain 'पंछी'  
  • बुराई की विजय के लिए बस इतना चाहिए कि अच्छे लोग कुछ ना करें। ~ ई ब्रुक / E Brook  
  • इतिहास उठाकर देखें तो पता चलेगा कि अच्छाई एक ऐसा मोती है जो बहुत ही कम मिलता है। जिस शख्स में अच्छाई का यह मोती होता है वह श्रेष्ठतम होता है। ~ विक्टर ह्यूगो / Victor Hugo  
  • जैसे आग में डालने पर सोना काला नहीं पड़ता, वैसे ही जिस शिक्षक के सिखाने में किसी प्रकार की भूल न दिखलाई पड़े, उसे ही सच्ची शिक्षा कहते हैं। ~ कालिदास / Kalidas  
  • किसी के गुणों की प्रशंसा करने में, अपना समय बर्बाद मत करो, उसके गुणों को अपनाने का प्रयास करो। ~ Karl Marx / कार्ल मार्क्स  
  • एक अच्छा दिमाग और एक प्यार भरा ह्रदय एक आद्वितीय मिश्रण होता है लेकिन जब आप अच्छा बोलने और लिखने लगते हैं तो यह बताता है कि आप में कुछ महत्वपूर्ण बात भी है। ~ नेल्सन मंडेला / Nelson Mandela  
  • महत्व इस बात का नहीं है, कि आप कितने अच्छे हैं। महत्व तो इस बात का है कि आप कितना अच्छा बनना चाहते हैं। ~ पॉल ऑर्डन / Paul Arden 
  • अच्छी आदतें डालना उतना ही आसान है, जितनी बुरी। ~ टिम मैक्कार्बर

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Monday, September 19, 2016

Golden Quotes in Hindi

सुनहरे, स्वर्णिम शब्द. Golden Quotes in Hindi. Great People Words of Life for Kids, Sunhare Thoughts, Swarnim Sms, Sayings, Sentences, Messages, Status, Lines.

Golden Quotes

  • जितना आसान है शब्दकोष बन जाना...उतना ही मुश्किल है शब्दों की आत्मा तक पहुँच पाना। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • शीर्ष स्तर की सूक्ष्म-सूक्ष्म बातें यह आग्रह नहीं करती कि कोई सीधा छलांग लगाकर उन तक पहुँच जाए। यह सामान्यत: संभव है भी नहीं। अपनी कमियों और कमजोरियों को स्वीकार करते हुए उन्हें दूर करने हेतु वे जीवन को एक दिशा देती है। इसलिए उनका नित्य स्मरण जरुरी है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • व्यक्ति चेतना बनकर विश्व (ब्रह्मांडीय) चेतना को नहीं समझा जा सकता है। उसके लिए विश्व चेतना ही होना होता है। जैसे प्रेम के होने के लिए खुद को ही प्रेम होना होता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मिट्टी का जब-जब स्पर्श हुआ तब वह इतनी अपनी सी लगी कि बाकी सब अजनबी हो गए। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • अगर निष्कर्ष निकालना इतना ही जरुरी हो तो एक बार दूसरे पक्ष को जरुर जानें। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • कभी-कभी आलोचनाएँ पढ़कर भी हंसी आ जाती है। हँसाना सिर्फ तारीफों का काम नहीं। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • हर क्षण आदमी एक नया आदमी होता है। वो जो भी होता है...हर आदमी के लिए वह अलग-अलग होता है। यही सापेक्षता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • शिक्षा किसी बाल्टी को भरने जैसी नहीं है, बल्कि आग में रोशनी देने जैसी होती है। ~ अब्दुल कलाम / Abdul Kalam  
  • सारा जगत स्वतंत्रता के लिए लालायित रहता है, फिर भी प्रत्येक जीव अपने बन्धनों को प्यार करता है। ~ Arvind Ghosh / अरविन्द घोष  
  • अन्याय और अत्याचार करने वाला, उतना दोषी नहीं जितना कि उसे सहन करने वाला। ~ लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक / Bal Gangadhar Tilak  
  • ब्रह्माण्ड में कोई भी टुकड़ा अतिरिक्त नहीं है। हर कोई यहाँ इसलिए हैं क्योंकि उसे कोई जगह भरनी है, हरेक टुकड़े को बड़ी पहेली में फिट होना है। ~ दीपक चोपड़ा / Deepak Chopra  
  • श्रवण की कला सीखना परम आवश्यक है। गुरु तो चारों तरफ हैं किन्तु यदि सुनने की कला नहीं आती, तो सभी सिद्ध पुरुष व्यर्थ हैं। गुरु उसी समय उपयोगी होता है, जब व्यक्ति में श्रवण की सामर्थ्य उत्पन्न हो जाये। ~ गुरु नानक / Guru Nanak  
  • धन-समृद्धि से युक्त बड़े-बड़े राज्यों के राजा-महाराजाओं की तुलना भी उस चींटी से नहीं की जा सकती जिसमें ईश्वर का प्रेम भरा हो। ~ गुरु नानक देव / Guru Nanak  
  • दान देकर तुम्हें खुश होना चाहिए क्योंकि मुसीबत दान की दीवार कभी नहीं फांदती। ~ हजरत मोहम्मद / Hazrat Muhammad  
  • मुझे दया के लिए भेजा है, शाप देने के लिए नहीं। ~ हजरत मोहम्मद / Hazrat Muhammad  
  • ईश्वर एक है और वह एकता को पसंद करता है। ~ हजरत मोहम्मद / Hazrat Muhammad  
  • विश्वास वह शक्ति है, जिससे उजड़ी हुई दुनिया को फिर से रोशन किया जा सकता है। ~ हेलन केलर / Helen Keller  
  • खुद की तुलना ज्यादा भाग्यशाली लोगों से करने की बजाय हमें अपने साथ के ज्यादातर लोगों से अपनी तुलना करनी चाहिए और तब हमें लगेगा कि हम कितने भाग्यवान हैं। ~ हेलन केलर / Helen Keller  
  • जिस तरह जौहरी ही असली हीरे की पहचान कर सकता है, उसी तरह गुणी ही गुणवान की पहचान कर सकता है। ~ कबीर / Kabir
 
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Thursday, September 15, 2016

Ignorance Quotes in Hindi

अज्ञान, अज्ञानता, जड़ता, अविद्या. Ignorance Quotes in Hindi. Stupidity, Ignorant, Agyan, Agyanta, Ignoring, Unawareness, Unconsciousness Sms, Status, Messages.

