Wednesday, November 30, 2016

Thoughtful Quotes in Hindi

विचारणीय बातें, विचारशील उद्धरण, विचार. Thoughtful Quotes in Hindi. Thoughts of the Day, Thought Provoking Status, Sms, Messages, Sayings, Lines, Words.
Thoughtful Quotes in Hindi
Thoughtful Quotes
  • बात आज की नहीं है, सदियों से यही हो रहा है। स्त्री का मुंह बंद करवाना हो, उससे बदला लेना हो, उसके प्रति अपनी नफ़रत उगलनी हो...तथाकथित पुरुषों के पास कुछ गिने-चुने तरीके होते हैं : उसका बलात्कार कर दो, उसे बदनाम करने की धमकी दे दो या उसके चरित्र की बखिया उधेड़ डालो। लेकिन प्यारे तथाकथित पुरुषों! Who the hell you are to define our character? तुम्हारा दिया चरित्र प्रमाण पत्र अपने पास रखो और कागज़ पर बनाया हो तो रद्दी में बेचकर थोड़े छुट्टे इकट्ठे कर लो। इससे ज्यादा तो कोई कीमत नहीं ही है उसकी। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • दुनिया में सबके अपने-अपने युग हैं। कहीं किसी कोने में कोई नरभक्षी बना बैठा है तो कहीं कोई ऐसा भी है जिसका जीवन किसी के भी भक्षण का मोहताज ही नहीं। किसी के आठों प्रहर सावद्य भाषा के प्रयोग में गुजरते हैं तो कोई निरवद्य भाषा की अंतिम परिणीती मौन तक पहुँच चुका है। कोई मन में न जाने कितनी नृशंस हत्यायों की योजनाएँ बनाता है तो कोई कहीं मन से ही मुक्त हो चुका है। दुनिया में सबके अपने-अपने युग हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • अंधसमर्थक या अंधविरोधी भक्त नहीं होते। भक्ति तो जागरूकता के एक विशेष स्तर पर घटित होती है। प्रेम का चरम है भक्ति। इसमें समर्थन या विरोध के लिए कोई स्थान है ही कहाँ? यह तो पूर्ण स्वीकार की अवस्था है। विरलों को मयस्सर है भक्त होना तो। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जो बस विकल्प तलाशते हैं, वे प्रेम क्या कर पायेंगे? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कुत्ते, गधे, गिरगिट...नाहक बदनाम हुए। तुम्हारी वासना, बर्बरता और महत्वकांक्षाओं की बलि चढ़े जानवरों की जमात में तो 'मनुष्य' शब्द गाली की तरह इस्तेमाल होना चाहिए। नहीं क्या? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • पुरानी कंडीशनिंग से बाहर निकलना जितना जरुरी है, उतना ही जरुरी है नयी कंडीशनिंग से बचे रहना। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • आयाम बदलते ही सारे मायने बदल जाते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • अभयदान से बड़ा दान और क्या हो सकता है? इसमें हम वहीँ देते हैं जो हमारा है या यूँ कहें कि जो खुद हम हैं। बाकी के सारे दान में हम वह देते हैं जो हमारा होता ही नहीं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • अजीब इत्तेफाक है न...जो अपने धर्म, अल्लाह/ईश्वर और संप्रदाय के प्रति जितना कट्टर है, उसके मुंह से उतने ही ज्यादा फूल बरसते हैं। इनकी जुबान से निकले शब्द पढ़कर तो इनका अल्लाह/ईश्वर भी शर्म से पानी-पानी हो जाता होगा। जिनका धर्म उन्हें बोलने की तहजीब तक न सिखा पाया, उनसे और कोई उम्मीद बेमानी है। हाँ, ये अपने ही धर्म के सबसे बड़े दुश्मन जरुर है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मृत्यु नहीं, मृत्यु का कारण शहीद बनाता है। ~ नेपोलियन बोनापार्ट / Napoleon Bonaparte 
  • जो व्यक्ति अपने बारे में नहीं सोचता, वह दरअसल सोचता ही नहीं है।~ ऑस्कर वाइल्ड / Oscar Wilde 
  • ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो हम फ़ेंक देते यदि हमें इस बात की चिंता नहीं होती कि कोई और उन्हें उठा लेगा। ~ ऑस्कर वाइल्ड / Oscar Wilde 
  • हो सकता है मैं आपके विचारों से सहमत न हो पाऊं पर विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करूँगा। ~ वाल्तेयर / Voltaire 
  • किसी निर्दोष को दण्डित करने से बेहतर है, एक दोषी को बख्श देने का जोखिम उठाना। ~ वाल्तेयर / Voltaire 
  • औसत शिक्षक कहते हैं। अच्छे शिक्षक बताते हैं। बेहतरीन शिक्षक व्याख्यापित करते हैं। ~ William Arthur Ward / विलियम आर्थर वार्ड

Tuesday, November 29, 2016

Poem on Corruption in Hindi

भ्रष्टाचार पर कविता, भ्रष्टाचारी. Poem on Corruption in Hindi for Kids. Bhrashtachar Kavita, Corrupt Politicians Poetry, Politics Shayari, Slogans, Lines. 
 Poem on Corruption in Hindi
भ्रष्टाचारी

इस देश की है बीमारी, ये भूखे भ्रष्टाचारी -
जिस थाली में खाना खाते, ये छेद उसी में करते है
लात गरीब के पेट पे मार, घर अपना ये भरते है।

