Tuesday, April 18, 2017

Mind Quotes in Hindi

मन पर विचार, बुद्धि, चित्त वृत्ति, मस्तिष्क, विवेक, बोध. Mind Conditioning Quotes in Hindi. Idea, Brain Power Status, Thinking, Opinion, Intellect Thoughts.

Mind Quotes
  • 19/03/2017 - एक ही बात पर कुछ लोग ख़ुश होते हैं, कुछ उदास, कुछ गुस्सा, कुछ क्या, कुछ कुछ नहीं...बस यहीं से मुझे ये 'मन' नामक प्राणी संदिग्ध लगने लगता है। ~ Monika Jain ‘पंछी
  • 23/03/2017 - कितना अच्छा होता गर धारणाएं बनाने की बजाय सीधे बात कर ली जाती। सहजता की कितनी कमी है हमारे समाज में। वैसे अगर सहजता हो तब तो बिना बात किये भी अक्सर धारणा बनती ही नहीं। शब्दों या कविताओं के कुछ टुकड़े पूरी ज़िन्दगी नहीं होते। वे तो खुद की छोड़ो किसी और की क्षणिक भावनाएं भी हो सकती है। क्योंकि लेखक महसूस लेता है कई ज़िंदगियों को खुद में। ~ Monika Jain ‘पंछी 
  • 15/01/2017 - हमें कोई विचार, उसके लिखने की शैली पसंद आती है, सो हमने उसे शेयर कर दिया इसमें कोई समस्या नहीं है। बहुत सारे विरोधी विचारों को पढ़कर ही तो समझ आता है कि विचार सिर्फ विचार है। लेकिन बात यहाँ उनके लिए है जो हावी होने की कोशिश करते हैं। जिन्हें लगता है कि दुनिया में एकमात्र सही सिर्फ वे ही हैं और बाकी सबको उनका अनुसरण करना चाहिए और ऐसा करवाकर वे सारी दुनिया को बदल देंगे। समस्या कट्टरता और तानाशाही में है। ~ Monika Jain ‘पंछी 
  • 21/01/2017 - धारणा का कुचक्र ऐसा है कि यह भी एक धारणा बन जाती है कि कोई कितनी धारणा बनाता है। हाँ, लेकिन धारणा और किसी को समझने में अंतर है। ~ Monika Jain ‘पंछी 
  • 26/01/2017 - ज्ञान जो खाली करे वह प्रेम तक पहुंचता है और ज्ञान जो भरे वह अहंकार तक। ~ Monika Jain ‘पंछी 
  • 04/01/2016 - न आस्तिक कहलाने की जरुरत है...न नास्तिक कहलाने की। जरुरत बस खुले दिमाग की है। किसी श्रेणी से बंध जाना अक्सर उन असीम क्षमताओं से दूर कर देता है जो हमारे भीतर विद्यमान है। कम से कम जो विज्ञान प्रेमी है उसे तो ऐसा नहीं ही करना चाहिए। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 08/01/2017 - प्रेम के मार्ग का बस एक ही काँटा है : वृत्तियाँ। सामान्य और सरल से सरलतम को भी मानव मन की ग्रंथियां कितना जटिल और जटिलतम बना देती है। ~ Monika Jain ‘पंछी 
  • 02/06/2016 - अतीत के चलचित्र वर्तमान के चलचित्रों से मिल बैठते हैं और फिल्म बिगड़ जाती है। (मन तू होजा कोरा कागज।) ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 05/06/2016 - फ्रॉक पहनकर कितनी छोटी हो जाती हूँ मैं...फिर खेलने का मन करने लगता है... ^_^ (तितली मन!) ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 17/03/2016 - जरुरत से अधिक सक्रिय दिमाग और जाग्रत मन में अंतर है। एक जहाँ राय कायम करने और निष्कर्षों की जल्दबाजी में सोये हुए जड़ मन की तरह ही पूर्वाग्रहों, धारणाओं, अंधविश्वासों और रूढ़ियों की गठरी बन सकता है, वहीँ दूसरा इन सबसे मुक्त हो सकता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 17/04/2016 - तुम्हारा मुझे इतने दिनों बाद अचानक कुछ लिख भेजना अनायास ही न था। कुछ ही देर पहले मन की गहराईयों ने तुम्हें याद किया था। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 22/01/2016 - दिल (रक्त परिसंचरण वाला) कभी कुछ नहीं कहता...जो भी कहता है दिमाग (मन) ही कहता है। जब तक बोध न हो तब तक तो मन में विरोधाभासी विचार ही उठते हैं। जहाँ भी चयन का सवाल है वहां हमें बस यह देखना है कि जिस बात को हम सुनने जा रहे हैं उसका व्यापक हित कितना है...और सही निर्णय भावनाओं में बहकर तो कभी नहीं हो सकते। यह तो सिर्फ सजग रहकर ही हो सकते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 26/09/2015 - शब्दों के मनमाने अर्थ और व्याख्याएं नहीं बदल सकते सच्चाईयाँ। जिसे जानना हो सच उसे मन के धरातल पर उतरना पड़ता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • स्वयं का अच्छापन बुरापन दूसरों की दृष्टि से मत नापो। यह मन की दुर्बलता दिखाना है। ~ स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda 
  • मन रूपी राजा की मृत्यु पर इन्द्रियां रुपी सेना स्वत: ही मर जाती है। ~ आराधना सार 
  • मनुष्य का मन यदि किसी चीज की कल्पना या उसमें विश्वास कर सकता है तो वह उसे प्राप्त भी कर सकता है। ~ Napoleon Hill / नेपोलियन हिल 
  • इंसान जितना अपने मन को मना सके उतना ख़ुश रह सकता है। ~ अब्राहम लिंकन / Abraham Lincoln 
  • जो मनुष्य अपने मन का गुलाम बना रहता है वह कभी नेता और प्रभावशाली पुरुष नहीं हो सकता। ~ वाल्तेयर / Voltaire
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Monday, April 17, 2017