Ignorance Quotes

  • बुद्ध की निश्छलता और बच्चों की निश्छलता में एक बड़ा अंतर होता है, जिसे ज्ञान कहते हैं। बुद्ध बच्चे हैं लेकिन बच्चे बुद्धू (अबोध) हैं। हालाँकि बच्चों में भी अलग-अलग मात्रा में राग-द्वेष, अहंकार आदि वृत्तियाँ पायी जाती है, लेकिन इनका क्षेत्र बहुत सीमित होता है क्योंकि उनका मन अविकसित होता है और सामाजिक प्रभाव भी बहुत कम हुए होते हैं। इसलिए बच्चे सरल और निर्दोष होते हैं। और उनकी सरलता और निर्दोषिता ईश्वरत्व की कुछ झलक दे जाती है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • अपनी अज्ञानता (बंधनों) को पहचानना ज्ञान (मुक्ति) की दिशा में बढ़ाया गया पहला कदम है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • किसी भी महापुरुष के विचारों को जितना खतरा उसके आलोचकों से नहीं होता उससे कई ज्यादा खतरा उसके अंध समर्थकों और अंधभक्तों से होता है। महावीर अपनी साधना के 12 वर्षों तक मौन क्यों रहे अब समझ में आता है। जब वे बोलते थे तब भी निश्चयात्मक कथन क्यों नहीं कहते थे...यह भी अब समझ में आता है। उन्होंने कभी कोई पंथ और संप्रदाय बनाने या समर्थकों की भीड़ जुटाने में रूचि नहीं ली। हालाँकि उनके पीछे एक संप्रदाय बन ही गया। उन्होंने स्यादवाद और अनेकान्तवाद का सिद्धांत क्यों दिया...उन्होंने वर्ण व्यवस्था, आश्रम व्यवस्था, कर्म-कांडों को क्यों नहीं स्वीकारा यह आज अच्छे से समझा जा सकता है। जड़ व्यवस्थाओं और जड़ परम्पराओं ने मनुष्यता की जितनी क्षति की है उतनी और किसी चीज ने नहीं की...और ऐसा भी नहीं कि यह जड़ता सिर्फ धर्म के क्षेत्र में हो। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • कभी-कभी लगता है सूचना के साधन जितने बढ़े और विकसित हुए हैं अज्ञान उतना ही गहराने लगा है। यह अति सक्रिय मस्तिष्क का दौर है। सोशल मीडिया जिसमें आग में घी की भूमिका निभा रहा है। बिना सोचे-समझे और जाने हर ओर बस गैरजिम्मेदार निष्कर्षों का ढेर पसर रहा है। इन तुरत-फुरत की धारणाओं और पूर्वाग्रहों से बचना बेहद जरुरी है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • हम पूछ लेते हैं तो ज्यादा से ज्यादा उस समय मुर्ख साबित हो सकते हैं (वह भी किससे पूछा जा रहा है उसके व्यवहार और सोच पर निर्भर करता है)। लेकिन नहीं पूछते तो हमेशा मुर्ख ही रह जाते हैं। इसके अलावा किसी को कुछ बताना और समझाना स्वयं हमें सीखने में काफी मदद करता है। जो न समझ आये बेझिझक पूछिए और इंतजार करिए...उत्तर अवश्य मिलेगा। लेकिन सिर्फ पूछने के लिए पूछने से बचिए। वहां उत्तर मिलने की कोई गारंटी नहीं। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • बर्तन साफ़ करते समय मेरी आदत है - एक बार सारे बर्तनों की अतिरिक्त गन्दगी हटाने के लिए पहले कोरे पानी से साफ़ कर लेती हूँ, उसके बाद डिश सोप/लिक्विड लगाती हूँ और फिर पानी से साफ़ करती हूँ। मेरे ख़याल से ज्यादातर लोग ऐसा ही करते होंगे। एक बार हुआ यूँ कि मैं अपना फर्स्ट स्टेप कर रही थी तो मेरी एक दोस्त मुझे अजीब नज़रों से देख रही थी। मैंने पूछा क्या हुआ? वह हैरान होकर बोली, तुम बिना सोप के बस ऐसे ही बर्तन साफ़ करती हो? :o मैंने कहा, 'आगे देख तो लो लड़की!' फिर कुछ देर बाद उसकी हैरानी नार्मल हुई। :) Moral of the Story : पूर्वाग्रहों (prejudgement) से बचें। ;) ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • मनुष्य के दुखों का एक मात्र कारण है - अज्ञान। ~ अज्ञात / Unknown
 
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Poem on Freedom of India in English

Poem on Freedom of India in English for Kids. 15th August Independence Day Poetry, Free, Peaceful, Sacred, Prosperous, United, Rhymes, Verses, Lines, Slogans.

Freedom

Freedom of India is defined by :

Cycle of Corruption
Threats of Violation.

Peaceful India is defined by :

Trap of Terrorism
Riots of Communal-ism.

Unity of India is defined by :

Poison of Regionalism
Termite of Racism.

Prosperity of India is defined by:

Increase of Inflation
Bait of Reservation.

Sacred India is defined by :

Grip of Vulgarism
Rape of Humanism.

Put your hand on your heart and think again :

Are we really living in free, peaceful, sacred and prosperous India?

By Monika Jain 'Panchhi'

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Wednesday, September 14, 2016

Religion Quotes in English

Religion Quotes in English. Religious Beliefs, God, Humanity, Humanism, Being Human, Casteism, Caste, Sayings, Slogans, Proverbs, Status, Messages, One Liners.

Religion Quotes

  • I am proud to be 'Brahmin', I am proud to be 'Rajput', I am proud to be 'Punjabi', I am proud to be '...........' . What the hell is this? Dear educated people when you will feel proud to be a 'Good Human Being'? Did you bring any mark by birth on your body that represents a particular caste or religion? 
  • You don't need pomposity to get god, you only need a pure heart. 
  • When you accept serving humanity as your religion, you start to feel god within you, then you don't need to search god in any temple or mosque. 
  • Many people worship god only to get a license to do all bad works. 
  • For some people religion is just a product to sell and to market. 
  • When it comes to religion some people are just mad and blind. 
  • Religious extremists who forcefully impose their religion on others are not religious at all.They are the enemies of mankind.  
  • Killing of innocent animals in the name of religion is an insult to religion.  
  • Religions today are not serving the purpose for which they came into existence. Instead of uniting they are dividing us.  
  • I believe in God. Only I spell it humanity.  
  • My religion is humanity. Teach a man to be a good human being and you have solved the problem of life.  
  • A human should become human first then there will be no need of any religion or caste.  
  • Religion is not about chanting mantras only....accept its broader perspective.  
  • If you want to bring peace in this world then accept humanity as the only religion.  
  • If violence is part of a religion then it’s not a religion at all.  
  • Religion nowadays is developing as a business. For some people it’s just a product to sell and to market.  
  • Only humanity can make this world worth living.  
  • Don't be mad and blind in the name of religion.You can never find God in this way.  
  • People who can't do something worthy to make them feel proud often feel proud to be Brahmin, Rajput, Punjabi, Muslim etc. Dear people when you will feel proud to be a good human being?  
  • None of us bring any mark by birth that represent a particular religion or caste. But we give importance to these things over humanity (the real identity of a human being).  
  • The way different religions claim different things about God, sometimes I think : God created human or human created God. If we assume God as a supreme power then who we are to decide anything about God. 
  • Some people are not concerned with population issue as they think children are gifts of God. I can't understand how people can impose their doings on God.  
  • Do not let trust and faith be superstition.
 