इस देश की है बीमारी, ये धनवान भिखारी -
ले हाथ कटोरा घर घर जाते, मौसम जो चुनावों का आता
अल्लाह के नाम पे दे-दे वोट, गाना इनको बस एक ही आता।

इस देश की है बीमारी, ये मूल्यों के व्यापारी -
नीलाम देश को कर दे ये, जो इनका बस चल जाये
भारत माँ को कर शर्मिंदा, ये उसकी कोख लजाये।

इस देश की है बीमारी, ये दानव अत्याचारी -
खून चूसकर जनता का, ये अपना राज चलाये
जो खाली रह गया इनका पेट, नरभक्षी भी बन जाये।

इस देश की है बीमारी, देखो इनकी गद्दारी -
गाय का चारा खाते ये, कोयले की कालिख लगाते ये
धरती माँ का सौदा कर, उसको भी नोच खाते ये।

इस देश की है बीमारी, ये भूखे भ्रष्टाचारी।

By Monika Jain 'पंछी'

Listen/Watch the video of this poem about corruption : 


Sunday, November 27, 2016

Personality Development Tips in Hindi

व्यक्तित्व विकास पर निबंध. Personality Development Tips in Hindi. Know Yourself Essay. How to Develop Skills, Personal Grooming Speech, Self Improvement Article.
Personality Development Tips in Hindi
दोस्त बनिए पर सबसे पहले खुद अपने

अक्सर कुछ लोग अपनी ज़िंदगी से नाख़ुश होते हैं। उन्हें अपने भाग्य, अपनी किस्मत से शिकायत रहती है जैसे : मैं जो भी चाहता हूँ मुझे कभी नहीं मिलता, मेरा भाग्य मेरा साथ कभी नहीं देता या हर कार्य में मुझे असफलता मिलती है। ऐसे लोग निराशा से घिर जाते हैं और हमेशा उदास और तनावग्रस्त रहते हैं।

कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें अपने आसपास के लोगों, अपने दोस्तों और अपने रिश्तों से शिकायत रहती है जैसे : सभी मुझे इग्नोर करते हैं, मेरा मजाक बनाते हैं या मुझे कोई नहीं चाहता, कोई मदद नहीं करता। ये लोग धीरे-धीरे दुनिया से कटने लगते हैं। एकाकीपन और अवसाद के शिकार भी हो सकते हैं।

कुछ व्यक्तियों के लिए खुद से जुड़ा निर्णय लेना बहुत मुश्किल होता है जैसे : मुझे कौनसा कोर्स करना चाहिए, करियर का निर्माण किस क्षेत्र में करना चाहिए, किस क्षेत्र में मुझे सफलता मिल सकती है? ऐसे लोग अपना लक्ष्य निर्धारित नहीं कर पाते और अपने जीवन से जुड़े निर्णयों में हमेशा खुद को दौराहे पर पाते हैं। असमंजस की वजह से कई बार गलत निर्णय कर लेते हैं जिसका परिणाम सिर्फ पछतावा रह जाता हैं।

ऐसी सभी परेशानियों और समस्यायों से निज़ात पाने के लिए सबसे ज्यादा जरुरी है कि हम सबसे पहले अपने दोस्त बने और अपने साथ समय बितायें। अक्सर ज़िंदगी की भाग दौड़ में हमारे पास खुद के लिए जरा भी वक्त नहीं होता। हमारे साथ जो भी होता है हम बस उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे देते हैं और ये नहीं सोचते कि ये क्यों हो रहा है?

हम सभी को चाहिए कि हम रोज कुछ समय सिर्फ अपने साथ बितायें। खुद से बाते करें। हमें क्या अच्छा लगता हैं, क्या बुरा लगता है, किन कार्यों से ख़ुशी मिलती है और किनसे नहीं…ये सोचें। अपने हर कार्य, अपने व्यवहार, अपने मूड, अपनी प्रतिक्रियाओं और अपने प्रत्युत्तर का निरीक्षण करें। हमारी प्रतिक्रियायें हमें कैसे प्रभावित करती हैं, हम दूसरो से कैसे इंटरेक्ट करते हैं, हमारा वातावरण हमें कैसे प्रभावित करता है, इस पर गौर करें। दिन भर हमने क्या किया, किन लोगों से मिले, क्या बात की…इस पर भी ध्यान दें।

किन लोगों का साथ हमें अच्छा लगता हैं और किनके साथ हम असहज महसूस करते हैं? हमारी कौनसी बात दूसरों की तारीफ पाती है और कौनसी बात आलोचना?... इसका भी निरीक्षण कीजिये। अपने व्यवहार, अपनी भाषा, अपने रहन सहन, अपने व्यक्तित्व सभी का पूरी ईमानदारी से निरीक्षण कीजिये। अपने आलोचक बनिये और अपने प्रशंसक भी, पर पूरी ईमानदारी के साथ।

इस विश्लेषण और निरीक्षण का ये फायदा होगा की अब आप अपनी खूबियों और अपनी कमियों से अच्छे से वाकिफ़ हो जायेंगे। अपनी खूबियों को तराशिये और अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास करिए फिर देखिये आपके व्यक्तित्व, आपकी भाषा, रहन सहन और आपके व्यवहार में कैसा निखार आता है। स्वतः ही आप लोगों का ध्यान बटोरने लगेंगे और उन सभी की नज़रों में खास बन जायेंगे।