Vasant Panchami Essay in Hindi

बसंत पंचमी पर निबंध, ऋतुराज वसंत लेख, प्रेम पत्र. Vasant Ritu Panchami Essay in Hindi. Spring Season Wishes Article, Love Letter to Friends, Speech, Messages.

क्या और कोई विकल्प होता है?

प्यारे दोस्तों,

ऋतुराज बसंत के आगमन की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। मधुमास कई रूपों में प्रेम से जुड़ा है और आज का दिन भी कई लोगों द्वारा भारतीय संस्कृति का प्रेम दिवस कहा जाता है तो फिर आज बात प्रेम पर ही करते हैं। वैसे प्रेम पर बात हर रोज होनी चाहिए। बल्कि हर रोज, हर क्षण प्रेम ही होना चाहिए। इससे सहज और इससे सरल कुछ है ही नहीं पर हमने अपनी कारस्तानियों से इसे सबसे मुश्किल और जटिल बना दिया है।

एक बार एक दोस्त ने कई सम्बंधित प्रतिकूलताओं पर निजी स्वार्थ से परे मेरे सहर्ष स्वीकार भाव को देखते हुए कहा था, ‘तुम इतनी प्यारी क्यों हों?’ उस समय तो मैं बस मुस्कुरा दी थी। लेकिन मन में एक ख़याल उठा कि काश! मैं इस सवाल का जवाब दे पाती। विविध सापेक्षताओं को छोड़ दूँ तो इस प्रश्न के पूर्ण योग्य तो मैं बिल्कुल नहीं। पर सोचिये! इस प्रश्न का सबसे बेहतर जवाब क्या हो सकता है? ‘तुम इतनी प्यारी या तुम इतने प्यारे क्यों हों?’ इस प्रश्न का सबसे बेहतर जवाब हो सकता है - ‘क्या कोई और विकल्प होता है?’ सच! क्या प्रेम के अलावा कोई और विकल्प होता है? बस...बस इसी जवाब तक पहुँचना है हमें कि क्या प्रेम के अलावा कोई और भी विकल्प होता है?

अस्तित्व के पास प्रेम के अलावा कोई और विकल्प था ही नहीं इसलिए उसने हमें सब विकल्प दे डाले। प्रेम को छोड़कर हमने सब विकल्प चुने - हमने ईर्ष्या चुनी, हमने घृणा चुनी, हमने आसक्ति को चुना, लालच, लोभ, तृष्णा...सब कुछ चुना...हमने मित्र चुने, हमने शत्रु चुने, हमने अच्छा और बुरा चुना, सुख और दुःख चुना, ऊंच-नीच चुनी, सम्मान-अपमान चुना...हर कदम पर हमने द्वैत को चुना, तुलना को चुना...बस नहीं चुना तो प्रेम को।

क्यों चुन रहे हैं हम इतना सारा प्रतिरोध? क्यों चुन रहे हैं हम इतना मुश्किल रास्ता? क्यों चुन रहे हैं हम तमाम दुश्वारियां? इस आशा में ही न कि एक दिन सब ठीक होगा? सब ठीक होने के लिए क्या यह सब चुनना पड़ता है?