By Monika Jain 'Panchhi'

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Monday, September 12, 2016

Poem on Social Issues in English

Poem on Social Issues in English for Kids. Society Problems, Global Evils, Awareness Poetry, Awakening Rhyme, Awake, Moral Human Values, Sensitivity Quotes.

Please Awake...

Growing Corruption
Rising Inflation
Increasing Violation
Decreasing Sensation

This is what we are giving to our new generation.

Fear of terrorism
Tears of racism
Near to Vulgarism
Mere Communalism

This is how we are losing our idealism.

Humanity is dying
God is crying
Everyone is lying
Values are drying

This is the way we are making our life annoying.

Relations are fake
Bite like snake
Give and Take
Otherwise break

Before losing everything please awake.

By Monika Jain 'Panchhi'

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Friday, September 9, 2016

Unity in Diversity Quotes, Unity is Strength

Unity in Diversity Quotes in English. United We Stand, Cultural Togetherness Strength, National Integration Slogans, Oneness Sayings, Cooperation Proverbs.

Unity in Diversity Quotes

  • Imagine a world without countries, religions, castes etc where all the people are living life in peace and harmony. Yeah I am a dreamer and I am watching this dream since childhood. 
  • The major problem in our country is divided good people and lack of a perfect leader who can unite all.  
  • Accept the differences and respect them. This will help us to achieve love, peace and brotherhood.  
  • Favor or Disfavor should be for a thought not for a person. As a good person may put a wrong thought and a bad person may also put a right thought. Differences of views should never lead to differences of hearts.  
  • Instead of uniting, religions today are dividing us. The best thing about humanity is that it can unite all.  
  • One should always be open to accept new thoughts and suggestions and improve one's thinking.  
  • Oneness gives birth to love and peace.  
  • Integration gives momentum to growth.  
  • Only the unity of good people can kill or defeat all the evils.

By Monika Jain 'Panchhi'

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Personal Development Quotes in English

Personal Development Skills Quotes in English. Self Help Tips, Personality Growth, Learning, Improvement Slogans, Know Yourself Article, Sayings, One Liners.

Personal Development Quotes

  • Every night before falling asleep recall to your mind the events of the whole day and consider exactly what has been good and bad. It will help you in avoiding your mistakes. Also plan for the next day. 
  • Don't wait for others to bring success to yourself. Develop the quality of self help. Most successful is one who depends least on others. Quality of self help makes the person self confident and self reliant.  
  • Develop the realistic understanding of your strengths and weaknesses. Spend some time with yourself and explore your strengths, your potentials and the natural talent you are born with. It will help you in determining your goal and will increase your self confidence. Also think about the things that make you feel bad about yourself. Once you have identified such things the next step is to determine what you can do to change them or improve them and work on that.  
  • The only thing you must fear is fear itself. So keep it far away from yourself.  
  • Keep learning. Develop some new hobbies. Join new courses and gain new knowledge and skills. Learn from people who inspire you. Learn from your friends. Learn from everyone.  
  • When you don't know something it gives you opportunity to learn. Your troubles make you strong. Your mistakes teach you valuable lessons. Your limitations provide you an opportunity for improvement. Your difficult time help you in growing yourself. It's only your positive attitude that can make difference.  
  • Don't fear being alone, Learn to like yourself. Don't fear failure, keep trying. Don't fear rejection, have faith in yourself. Don't fear truth, try to see the ugliness in lies. Don't fear dark, see the beauty of starlight. Don't fear destiny, you have power to change your life.  
  • Be the self motivator.  
  • Learn to deal with difficult people.  
  • Commit to your personal growth.  
  • Many times I read 'Don't change yourself for the sake of others'. I can't understand what is bad in changing yourself if it is necessary and good for all. You are not a stone. You are alive so don't be so rigid and always be open for good change in your attitude. The real fact is that you can only change yourself not others.
 
By Monika Jain 'Panchhi'

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Wednesday, September 7, 2016

Theory of Relativity in Hindi

आइंस्टीन का सापेक्षता सिद्धांत, विरोधाभास. Theory of Relativity in Hindi. Albert Einstein. Paradox, Contradiction, Limitation of Languages, Duality, Dualism.

सापेक्षता का सिद्धांत

साइंस स्ट्रीम नहीं रहा आगे तो आइंस्टीन का सापेक्षता का सिद्धांत तो कभी पढ़ना और समझना नहीं हुआ डिटेल में। हालाँकि कभी पढ़ना और अच्छे से समझना चाहूंगी। लेकिन जिस सापेक्षता को मन काफी समय से सूक्ष्म रूप से समझ रहा है वहां एक ही समय में दो विरोधाभासी कथनों से भी बिल्कुल सहमत हुआ जा सकता है।

जैसे : मृत्यु एक शाश्वत सच है और मृत्यु एक शाश्वत झूठ भी है।
जैसे : सरल होना सबसे जटिल है और सरल होना ही सबसे सरल है।
जैसे : पूर्ण स्वीकार का क्षण ही पूर्ण निस्तार का क्षण बनता है।
जैसे : सबसे मैत्री (पूर्ण स्वीकार) किसी से मैत्री (पूर्ण निस्तार) नहीं होती।
जैसे : धर्म (तथाकथित) संहारक है और धर्म (विशुद्ध) ही संरक्षक है। और संरक्षक वाला धर्म राजनीति क्या दुनिया की हर एक नीति को सकारात्मक दिशा में लाने के लिए जरुरी है।

तो कहना बस ये था कि आप सापेक्षता को समझिये, भाषा की सीमाओं को समझिये, शब्दों के अलग-अलग सन्दर्भों में अर्थ को समझिये...फिर आधे से अधिक विवाद तो पल भर में खत्म हो जायेंगे। 
 