जहाँ बात आपकी नौकरी या करियर से जुड़े निर्णयों की हो तो उसके लिए जरुरी हैं आप अपनी पसंद, नापसंद, अपनी स्ट्रेंथ और अपनी कमजोरियों को पहचाने। आप किस क्षेत्र में माहिर हैं, क्या करके आपको ख़ुशी मिलती हैं, आपके कौनसे कार्य की हर जगह तारीफ होती है और किस कार्य को करते समय आप पूरे आत्मविश्वास से भरे होते हैं, ये सब जानना बहुत जरुरी हैं।

जब हम खुद को पहचानने लगेंगे तो हमारे लिए लक्ष्य का निर्धारण आसान हो जायेगा। हमसे जुड़े निर्णय करते समय हमें दुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। समय की बर्बादी से भी बचेंगे और गलत निर्णयों से भी। हम अपने भाग्य के निर्माता बनेंगे। अपने रिश्तों और अपने दोस्तों का चुनाव कर पाएंगे और रिश्तों में मधुरता आएगी। सही दिशा में सही कदम उठाकर अपने सभी सपनों को साकार कर पाएंगे और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता हमारे कदम चूमेगी

By Monika Jain 'पंछी'

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Saturday, November 26, 2016

Poem on Agriculture in Hindi

भारतीय कृषि समस्या और समाधान पर कविता, खेती. Poem on Agriculture in Hindi. Bhartiya Krishi Poetry, Indian Farming Sector Rhymes, Husbandry Crops Slogans, Lines.
 
Poem on Agriculture in Hindi
 
नूतन सृजन

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का
दावा करने वाला देश
और इसकी कल्याणकारी योजनायें,
क्यों नहीं बचा पाती
मौत के मुंह में जाने वाले किसानों को?

जहाँ कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है,
जिस पर दो तिहाई आबादी की आजीविका है निर्भर।
जहाँ छह ऋतुएं और दर्जनों प्रकार की मिट्टी
बनाती है विविधिकरण को संभव।
जहाँ लगभग हर तरह की फसल का उत्पादन है सुगम।
वहां भी क्यों गहराता है कृषि पर संकट?

सिंचाई के लिए मानसून पर निर्भरता,
प्राकृतिक आपदाएं और पूँजी निवेश की कमी,
जोत इकाइयों का छोटा आकार,
बिजली, परिवहन आदि सुविधाओं का अभाव।

नयी तकनीक और उत्तम बीजों की अनुपलब्धता,
रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का बढ़ता प्रयोग,
मिट्टी की उर्वरता में कमी
और प्राकृतिक संसाधनों का अतिउपभोग

बड़ी तादाद में कृषि के लिए उपयोगी जीवों का खत्म हो जाना,
और किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य न मिल पाना।
कृषि योग्य भूमि का लगातार घटना,
और उस पर निर्भर रहने वालों की संख्या का हर पल बढ़ना।
- यही सब कारण है कृषि के गिरते स्तर के।

रेनहार्वेस्टिंग को अपनाना,
उत्पादन में अस्थिरता को कम करना।
बीमा और सस्ती ऋण सुविधाओं की उपलब्धता,
मानसून पर घटती निर्भरता।
जोतों के आकार को बढ़ाना,
फसलों में विविधिकरण को लाना।
कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन,
बाढ़ और सूखे की रोकथाम के साधन।
गोबर गैस और सौर ऊर्जा का समुचित उपयोग,
नयी उन्नत तकनीकों का प्रयोग।

जरुरत है आज
कृषि ढांचागत व्यवस्था को पुनः परिभाषित करने की।
कृषि का नहीं है कोई भी विकल्प!
इसलिए जरुरत है नूतन सृजन कर देश को
सच्चे अर्थों में विकसित करने की।

By Monika Jain ‘पंछी’

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Friday, November 25, 2016

Hate Quotes in Hindi

नफ़रत, घृणा, द्वेष. Hate Quotes in Hindi. Anti Hatred Slogans, Hateful, Haters, Nafrat Suvichar, Hating People Status, Dislike Sms, Messages, Lines, Sayings.
Hate Quotes in Hindi
Hate Quotes

  • कुछ लोगों के अतीत के कड़वे गीत कभी नहीं छूटते या यूँ कहूँ कि कुछ लोगों के मन का जहर कभी जाता ही नहीं। तिस पर चित भी मेरी और पट भी मेरी वाला व्यक्तित्व हो तब तो डील करना बहुत मुश्किल। बार-बार चिंगारी भड़काने की किसी की आदत हो, अपनी गलतियों और उनकी गंभीरता का कभी अहसास हो ही नहीं तो ऐसे व्यक्ति से सुलझने/उलझने की कोशिश मतलब...उलझते ही जाना...उलझते ही जाना और उलझते ही जाना।...और इस कथा का कोई अंत ही नहीं। कुछ लोगों से मुक्त होने का बस एक ही तरीका है...खुद से मुक्त हो जाना। जहाँ उनका जहर और चिंगारियाँ सबको बेअसरदार होना ही है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • तुम इतनी अच्छी क्यों हों?
    क्या तुम्हारे जैसे लोग भी दुनिया में होते हैं?
    आप मेरे जीवन की प्रेरणा हैं।
    आपके शब्दों में दुनिया को बदलने की ताकत है।
    बस तुम ही तो एक दोस्त हो।
    ऐसे 999 वाक्य 999 लोगों के मुंह से सुनकर भी दूर कहीं नफरत लिए बैठे एक व्यक्ति का एक वाक्य इन 999 वाक्यों से उपजी ख़ुशी को पल भर में छीन ले जा सकता है। इतने दुःखवादी क्यों हैं हम? और क्यों ऐसा है कि हमारी खुशियाँ किसी के शब्दों की मोहताज है? असल सुख तो वाकई में भीतर का है जो न 999 लोगों की तारीफ से प्रभावित होता है और न ही किसी एक की नफ़रत के झांसे में आकर दुःख में बदल सकता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • घृणित कुछ भी नहीं होता, बस त्याज्य होता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मंदिर कहते समय मस्जिद, गुरुद्वारा न कहा तो शामत
    ईश्वर कहते समय खुदा, अल्लाह न कहा तो शामत
    हिन्दू से जुड़ी बात कर दी, मुस्लिम की न की तो शामत
    उफ्फ, ये धार्मिक लोग!
    एक और शामत को निमंत्रण देने वाली थी पर अच्छा हुआ याद आ गया।
    मस्जिद कहते समय मंदिर न कहा तो शामत
    खुदा कहते समय भगवान न कहा तो शामत
    मुस्लिम कहते समय हिन्दू को भूल गयी तो शामत!...शामत ही शामत! ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • कुछ लोग आपको सिर्फ इसलिए पढ़ते हैं ताकि आपके प्रति अपनी नफरत को बाहर निकालने का कोई बहाना ढूंढ सकें। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कुछ लोगों के दिल में इतनी नफरत क्यों होती है? न कोई जान पहचान, न कभी पाला पड़ा, न कभी कुछ बिगाड़ा, तब भी बेवजह सीधी-साधी पोस्ट्स पर जहर उगलने लगते हैं। असहमति या तर्कों से कोई समस्या नहीं, पर नफरत और पूर्वाग्रहों से भरे दिलों से है। कुछ लोग कहेंगे बर्दाश्त क्यों करते हो? शायद इस विश्वास में कि हो सकता है कभी पोस्ट्स पढ़ते-पढ़ते उनकी नफरत कम हो जाए, पर ऐसा कुछ भी तो नहीं होता...और तब लगता है लेखक के तौर पर हम बुरी तरह से असफल हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • सहमति और असहमति दोनों स्वीकार्य है। लेकिन नफ़रत फैलाने और बात का बतंगड़ बनाने का इरादा नहीं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मेरी किसी पोस्ट पर अगर फ्रेंडलिस्ट के दो मित्र या उनमें से कोई एक आपस में स्वस्थ चर्चा को छोड़कर लड़ने-झगड़ने लगे, और बीच में पड़ने का कोई औचित्य न हो तो मैं पोस्ट ओनली मी या डिलीट कर देती हूँ। जगह ही नहीं मिलेगी तो लड़ेंगे कैसे? :p ;)
    देखिये! मुझे सभी प्रिय हैं। यूँ किसी को लड़ते-झगड़ते देखना अच्छा नहीं लगता। स्वस्थ चर्चा का माहौल बनाईये, अगर वाकई समस्यायों के समाधान के प्रति जागरूक हैं तो। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जानवरों को बक्श दीजिये। उन्हें अपनी कुंठा और नफरत की लपेट में मत लीजिये। खैर! आप तो स्त्रियों को भी कहाँ बख्शतें हैं? माँ-बहनों के रूप में उन्हें भी बात-बात में लपेट ही लेते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • यदि आप और मैं इस क्षण किसी के भी विरुद्ध हिंसा या नफरत का विचार ला रहे हैं, तो हम दुनिया को घायल करने में योगदान दे रहे हैं। ~ दीपक चोपड़ा / Deepak Chopra

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Thursday, November 24, 2016

Poem on Agni in Hindi

नफरत की आग कविता, अग्नि शायरी, घृणा, प्रेम. Poem on Agni in Hindi. Love and Hate Poetry, Fire of Hatred Rhyme, Flame of Hope Lines, Light Slogans, Bitterness. 
Poem on Agni in Hindi

प्यार की फुहार

कल रात जब पढ़ा मैंने हम सब के मन को
तो एक सिहरन सारे तन में दौड़ गयी
कंपकपाती ठण्ड में भी एक परेशानी
मेरे माथे पर छलकता पसीना छोड़ गयी।

घबराहट और बेचैनी के साथ
न जाने कब तक मैं जागती रही
नफरत की आग से उड़ रहा था जो धुआँ
उसमें सारी रात मैं खांसती रही।

असंख्य विचारों की विरोधाभासी आंधियाँ;
धर्म, संप्रदाय, नीति और मतों के उड़ते पत्ते
नफरत की उस आग को हर एक पत्ता
अपने-अपने तरीके से हवा दे रहा था
मानो दुनिया का हर एक दिल
प्रेम को अलविदा कह रहा था।

‘क्या इसी तरह हो जाएगा
एक दिन इस दुनिया का अंत?’
मेरा मन बस यही सोचकर बैठा जा रहा था
एक अजीब सा खौफ मेरे दिल और दिमाग में
पल-पल पैठा जा रहा था।

मैंने बहुत ढूंढा, हाँ! मैंने बहुत ढूंढा -
मिल जाए कहीं प्यार की एक मीठी बूँद
जो ठंडा करदे इस कड़वाहट की आग को
विचारों में हो चाहे जितनी भी विविधताएँ
पर बस थाम ले इस भीषण विवाद को।

सूरज की किरण ने अचानक मेरा दरवाजा खटखटाया
पर मेरे दिल का खौफ अभी तक भी कहाँ मिट पाया?