कुछ भी लिखा हुआ सामान्यीकरण नहीं होता, सापेक्ष ही होता है। कितनी भी सावधानी बरत लो तब भी पूर्ण सत्य कभी लिखा/कहा या सोचा जा ही नहीं सकता। एक ही बिंदु को देखने के अनन्त कोण होते हैं। इसलिए किसी भी समय शब्दों के रूप में हमारे मन, वचन या लेखन में आया कोई भी विचार एक ही समय में सत्य और असत्य दोनों ही सिद्ध हो जाता है। सारे पॉइंट ऑफ़ व्यूज से मैं जब भी अपने लिखे को जांचने की कोशिश करती हूँ तो उसे असत्य ही पाती हूँ। इसलिए कभी-कभी लिखते-लिखते रुक जाती हूँ और कभी-कभी लिखकर मिटा देती हूँ।...और भीतर कहीं गहराई में मैं सब कुछ की तरह ही लिखना भी छोड़ना चाहती हूँ। यह कोई पलायन नहीं...यह विरोधाभास और द्वन्द्वों जनित इस समस्त जीवन से मुक्ति की ही तड़प होती है जो दुनिया के हर एक प्राणी के भीतर दबी रहती है। मुख्य रूप से कर्मयोग का सिद्धांत समाधान रूप में यही से निकलता है। बाकी बात बस इतनी सी है कि सापेक्षता के दृष्टिकोण से सभी का लिखने का तरीका यही रहेगा। जरुरत बस समझ और जागरूकता के बढ़ाने की है तब आवश्यक क्या है और अनावश्यक क्या है यह अपने आप स्पष्ट होता जाएगा।

प्रश्न : ‘लिखना भी छोड़ना चाहती हूँ, सब कुछ की तरह!’ कर्मयोग का सिद्धांत यहाँ से कैसे निकलता है?

उत्तर : समाधान रूप में कई तरीके बताये गए हैं जैसे ज्ञान योग, भक्ति योग, क्रिया योग, कर्मयोग ...हालांकि ये विभाजन सुविधा के लिए हैं। ओवरलैप करता है बहुत कुछ। इसमें से कर्मयोग निष्काम कर्म के बारे में कहता है। हर किसी के लिए सन्यास संभव नहीं, यह व्यवहारिक भी नहीं...ऐसे में जागरूक होकर कर्म करें, परिणाम में आसक्ति यथासंभव न रखें। हम सचेत रहें तो अनावश्यक कर्म वैसे भी छूट ही जायेंगे।

प्रश्न : आपने बहुत अच्छा समझाया है। आपका शब्द शिल्प प्रेरणास्पद है। कुछ बातें जोड़ना चाहूंगी। प्रथम तो क्वांटम फीजिक्स से वापिस न्यूटोनियन फिजिक्स पर आते हैं, जहाँ सरफिशियल मूवमेंट के लिए जिस प्रकार घर्षण एक आवश्यक किन्तु विरोधी बल है, मतलब घर्षण नहीं हो तो मूवमेंट नहीं होगा, हालाँकि घर्षण गति की डायरेक्शन के खिलाफ काम करता है। उसी प्रकार यदि किसी लिखे हुए या कहे हुए का उल्टा अर्थ (जो लिखने वाला या कहने वाला भाव देना चाहता है, उसका उल्टा) लोग निकालें तो यह कोई विसंगति नहीं है, सामान्य बात है। क्योंकि यदि लिखे हुए या कहे हुए के अनेक अर्थ न निकलें तो लेखन ही क्या हुआ? भावों को रूपांतरित करने के लिए भाषा का अविष्कार हुआ है। ज़ाहिर है कि घर्षण उसमें भी होगा। नहीं होगा तो फिर भाषा नहीं हमें टैलिपैथी की तकनीक खोजनी होगी।
फिर मौन किसी का समाधान हो सकता हो, इसमें संदेह है। ओशो ने हजारो घण्टे स्पीचेज़ दी है। इसी कोशिश में कि भाषा का जितना अधिक विस्तार कर पाएं उतना बेहतर है, और रिलेटिव ही कहा है। किन्तु अर्थ का अनर्थ न हो, इसलिए भाषा की वृहदता का उपयोग कर अपने भाव को स्पष्ठ करने के पूर्ण प्रयास किए हैं। सप्रेम :)

उत्तर : शुक्रिया। :) कई अर्थ निकलते हैं यह स्वाभाविक है। लेकिन घर्षण को अत्यधिक से कम करते जाना तो हमारे ही हाथ में है। ओशो की बातों के कितने अनर्थ होते हैं इस बारे में आप ध्यान दीजियेगा। ओशो खुद बहुत विवादस्पद रहे हैं। खैर! यह चर्चा का विषय नहीं। लेकिन फ़िलहाल तक मैं जिस निष्कर्ष पर पहुंची हूँ वहां पर मौन अंतिम मंजिल भी लगती है और उस मंजिल तक पहुँचने की जीवन यात्रा में हर समस्या का समाधान भी मौन (ध्यान) (थोड़ा विस्तृत अर्थ में है यहाँ) से ही निकलता है। बाकी मैं कितना भी संक्षेप में लिखूं पर लिखते समय अपनी ओर से जितना मेरे लिए संभव है सतर्क रहती हूँ। फायदा किसी को हो न हो यह नहीं पता लेकिन काउंट करने लायक नुकसान नहीं होगा इसकी जिम्मेदारी मैं समझती हूँ। हालाँकि सकारात्मक परिवर्तन सम्बन्धी प्रतिक्रियाएं ही मिली है अब तक ज्यादातर और आगे भी यही कोशिश रहेगी। लेकिन लिखना छोड़ने की चाह या बहुत अधिक चर्चा में न पड़ने की चाह व्यक्तिगत अनुभूतियों से ही निकलती है। जैसे आप अपने जॉब से संतुष्ट नहीं है। ऐसे ही दुनिया में किसी भी कार्य से स्थायी संतुष्टि नहीं मिल सकती। मन जिस स्थायी सुख की खोज में रहता है वह मन के मिट जाने में ही निहित होता है और वही सबसे मुश्किल होता है।

प्रश्न : मन जिस स्थाई सुख की खोज में रहता है वह मन के मिट जाने में ही निहित है, कैसे? और ये सम्भव कैसे हो?