बाहर निकलकर देखा -
कबूतरों का एक जोड़ा दुनिया से बेखबर
प्यार में खोया हुआ था
सड़क पर दूसरे शहर को जा रही
एक औरत के आँचल में
उसका नन्हा सा बच्चा चैन से सोया हुआ था।

प्रेम और सुरक्षा के इन भावों ने
दिल को जैसे एक गर्माहट दी
दूर हुआ सारा खौफ और
तन-मन की घबराहट भी।

प्यार की यही फुहार
बस अब हर जगह बरस जाए
नफरत में हर पल जलती ये दुनिया
बस किसी भी तरह से बच जाए।
बस किसी भी तरह से बच जाए।

By Monika Jain ‘पंछी’


Watch/Listen the video of this poem about flame of love and hate in my voice :


Wednesday, November 23, 2016

Poem on About Me, Myself, I in Hindi

मैं कौन हूँ कविता. Poem on About Me, Myself in Hindi. Who I Am Poetry, Mysterious Girl Shayari, Enigmatic Woman Rhyme, Describe Yourself Lines, Puzzle Mystery.

Poem on About Me, Myself, I in Hindi

पहेली हूँ मैं

दुनिया की भीड़ में अकेली हूँ मैं
कोई न सुलझा पाए वो पहेली हूँ मैं।

आकाश कवि की कविता
दिशा विहीन एक सरिता
अदृश्य ख्वाबों की सहेली हूँ मैं
कोई न सुलझा पाए वो पहेली हूँ मैं।

पंख बिना ही उड़ने वाली
दिशा बिना ही बहने वाली
बिना राह की चलने वाली अलबेली हूँ मैं
कोई न सुलझा पाए वो पहेली हूँ मैं।

शब्द विहीन एक परिभाषा
सोयी आँखों की जागृत भाषा
खामोश जुब़ा की भाषा अनकही हूँ मैं
कोई न सुलझा पाए वो पहेली हूँ मैं।

By Monika Jain 'पंछी'


  To read the english version of this poem about me, myself and I click here.

Watch/Listen this poem in my voice : 



Sunday, November 13, 2016

Desire Quotes in Hindi

इच्छा, आकांक्षा, कामना, अभिलाषा, चाह. Desire Quotes in Hindi. Intention Status, Aspiration Sms, Requirement, Lust, Ambition, Fantasy, Wish, Will, Wants. 
Desire Quotes in Hindi
Desire Quotes

  • आज एक मित्र ने पूछा, ‘अगर कोई व्यक्ति द्वेष वश आपकी मृत्यु की कामना करता है। इसके लिए वह अक्सर अपने इष्ट से प्रार्थना भी करता है और आपको आग में झोंकने हेतु हवन, तंत्र, मंत्र आदि की साधना भी करता हो तो आपकी क्या प्रतिक्रिया होगी?’ पहले तो सुनकर मुस्कुरा गई...फिर कहा, ‘ऐसा अगर कोई हो और इससे उसकी किसी समस्या का समाधान होता हो तो ईश्वर अवश्य जल्द से जल्द उसकी इच्छा पूरी करे। बस मेरी मृत्यु के बाद ईश्वर उसे जीवन जरुर दे। ऐसा जीवन जिसमें फिर द्वेष वश किसी की मृत्यु की कामना न हो। इसलिए नहीं कि मृत्यु बुरी है। जीवन या मृत्यु दोनों ही अच्छे या बुरे कुछ नहीं होते। अच्छे और बुरे का सम्बन्ध मात्र कामना से है।’ ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जीवेषणा नहीं जीवंतता की जरुरत है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • हर मनुष्य अनंत का आकांक्षी है। बस उसके रास्ते, साधन और उपलब्धियां इतनी सीमित है कि तमाम उम्र की दौड़ भी उसकी आकांक्षा को पूरा नहीं कर पाती। यही रास्ता जब भीतर की ओर पलट जाता है तो कुछ विशेष साधनों के द्वारा असीमित को पाया जा सकता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मनुष्य की आसक्ति की एक हाइट यह भी है कि वह मरने के बाद भी अपना नाम जिन्दा रखना चाहता है। स्वत: जिन्दा रहने और जिन्दा रखने की चाह में अंतर है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • पौधे की पत्तियां तोड़ने की उसकी तीव्र इच्छा को देखते हुए मैं उसे रोक तो नहीं पायी...पर मैंने कहा, 'बाबु, बस थोड़ी सी तोड़ना।' उसने पूछा, 'क्यों?' मैंने कहा, 'पौधे को भी दर्द होता है न!' ...और वह टूटी हुई पत्ती को वापस पौधे पर जोड़ने लगी। :) बच्चे तो शायद ऐसे ही होते हैं। लेकिन कुछ दृश्य कितना कुछ कह जाते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मैं यहाँ क्यों हूँ, कौन हूँ और क्या कर रहा/रही हूँ। ये प्रश्न ही अध्यात्म की ओर आकर्षित करते हैं। लेकिन चमत्कार दिखाने और चमत्कार अनुभव करने की तीव्र इच्छा इस मार्ग से भटकाने के लिए पर्याप्त है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • दुनिया-जहाँ की घटनाएँ देखते-सुनते मन अक्सर सवाल करता है...आखिर इंसान पहुँचना कहाँ चाहता है? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मुझे हैरत होती है यह देख-देखकर कि लोग किन-किन तरीकों से किसी पर अपना नियंत्रण चाहते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • यदि महत्वकांक्षा से आपको ठेस नहीं लगती है तो आप महत्वकांक्षी हैं ही नहीं। ~ ए. मर्गोलेज 
  • इच्छाओं की पूर्ति का एकमात्र मंत्र उन्हें टाल देना है। ~ अज्ञात / Unknown 
  • तुम अपनी इच्छाओं को जितना कम करोगे उतने ही परमात्मा पद के निकट पहुँच जाओगे। ~ सुकरात / Sukrat 
  • अगर सारी दुनिया को हम पाना चाहते हैं तो पाओ अपने को देकर। ~ जैनेन्द्र कुमार / Jainendra Kumar 
  • जो अपने सुख की इच्छा से दूसरे जीवों की हिंसा करता है, उसे कहीं सुख नहीं मिलता। ~ गौतम बुद्ध / Gautam Buddha  
  • अपने दुश्मनों पर विजय पाने वाले की तुलना में मैं उसे शूरवीर मानता हूँ जिसने अपनी इच्छाओं पर विजय प्राप्त कर ली है क्योंकि सबसे कठिन विजय अपने आप पर विजय होती है। ~ अरस्तु / Arastu

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Friday, November 11, 2016

Moral Quotes in Hindi

नैतिक मूल्य शिक्षा, नैतिकता पर विचार, सुविचार. Moral Values Quotes in Hindi. Morality Slogans, Status, Messages, Sentences, Sms, Sayings, Proverbs, Quotations.
 Moral Quotes in Hindi
Moral Quotes

  • सरलता, मासूमियत और संवेदना को चोटों से डरकर खोने की जरुरत नहीं होती। सरलता को खोना एक पायदान नीचे उतर जाना है, जड़ बन जाना है। जरुरत है सरलता और निर्दोषिता को इतना परिष्कृत कर देने की कि फिर चोट हम तक पहुंचे लेकिन हमें लगे ही नहीं। यूँ चोट सामान्यत: जड़ता तक भी नहीं पहुँचती पर वह चोट देना सीख जाती है। लेकिन वह मृतप्राय स्थिति है। हमें तो इतना जीवंत होना है कि चोट जो हम तक पहुँचे वह भी रूपांतरित होकर प्रेम की फुहारों सी लौटे। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • हम संवाद करें, विवाद नहीं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • सत्य तर्कातीत है। वह सभी विरोधाभासों को खुद में समाहित कर लेता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • हारना गलत नहीं है पर हार से सबक ना लेना गलत है। ~ अज्ञात / Unknown  
  • शिक्षा सबसे सशक्त हथियार है, जिससे दुनिया को बदला जा सकता है। ~ अज्ञात / Unknown  
  • अपना चेहरा हमेशा सूर्य की रोशनी की ओर रखें, फिर काली छाया आपके पीछे ही रहेगी। ~ वाल्ट व्हिटमैन / Walt Whitman 
  • अप्रिय शब्द पशुओं को भी नहीं सुहाते। ~ गौतम बुद्ध / Gautam Buddha 
  • नेक बात चाहे किसी धर्म की हो, किसी आदमी की हो, उसे अवश्य गृहण करो। ~ जवाहरलाल नेहरु / Jawaharlal Nehru 
  • अगर आप 100 लोगों की मदद नहीं कर सकते तो केवल एक की ही मदद कर दें। ~ मदर टेरेसा / Mother Teresa 
  • मीठे बोल बोलने में संक्षिप्त और आसान हो सकते हैं, लेकिन इनकी गूँज सचमुच अनन्त होती है। ~ मदर टेरेसा / Mother Teresa 
  • कल तो चला गया, आने वाला कल अभी आया नहीं। आपके पास सिर्फ आज है। आइये शुरुआत करें। ~ मदर टेरेसा / Mother Teresa 
  • मैंने कर्म से ही अपने को बहुगुणित किया है। ~ नेपोलियन बोनापार्ट / Napoleon Bonaparte 
  • वहां मत जाइए जहाँ रास्ता ले जाए, बल्कि वहां जाइए जहाँ कोई रास्ता नहीं है और अपने निशान छोड़ आइये। ~ रॉल्फ वाल्डो इमर्सन / Ralph Waldo Emerson 
  • एक रत्ती भर कर्म भी मन भर बात के बराबर है। ~ रॉल्फ वॉल्डो इमर्सन / Ralph Waldo Emerson 
  • सुनो अधिक से अधिक, बोलो कम से कम। ~ विलियम शेक्सपीयर / Shakespeare 
  • हमारी शंकाएं हमारे साथ विश्वासघात करती हैं और हमें उन अच्छाइयों से वंचित रखती हैं, जिन्हें हम प्रयास से पा जाते। ~ विलियम शेक्सपीयर / Shakespeare 
  • तुम्हारी पोशाक उतनी कीमती होनी चाहिए जितनी बनवाने की तुम्हारी योग्यता हो। वह बहुमूल्य तो हो लेकिन भड़कीली न हो। ~ विलियम शेक्सपीयर / Shakespeare 
  • जितने दिन जिंदा हो, उसे गनीमत समझो और इससे पहले कि लोग तुम्हें मुर्दा कहें नेकी कर जाओ। ~ शेख सादी / Sheikh Saadi 
  • विद्वान देखता है, जो विद्या उसे आनंद देती है, वह संसार के लिए भी आनंदप्रद होती है और इसलिए वह विद्या को और भी चाहने लगता है। ~ Saint Thiruvalluvar / तिरुवल्लुवर 
  • श्रेष्ठ व्यक्तियों का सम्मान करके उन्हें अपना बना लेना दुर्लभ पदार्थों से भी अधिक दुर्लभ है। ~ Saint Thiruvalluvar / तिरुवल्लुवर 
  • यदि तुम्हारे एक शब्द से भी किसी को पीड़ा पहुंचती है तो अपनी सब नेकी खत्म हुई समझो। ~ Saint Thiruvalluvar / तिरुवल्लुवर 
  • नेकी से विमुख हो जाना और बदी करना निस्संदेह बुरा है, मगर सामने हंस कर बोलना और पीछे चुगलखोरी करना उससे भी बुरा है। ~ Saint Thiruvalluvar / तिरुवल्लुवर 
  • निराशा को काम में व्यस्त रहकर दूर भगाया जा सकता है। ~ वाल्तेयर / Voltaire
 