उत्तर : इच्छाएं ही दुःख का कारण है। इसलिए इच्छाओं का अंत ही समाधान। यह कैसे संभव है इस पर तो ढेर सारे महापुरुष लिख गए हैं। कई हमारे स्वयं के अनुभव होते हैं। दूसरों के अनुभव शुरूआती तौर पर सहायक हो सकते हैं, लेकिन वास्तविकता यही है कि कोई भी पहले से लिखे गए नियम आदि समाधान नहीं दे सकते। समाधान हमें खुद ही खोजना पड़ता है और हर व्यक्ति का समाधान उसके अनुरूप अलग होता है। आपने अभी रूचि लेना शुरू किया है। धीरे-धीरे आप महसूस करने लगेंगी यह बात। :)

प्रश्न : ज्यादा समझदार होना , अपने ओथेन्टिकल जीवन से दूर ले जाता है मुझे। जीवन एक यात्रा है...इसका कोई भी उद्देश्य नहीं, मुक्ति की चाहत रखना बेवकूफी है। वैसे 'theory of relativity' को समझ कर बहुत सारी सच्चाइयां समझी जा सकती है। (बाकि ,आपके बातों से सहमत हूँ।)

उत्तर : मुक्ति की चाह कोई इरादतन या कहीं से प्रभावित चाह नहीं होती। यह एक सहज इच्छा है जिसका ही प्रतिबिम्ब है दुनिया की तमाम इच्छाएं। बाकी ओथेन्टिकल क्या है और क्या नहीं यह भी विवादस्पद ही है। यह भी व्यक्ति दर व्यक्ति अलग होता जाएगा।

By Monika Jain ‘पंछी’

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Tuesday, September 6, 2016

Michhami Dukkadam - Kshamavani Parva in Hindi

क्षमावाणी पर्व, क्षमा दिवस. Michhami Dukkadam, Daslakshan Kshamavani Parva, Jain Paryushan Uttam Kshama Divas, Samvatsari Kshamapana Messages, Khamat Khamna Sms.

क्षमत क्षमापना

हर दिवस विशेष पर यह बात सुनने को मिलती ही है कि वर्ष में सिर्फ एक ही बार क्यों? बात सही भी है कि वर्ष में सिर्फ एक ही दिन क्यों? तो सबसे पहले तो हमसे किसने और कब मना किया कि हम किसी चीज को वर्ष में सिर्फ एक ही बार अहमियत दें? किसी ने किया क्या? चलो हम वर्ष में सिर्फ एक दिन मनाना भी छोड़ देते हैं। लेकिन क्या सिर्फ उससे हम वर्ष में बाकी सब दिन वह मानने लगेंगे। बल्कि मुझे तो यह लगता है कि ये सब दिवस हमारी भागदौड़ वाली जीवन शैली की ही देन है कि जिन चीजों को रोजमर्रा की ज़िन्दगी में अहमियत मिलनी चाहिए थी...कम से कम उन्हें हम साल में एक बार तो याद कर लें।

एक दृष्टान्त देती हूँ : एक ही परिवार के दो सदस्य थे। दोनों में किसी विवाद के बाद से 8-10 वर्षों तक अनबोला रहा। दोनों कभी परिवार में साथ-साथ होते तब भी अजनबियों की तरह होते थे। मन में एक तरह का तनाव या खिंचाव रहता ही होगा। अहम् बड़ा था इसलिए किसी ने बात करने की शुरुआत भी नहीं की। फिर एक दिन क्षमापना दिवस के दिन परिवार के बाकी सदस्यों को बात करते देख उनमें से एक ने किसकी गलती थी और किसकी नहीं इस बात को पूरी तरह से नजरंदाज कर क्षमा मांग ली...और फिर सब कुछ पहले की तरह से नार्मल हो गया। उसके बाद कभी बात बंद होने की स्थिति नहीं आई।

तो इस तरह से कोई दिन विशेष प्रेरणा का काम भी कर सकता है। बल्कि इन दिवसों का वास्तविक उद्देश्य भी यही है कि ये हमारे लिए प्रेरक बनें। तो जब कोई क्षमावाणी जैसे पर्व पर भी व्यंग्य करता हुआ या उसका विरोध करता हुआ दिखाई देता है तो यह नकारात्मकता की अति लगती है। यह मैं इसलिए नहीं कह रही क्योंकि मेरे नाम के साथ ‘जैन’ का टैग लगा है। यह मैं इसलिए कह रही हूँ क्योंकि यह कहना जरुरी है। बाकी न ही ‘जैन’ शब्द पर और न ही ‘क्षमा’ शब्द पर किसी का भी एकाधिकार है। ‘क्षमा’ का अर्थ तो सभी जानते ही हैं बाकी ‘जैन’ शब्द भी ‘जिन’ शब्द से बना है। ‘जिन’ का अर्थ होता है जिसने ‘राग’ और ‘द्वेष’ को जीत लिया हो...और इस नाते जैन वे सब होंगे जो इस मार्ग के अनुयायी होंगे। खैर! किसी को जैन कहलवाना न कहलवाना मेरा उद्देश्य नहीं है। मुझे तो खुद ही ख़याल नहीं रहता कि सिर्फ किसी शब्द के जुड़ जाने से मैं किसी से अलग भी हो सकती हूँ। पर हाँ, अगर इस क्षमा पर्व के सम्बन्ध में कोई चीज है जो प्रकृति को, लोगों को, प्राणियों आदि को नुकसान पहुँचा रही हो तो मैं खुद आपके साथ उसका विरोध करुँगी। लेकिन कृपया विरोध करने के लिए विरोध या व्यंग्य करना बंद कीजिये। यह अच्छा नहीं है।

खैर! आज यह सब बातें करने का समय नहीं है। जब भी लगता है गलती की है, तो क्षमा मांगने का ख़याल रहता है। लेकिन आज विशेष दिन है :

तो सबसे पहले उन मित्रों से क्षमा जो फेसबुक के शुरूआती दिनों में बने थे। कुछ स्कूल जाने वाले बच्चे थे। एक बार किसी ने कहा था, ‘मोनिका दी, आप बहुत बदल गयी हो। पता नहीं क्या-क्या लिखती हो। हमें पहले वाली मोनिका दी चाहिए।‘ :) बदलाव तो खैर प्रकृति का नियम है। मैं इससे अछूती कैसे हो सकती हूँ? पहले जैसी रहूँ न रहूँ, संपर्क रहे न रहे। लेकिन मन में स्नेह और दुआएं हमेशा रहेंगी। बचपन, स्कूल और कॉलेज के मित्रों की भी यही शिकायत होगी। अत: उनसे भी अंतर्मन से क्षमा याचना।

क्षमा उन सभी मित्रों से जो जीवन और फेसबुक की यात्रा के दौरान अमित्र हुए या ब्लॉक किये गए। ऐसे लोग नगण्य हैं। लेकिन उनसे बस इतना कहना है कि कभी-कभी दूर होना शायद दोनों के ही हित में होता है। समय के गर्भ में क्या है पता नहीं...लेकिन मन में किसी के लिए भी किसी तरह का द्वेष न रहे इसका पूरा प्रयास रहेगा।