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Friday, November 4, 2016

Love Memories in Hindi

यादें, प्यार के किस्से, प्रेम कहानी. Love Memories in Hindi. Remembrance of Old Days, End of College Life, Nostalgia, Memorable Short Stories, Tales, Memoirs. 

Love Memories in Hindi

यादों के झरोखों से

(1)

वो गर्मियों की एक अँधेरी रात थी। हर रोज की तरह उस दिन भी हम उसी सुनसान रास्ते पर घूमने निकले थे, जिस पर चलते-चलते हर रोज हमारे कदम एक मंदिर तक आकर रुक जाते थे। उन दिनों कभी-कभी मंदिर जाना अच्छा लगता था। वहां बहुत चहल-पहल रहती थी। मंदिर में दर्शन के बाद वहीँ बाहर बने चबूतरे पर हम कुछ देर बैठते और फिर वैसे ही लम्बी सैर कर अपने-अपने ठिकाने लौट आते।

उस दिन रास्ते में चलते-चलते अचानक सामने एक बाइक आकर रुकी जिस पर चार लड़के सवार थे। हममें से कोई उन्हें नहीं पहचानता था। पर उन्हें देखकर लग रहा था कि वे नशे में धुत्त हैं। वे चारों बाइक से नीचे उतरे और उनमें से एक तुम्हें मारने लगा। अचानक हुए इस घटनाक्रम से घबराई मैं तुम्हारा नाम पुकारते हुए तुम्हारी ओर आने लगी तो दूसरे लड़के ने मेरा हाथ पकड़ लिया और तीसरे ने चाक़ू भी निकाल लिया। मेरा हाथ पकड़कर खड़े लड़के ने अचानक मेरी आँखों में गौर से देखा तो डर के मारे मेरे मुंह से बस एक ही शब्द निकला, ‘मम्मी!’ पता नहीं उसे अचानक क्या हुआ और उसने एकदम मेरा हाथ छोड़ दिया और अपने सारे दोस्तों को इकट्ठा किया और वे सब उस बाइक पर सवार होकर उसी रफ़्तार से चले गए जैसे आये थे। उस समय तो दिमाग इस अजीब से वाकये को लेकर सुन्न हो गया था और हम घर लौट आये थे। लेकिन अगले ही दिन सब कुछ सामान्य भी हो गया और हमारा घूमना बदस्तूर जारी रहा। :)

(2)

उदास लम्हों में...इधर-उधर की बातें, किस्से, तस्वीरें, आवाजें और कोलाहल सब जब छितर जाता है तो हर बार दूर खड़े सिर्फ तुम ही नज़र आते हो। कॉलेज का वह आखिरी दिन जब तुम्हारा साथ और यादों का वह शहर लगभग छूट रहा था तब आँसू मेरी आँखों में भी थे और तुम्हारी में भी। पहली बार तुम्हें अपने सामने रोते देखा था और तब मेरी रुलाई और भी जोरों से फूट पड़ी थी। भीगी पलकों के साथ एअरपोर्ट पर दूर जाते तुम...मोड़ आते ही पलट कर देखा था तुमने...तब हाथ खुद-ब-खुद ही 'ऑल द बेस्ट' कहने को ऊपर उठ गया था। पूरे छह महीने के बाद उसी शहर में जब तुम वापस आये...तब तुमसे मिलने आई मैं...इंतजार का एक-एक पल इतना उत्साह से भरा था कि पांच मिनट में पांच बार उठकर दूर तक नज़रें तुम्हें ढूंढने लगती थी...और फिर करीब आधे घंटे बाद तुम्हारे नज़र आते ही धड़कनों के थम जाने और ख़ुशी की एक लहर रोम-रोम में दौड़ पड़ने का वह अहसास आज भी कहीं किसी कोने में जिंदा है शायद। कुछ देर बाद वहां आई मेरी सखी जो सारे किस्से से बेख़बर है, उसकी उपस्थिति में जानबूझकर सामने खड़े लगातार रूमानी आँखों से मुझे देखते तुम...पलकें ऊपर उठाना भी मुश्किल कर दिया था तुमने। नहीं याद इस तरह से कब फिर शर्माई होऊँगी। -_-

(3)

त्योहारों के तार यादों से जुड़े होते हैं...उन यादों से भी जिनका इस दिन से कोई सम्बन्ध होता ही नहीं। वरना क्यों अचानक याद आता मुझे वह आसमानी और नारंगी रंगों पर बनी सफ़ेद बंधेज वाला दुपट्टा, जो तुम्हें इतना पसंद था कि सालों तक तुम्हें उसके रंग याद रहे और एक दिन अचानक तुमने पूछा, ‘क्या अब भी पहनती हो वह दुपट्टा?’ मैं कैसे बताती तुम्हें कि जैसे सांझ से विदा हो जाते हैं उसके रंग...कुछ ऐसे ही विदा हो गए मेरे जीवन से एक और सिमट कर दूसरी ओर लहराते वो खूब लम्बे-लम्बे दुपट्टे!