क्षमा उन सभी मित्रों से जिन्हें मेरी किसी भी बात, पोस्ट, कमेंट, व्यवहार आदि ने आहत किया। भावनाओं के प्रवाह में कभी-कभी ऐसी गलतियाँ हो जाती है जो सामने वाले को आहत कर जाती है। इसके अलावा मतों में भिन्नता को भी दिल पर ले जाते हैं हम लोग। मतभेद मिटे न मिटे, लेकिन मनभेद न रहे इसका पूरा प्रयास रहेगा।

क्षमा उन सभी मित्रों से जिन्होंने कभी कोई सन्देश भेजा हो और उसका जवाब मैंने न दिया हो। मेरा दिल निश्चय ही इतना बड़ा नहीं कि मैं हर या किसी भी तरह के सन्देश का जवाब दे सकती हूँ। लेकिन उपेक्षा आहत करती है और इसके लिए क्षमा याचना।

क्षमा उन मित्रों से जिनसे मैंने अनावश्यक अपेक्षाएं की हों और उन्हें बुरा लगा हो। अपेक्षाओं से पूर्ण मुक्ति बहुत मुश्किल है। इसलिए अभी आपसे क्षमा की अपेक्षा है। :)

क्षमा सृष्टि के हर जीव से, अजीव से...जिनसे भी मैंने जाने-अनजाने में, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी रूप से राग या द्वेष का सम्बन्ध बनाया हो। यह क्षमा राग व द्वेष को जीतकर विशुद्ध प्रेम के प्रकट होने में हमारी मदद करे इसी मंगल कामना के साथ क्षमत-क्षमापना। :)

By Monika Jain ‘पंछी’

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Sunday, September 4, 2016

Anmol Vichar in Hindi

अनमोल विचार, आदर्श वाक्य, अमूल्य वचन, बहुमूल्य कथन. Anmol Vichar in Hindi. Adarsh Vakya, Amulya Vachan, Bahumulya Kathan, Priceless, Precious, Valuable Messages.

Anmol Vichar / अनमोल विचार
 
  • पूर्ण स्वीकार का क्षण ही पूर्ण निस्तार का क्षण होता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • सवालों के जवाब जानते-जानते एक दिन हमें यह भी जानना होता है कि सवाल सवाल नहीं है।~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जब तक क्लास में चैप्टर पढ़ते समय अंडा, मांस-मछली जैसे शब्दों पर घिन्न महसूस होती रहे और यह हमें हमारी अहिंसा लगे तब तक हमने अहिंसा का सही अर्थ नहीं समझा है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जातियां बनाना हम इंसानों की फितरत है। हम हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई नहीं बनायेंगे तो आस्तिक और नास्तिक बना देंगे, वामपंथ और दक्षिणपंथ बना देंगे, शिक्षित और अनपढ़ बना देंगे and so on.... खैर हमने भाषाएँ बनायी है तो उसका उपयोग तो करेंगे ही। सबसे विकसित मस्तिष्क पाया है तो उसका भी उपयोग करेंगे ही। बस इतना भर ख़याल रहे कि किसी भी शब्द से हम इतना अधिक न जुड़ जाएँ कि वह शब्द ही हमारा विधाता बन जाए। उपयोग ठीक है, दुरूपयोग करते समय बार-बार हजार बार सोचना। :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जब हमारी श्रेष्ठता किसी को नीचा दिखाने से सम्बंधित हो जाती है तो वह श्रेष्ठता नहीं वरन कुंठा होती है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • प्रकृति के संरक्षण के लिए मिट्टी के गणेश जी के विसर्जन की बात चल रही है। बहुत अच्छी बात है। (बुरी बात यह है कि पहले आग लगाओ और फिर कुआँ खोदो।) खैर! यहाँ तो मिट्टी ही गणेश जी है। विसर्जित क्या करें। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • लेखक/वक्ता के रूप में जब कदम-कदम पर शब्दों की सीमा का भान होने लगता है...और पाठक/श्रोता के रूप में जब चंद शब्द ही असीमित की झलक देने लगते हैं...तब-तब हमारी यात्रा की दिशा स्वयं की ओर होती है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • अपराध होने ही न देना, उसके लिए सजा देने से कहीं बेहतर है। ~ अज्ञात / Unknown  
  • लगातार बीते समय के बारे में सोच-सोचकर अक्सर हम लोग अपना आने वाला भविष्य बिगाड़ बैठते हैं। ~ पर्सियस / Perseus  
  • श्रद्दालु पुरुष ही ज्ञान प्राप्त कर सकता है और ज्ञान प्राप्त होने पर ही इन्द्रियों की संयम-साधना हो सकती है। ~ गीता / Geeta  
  • जितने भी संयोग सम्बन्ध है वे सब अनित्य है। ~ अज्ञात / Unknown  
  • यह सबसे बड़ा आश्चर्य है कि व्यक्ति को स्वयं का अपराध, अपराध नहीं लगता। ~ अज्ञात / Unknown  
  • जो भी तुमसे मांगता है उसे दो, जो तुम्हारा सामान ले जाएँ उनसे दुबारा मत पूछो और जैसा व्यवहार तुम उन लोगों से चाहते हो, वैसा उनके साथ करो। ~ जीसस / Jesus
  •  भला मानव स्वतंत्रता की ह्रदय से चाह रखता है। शेष लोग तो स्वछंदता प्रेमी होते हैं। ~ जॉन मिल्टन / John Milton  
  • योग्यता को छिपाने की कला जानना ही सच्ची योग्यता है। ~ फ्रेंकोइस डे ला रोशेफोकोल्ड / Francois De La Rochefoucauld  
  • मनुष्य अपने गुणों से आगे बढ़ता है न कि दूसरों की कृपा से। ~ लाला लाजपतराय / Lala Lajpat Rai  
  • मनसा, वाचा, कर्मणा किसी को दुःख न पहुंचाओं। क्रोध को क्षमा से, विरोध को अनुरोध से, घृणा को दवा से और द्वेष को प्रेम से जीतो। ~ Maharshi Dayanand Saraswati / महर्षि दयानंद सरस्वती  
  • चन्द्रमा अपना प्रकाश सारे आकाश में फैलाता है, परन्तु अपना कलंक अपने ही भीतर रखता है। ~ रवीन्द्र नाथ टैगोर / Rabindranath Tagore 

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Saturday, September 3, 2016

Science Quotes in Hindi

विज्ञान और धर्म, वैज्ञानिक दृष्टिकोण. Science and Religion Quotes in Hindi. Scientific Quotations, Vigyan Dharma par Vichar, Slogans, Sayings, Sms, Status.

Science Quotes

  • 'पूर्वाग्रह' विज्ञान (प्रयोग आधारित) और अंतर्ज्ञान (प्रयोग रहित) दोनों के ही मार्ग की सबसे बड़ी बाधा है। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं, सहायक है। लेकिन फिर भी अंतर्ज्ञान विज्ञान से कई कदम आगे हैं। विज्ञान कभी वहां तक पहुँच पायेगा जहाँ तक अंतर्ज्ञान पहुँचता है, कहना मुश्किल है। इसका मुख्य कारण यह भी है कि विज्ञान मुख्य रूप से सुविधाएँ जुटाने और तकनीकी विकास का ज्ञान बनता जा रहा है। विज्ञान की भूमिका को नकारा बिल्कुल नहीं जा सकता। लेकिन साथ ही यह भी हम सबके लिए सोचने वाली बात है कि जब एक पत्ते की जरुरत हो तो हम एक ही तोड़ें, जब उसकी भी जरुरत नहीं तो हम क्यों तोड़ें? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • धर्म/अध्यात्म का विज्ञान से कोई बैर नहीं है...रत्ती भर भी बैर नहीं है। धर्म तो गति का कारक है। बैर तो मन की उपज है जो अधर्म को धर्म के रूप में स्थापित करने लगता है और विज्ञान को भी गर्त की दिशा में ले जाने लगता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • जितने भी 'घोर' लोग होते हैं, फिर चाहे वे 'घोर आस्तिक' हो, चाहे 'घोर नास्तिक', 'घोर समर्थक' हो चाहे 'घोर विरोधी', वे सभी पूर्वाग्रहों से ग्रसित महा अन्धविश्वासी होते हैं। क्योंकि वास्तव में जो वैज्ञानिक मन-मस्तिष्क होता है, उसे पता होता है कि अभी बहुत कुछ जानना शेष है, अभी बहुत कुछ सीखा जाना बाकी है, बहुत से विचार आने वाले समय में बदल सकते हैं, क्योंकि अभी खोज जारी है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • बिना जाने विश्वास किया जाए या अविश्वास...दोनों अन्धविश्वास ही है। अपवादों को छोड़ दें तो यहाँ नास्तिकता और आस्तिकता दोनों ही अन्धविश्वास की तरह दिखाई पड़ रहे हैं। एक प्रवाह जिसमें बस बहे जा रहे हैं लोग। पता नहीं जो चीज जानी ही नहीं गयी, अनुभव ही नहीं की गयी, उसके बारे में इतनी कट्टरता के साथ कैसे कह देते हैं लोग? अपने हर शब्द, कार्य, विचार, अपने जीवन और आसपास होने वाली हर घटना, हर वस्तु, हर प्राणी के प्रति सजगता और संवेदनशीलता का समावेश जब जीवन में होने लगेगा तब धीरे-धीरे अनुभव होने लगेगा कि बहुत कुछ रहस्यमयी है, पर कहीं गहरे में वह विज्ञान और कारण-कार्य-सिद्धांत पर पूरी तरह खरा भी उतरता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • चमत्कार जैसा कुछ नहीं होता। हर चीज का कोई कारण अवश्य होता है। हाँ, बस वह कारण ज्ञात या अज्ञात हो सकता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • लम्बे उपवास का सबसे सही समय वर्षा ऋतु मानी जाती है। और खाने का सही समय सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच होता है। धर्म और विज्ञान अलग-अलग नहीं होते। अलग हैं तो बदल डालें। और अलग नहीं तो थोड़ा प्रकाश डालें। धर्म जड़ता नहीं गति है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • विज्ञान हमारे आसपास के संसार की एक अवधारणा है। विज्ञान एक जगह है, जहाँ प्रकृति प्रदत्त चीजों को पाने की ख़ुशी आपको मिलती है। ~ सुब्रह्मण्यम चन्द्रशेखर / Subrahmanyan Chandrasekhar  
  • आधुनिक भौतिक विज्ञान उन्हीं निष्कर्षों तक पहुंचा है जिन तक वेदांत युगों पहले पहुँच चूका था। ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda

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Poem about Forgiveness

Poem about Forgiveness in English for Kids. I am Sorry Poetry, Apology Day Verses, Forgive Rhymes, Uttam Kshama Yachna Diwas, Michhami Dukkadam, Pardon Lines.

Let's Forgive Each Other

Forgiveness blossom flowers of love
Forgiveness melt prong of hate
The effect of forgiveness is such that
Enemies hug each other and become friends.

As much as this word is beautiful
It’s presence is equally fine
Forgiveness cleans
Every single corner of our mind.

To apologize and to forgive
makes a complete personality
Ego doesn't stay
in the presence of sorry.

By not forgiving others mistake
We are doing injustice with ourself
We are moving with a heavy burden
remaining the offender of ourself.

So on the day of forgiveness
Let’s come together and forgive each other
Filth that is loaded in our heart
Let’s make it perfectly clear.

By Monika Jain ‘Panchhi’

To forgive and to ask for forgiveness, both need a courageous, sensitive, clean and a big heart. To apologize is not the sign of cowardice. In fact it destroys our ego. On the other hand to forgive is also the sign of nobility and greatness. Directly or indirectly both these things benefit us. The biggest favor by forgiving someone we do on ourselves. Because the hate, malice and envy dwells within us do not harm others but it definitely work as a poison for us. Forgiveness releases us from the captivity of these negative thoughts and their unnecessary burden. The thing which is most needed for us is to introspect, to become introvert, to recognize our mistakes, to accept them and to ask for forgiveness with a resolution that these mistakes will not be repeated in future. Behaviour we expect from others should be our behavior towards others.

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Friday, September 2, 2016

Poem on Forgiveness in Hindi

क्षमापना दिवस. क्षमा वाणी पर्व कविता, मिच्छामी दुक्कड़. Poem on Forgiveness in Hindi. Uttam Kshama Yachna, Maafi Shayari, Sorry Sms, Apology Status, Messages.