By Monika Jain ‘पंछी’

Wednesday, November 2, 2016

Relationship Quotes in Hindi

रिश्ते पर सुविचार, सम्बन्ध अनमोल वचन. Relationship Quotes in Hindi. Relation Status, Rishte Sms, Relatives Messages, Bond Thoughts, Kinship Sayings, Lines.
Relationship Quotes in Hindi
Relationship Quotes

  • हममें से कई लोगों को शिकायत होती है जब कोई वर्तमान के किसी क्षण के परिचय, अच्छे से बातचीत होने और कम्पेटिबिलिटी को भविष्य के अच्छे सम्बन्ध और मित्रता के विकास के रूप में नहीं सोचते। मतलब परिचय को बढ़ाने और स्थायी मित्रता में रूचि नहीं लेते।
    खैर! संबंधों या मित्रता में न पड़ने के किसी के कोई भी कारण हों, मुझे लगता है किसी के प्रति आत्मीयता महसूस करने और अच्छे से बातचीत करने के लिए भूत की पृष्ठभूमि या भविष्य की कोई आशा की आवश्यकता नहीं है। वर्तमान क्षणों को पूर्णता से जी लेना भी पर्याप्त है। माध्यम जो भी हो हम वर्तमान क्षण में अच्छे से सम्बंधित हो, अधिक जरुरी यह है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
     
  • शरीर के तल पर हो या मन के तल पर अधिकांशत: सांसारिक संबंधों के मूल में व्यापार या सौदेबाजी ही होती है। वह तो बस हम चमत्कारी शब्दों की कारीगरी से व्यापार और लेन-देन को भी बहुत पवित्र नामों से नवाज देते हैं। अब ईश्वर को ही ले लो। शब्द भले ही भक्त और धर्म जैसे हो पर ज्यादातर तो ईश्वर लोगों के लिए उनकी इच्छाओं की पूर्ति, उनके दु:खों के निवारण और उनके मनोरंजन का साधन मात्र ही है। शाब्दिक, वैचारिक और भावनात्मक कारीगरी के बल पर हम खुद और दूसरों को कितना सलीके से मुर्ख बना लेते हैं। :) ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • Whether you are proportional or inversely proportional...you are related. राग की भर्त्सना कर द्वेष को पकड़ लेने से कुछ खास बदलता नहीं, सम्बन्ध तो बना रहता है।...बस और भी पतित हो जाता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • जहाँ आत्मीयता का स्थान दिखावा लेने लगता है, वहां रिश्तों का क्षरण होने लगता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • कभी नीम-नीम कभी शहद-शहद...कुछ ऐसे ही तो होते हैं हमारे रिश्तें। जहाँ प्यार का मीठा शहद होता है तो तकरार वाले नीम की कड़वाहट भी। कभी-कभी हम इन दोनों के बीच वाली अवस्था में भी पहुँच जाते हैं। जब सब कुछ फीका-फीका सा हो जाता है। स्वादहीन, उदासीन, बेरंग! रिश्तों में उदासीनता की यह स्थिति लम्बे समय तक होना अच्छा नहीं। हम खूब लड़ लें, झगड़ लें पर बातचीत बंद नहीं होनी चाहिए। जो बातचीत बंद हुई तो समझो नीम की कड़वाहट से शहद की मिठास तक पहुँचने के सारे रास्ते भी बंद हो गए। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • अनुष्का और विराट के रिलेशनशिप, ब्रेकअप इन सबके बारे में ज्यादा नहीं पता। लेकिन कुछ ज्यादा ही विचित्र 'हास्य बोध' रखने वाले प्राणियों को दिए विराट के जवाब को पढ़कर ख़याल आया...रिश्ते ऐसे हों कि गर टूट भी जाए तब भी इस बात को लेकर हम कभी शर्मिंदा न हो या खुद को न कोसे कि हमने ऐसे रिश्ते बनाये ही क्यों थे। कोई दिल से भले ही निकल जाए लेकिन दिमाग से न उतरे। बल्कि हम टूटने के बाद भी उस रिश्ते पर फक्र कर सकें और उस व्यक्ति का सम्मान भी। क्योंकि वह व्यक्ति रिश्ता टूट जाने पर भी ससम्मान सही बात का समर्थन और गलत बात का विरोध करना जानता है...और इसके लिए उसे कभी उस अतिविचित्र 'हास्य बोध' की जरुरत नहीं पड़ती जो कुंठा से उपजता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कुछ गलतियाँ जैसे कभी निष्फल नहीं होती। किसी महाशक्की इंसान से कुछ समय के लिए भी जुड़ने से बेहतर है...जन्म-जन्मान्तरों तक अकेले रहना। ~ Monika Jain ‘पंछी’

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