क्षमा

क्षमा से नफ़रत के शूल गलते हैं
क्षमा से ही प्यार के फूल खिलते हैं
क्षमा का प्रभाव है कुछ ऐसा
दुश्मन भी बन दोस्त गले मिलते हैं।

जितना सुन्दर शब्द है ये
उतना ही सुन्दर इसका होना
क्षमा बनाती है निर्मल
मन मंदिर का हर एक कोना।

क्षमा मांगने और कर देने से
बनता है एक पूर्ण व्यक्तित्व
अहंकार न टिक पाता
जहाँ होता है क्षमा का अस्तित्व।

न देकर गलतियों की माफ़ी
कर रहे हम अपने साथ नाइंसाफी
घूम रहे हैं लेकर बोझ
बने हुए खुद के अपराधी।

तो आओ इस क्षमा दिवस पर
कर दे हम एक दूजे को माफ़
दिल में भरा जो कूड़ा करकट
कर दे उसको बिल्कुल साफ़।

By Monika Jain 'पंछी'

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Thursday, September 1, 2016

Essay on Gautam Buddha in Hindi

गौतम बुद्ध, डाकू अंगुलिमाल, आत्म विकास पर निबंध. Essay on Mahatma Gautam Buddha in Hindi. Enlightenment, Problem and Solution, Selfishness, Self Improvement.

बुद्ध...सच्चे अर्थों में स्वार्थी

कभी-कभी लगता है लोगों को अंगुलिमाल उतना बेचैन नहीं करता जितना कि बुद्ध करते हैं। उनकी समस्या अंगुलिमाल की हिंसा नहीं बुद्ध की अहिंसा बन जाती है। :) ...तब जबकि वे खुद कभी अंगुलिमाल को नहीं बदल पाए। अंगुलिमाल को कैद किया जा सकता है...कठोर दंड दिया जा सकता है। जरुरी है तो होना भी चाहिए। लेकिन यह ख़याल रहे कि अंगुलिमाल बुद्ध के प्रभाव में ही बदलते हैं। बहरहाल तो इस युग में अंगुलिमाल जैसे बदलने वाले भी कम ही मिलेंगे। गुरु और शिष्य दोनों के ही उत्कृष्ट स्तर का उदाहरण है यह। लेकिन अगर दोषी को छोड़कर हमारी आलोचना का केंद्र निर्दोष बनते हैं तो थोड़ा ठहरकर सोचने की जरुरत है कि दोषिता से निर्दोषिता के बीच हम कहाँ खड़े हैं? बहुत संभावना है कि हम दोषिता के निकट हों। क्षणिक और स्थायी...समाधान दोनों ही जरुरी होते हैं, लेकिन उनके अंतर को हमें समझना होगा। समस्या के कारण (अज्ञान) को समझना होगा। समस्या के समाधान (ज्ञान) को समझना होगा और समाधान के मार्ग (सजगता) को भी समझना होगा।

प्रश्न : लोगों के बारे में तो कहा नहीं जा सकता लेकिन अपनी बात अगर करूँ तो ज़रूर किसी सो कॉल्ड बुद्ध से मिलना, उसे देखना चाहूंगी। जनता ने अपने आस-पास अंगुलिमाल तो एक्ससेस में देखे सुने हैं, निर्भया वाले, अभी हरियाणा में भी एक...सब अंगुलिमाल ही तो थे। बुद्ध ने अपने समय में कितने अंगुलिमाल सुधार दिए, इसकी सच्चाई पर तो बस अंदाज़े ही लगाए जा सकते हैं। आज के समय में कोई बुद्ध हों, तो उनकी ज़रूरत सच में पड़ेगी। इस से बुद्धत्व की डोक्ट्रिन भी टेस्ट हो जाएगी कि बुद्धत्व कितना ओवररेटेड है, और कितना अंडररेटेड।

उत्तर : बुद्ध और अंगुलिमाल प्रतीक हैं जिनके माध्यम से यह पोस्ट समस्त दुनिया में और किसी व्यक्ति विशेष में ही व्याप्त सत्व और तम की ओर इशारा करती है। फांसी, कैद या जितने भी अन्य उपाय हैं वह समाज की तात्कालिक आवश्यकताओं के अनरूप उचित हो सकते हैं। फौरी तौर पर एक संतुलन बना रहे इसके लिए जरुरी हो सकते हैं। ये एक भय जरुर पैदा कर सकते हैं, लेकिन क्या ये किसी इंसान का अंतस बदल सकते हैं? क्या गलत से गलत को स्थायी रूप से बदला जा सकता है? इंसान का अंतस तभी बदलेगा जब वह अपने सत्व को पहचानेगा। जब वह अपने अज्ञान से ऊपर उठेगा।...और यह प्रेरणा उसे कहीं से भी मिल सकती है। वह प्रेरक तत्व जो भी होगा वह सत्व ही होगा।

और ऐसे तो आपको ढेरों उदाहरण मिल जायेंगे जहाँ किसी की अच्छाई या व्यक्तित्व से प्रेरित होकर किसी में सुधार आया हो। आप खुद के जीवन में ऐसे उदाहरण खोज सकती हैं। मेरे पास तो ऐसे कई उदाहरण है। रही बात रेटेड की तो हर चीज मूल्य लगाने के लिए नहीं होती। पर लगाना भी हो तो जिस अच्छाई को आप समाज में देखना चाहती हैं क्या उसके चरम को इग्नोर कर सकती हैं? आदर्श तो वही होगा। बाकी दुनिया को सुधार देने की भावना जितनी प्रबल होती है वहां उतना ही अहंकार छिपा होता है। जैसे आतंकवादी भी अपनी ओर से यही कर रहे होते हैं।

जिस क्षण हम खुद बदलते हैं उस क्षण ही पूरी दुनिया बदलती है। अन्यथा तो हम बस एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में ही लगे रहते हैं। हम खुद को पूर्ण निर्दोष बनाये बगैर दुनिया को सुधारने की बात करें...यह प्रचलित और जरुरी हो तब भी कहीं गहराई में बहुत अजीब है। क्योंकि जितना भी दोष हममें विद्यमान है उसका ही थोड़ा बड़ा रूप किसी अपराधी में है...और यह जो अजीब वाली फीलिंग है यह भी किसी सिदार्थ को बुद्धत्व की ओर प्रेरित करती है। बाकी तो यह ऊपर ही स्पष्ट है कि समाज की तात्कालिक जरूरतों के अनुरूप कानून और न्याय व्यवस्था होनी ही चाहिए। लेकिन यह अंतिम समाधान नहीं। दोषों का दूर होना स्वयं निर्दोष बन जाने में ही निहित है। हाँ, इससे फैला उजास अवश्य वह परिवर्तन ला सकता है जो क्रांति की अनगिनत मशालें नहीं ला सकती। तो जो लोग यह कहते हैं कि बुद्ध और महावीर स्वार्थी हैं, वे अनजाने में ही सही बिल्कुल सही कहते हैं। क्योंकि कोई भी व्यक्ति सच्चे अर्थों में 'परमार्थी' बन ही नहीं सकता जब तक वह सच्चे अर्थों में 'स्वार्थी' न बन जाए। :)


By Monika Jain ‘पंछी’

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