सब ठीक तो बस इस और इसी क्षण होता है। दरअसल हम सब ठीक को अक्सर चुनते ही नहीं। हाँ, उसकी आशा में सब गलत जरुर चुनते जाते हैं। खैर! बहुत ज्यादा दार्शनिक बातें तो नहीं करुँगी पर हाँ क्या ऐसा नहीं हो सकता कि कुछ भी लिखने से पहले, कुछ भी बोलने से पहले या कुछ भी करने से पहले हम इस बात को अच्छी तरह से देखें कि इसमें प्रेम कितना है और बाकी मिलावट कितनी? मेरे कहने का आशय यह नहीं है कि हमेशा बस रसगुल्ले सी मिठास ही टपकनी चाहिए। कभी सख्ती या तल्खी की जरुरत लगती है तो वो भी ठीक है, लेकिन यह देखना जरुरी है कि क्या इसका आधार वाकई प्रेम है? बात प्रेम, होश और समझ से उठ रही है या आधार कोई कुंठा, ईर्ष्या, भय, अहंकार...आदि वृत्तियाँ हैं?

मुझे लगता है हर रोज कम से कम एक प्रेमपत्र लिखा ही जाना चाहिए। कहाँ, कैसे, किस तरह...मुखर या मौन...प्रकट या अप्रकट...यह हमारा चुनाव! यह पत्र मैंने अपने और आप सबके लिए लिखा है। क्योंकि प्रेम से बहुत दूर आ चुके हैं हम तो चलो! वापस अपने घर लौटते हैं। <3

सप्रेम
पंछी

(01/02/2017)

Sunday, April 16, 2017

Poem on Roti in Hindi

पहली रोटी पर कविता, चपाती शायरी, ऑस्ट्रेलिया का नक्शा. Poem on Roti in Hindi for Kids. First Bread Nursery Rhyme, Childhood Kitchen Memories Poetry, Slogans.

पहली रोटी

याद है मुझे अपनी पहली रोटी!
आधी कच्ची, आधी पक्की
और थी छोटी-मोटी
हाँ, याद है मुझे अपनी पहली रोटी।

छोटे से हाथों में छोटी सी लोई
लेकर चली मैं बनाने रसोई
बड़ा सा बेलन और बड़ा सा चकला
मेरे नन्हें हाथों से बार-बार फिसला।

बेलन ने गिरकर पाँव मेरा तोड़ा
पर मैंने अपना उत्साह न छोड़ा
बनाया था मैंने आस्ट्रेलिया का नक्शा
सिकने तक कर दे ईश्वर इसकी रक्षा।

कहीं से थी पतली, कहीं से थी मोटी
तवे पे रखकर हाथ से पलटी
तवे ने जलाया मेरा नन्हा हाथ
पर मैंने छोड़ा न रोटी का साथ।

चिमटे से पकड़ी और नीचे उतारी
कच्ची-जली रोटी थी बड़ी प्यारी।

Monika Jain 'पंछी'
(22/01/2013)

Feel free to add your memories regarding making and baking of your first roti. :)

Saturday, April 15, 2017

Life Thoughts in Hindi

ज़िन्दगी पर विचार, जीवन सुविचार. Philosophy Based Life Thoughts in Hindi. Attitude Status, Comments, Quotes of The Day, Proverbs, Lines, Slogans, Sms, Messages.


Life Thoughts
  • 13/04/2017 - जीवन को जितना समझती हूँ, मृत्यु भी उतनी ही समझ आ जाती है। आश्चर्य! कि इस टकराव को हम जीना कहते हैं। जीना तो उस दिन ही होगा जब कोई टकराव रहेगा ही नहीं और जीवन होगा नदी की अविरल धारा सा। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 22/02/2017 - जब आप किसी वस्तु, व्यक्ति या किसी से भी से रूबरू होते हैं और अक्सर ही आपके विचार इस दिशा में हो कि इससे क्या फायदा हो सकता है, या यह क्या काम आ सकता है, या इसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं, या प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह की कोई उम्मीद या अपेक्षा रहती है तो यह बहुत अधिक व्यापारी मस्तिष्क को इंगित करता है। इतनी सौदागिरी जीवन से बहुत दूर ले जाती है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 16/12/2016 - अब तो जीना सीख लें हम, कब तक कभी इसके और कभी उसके लिए मरते रहेंगे। एक दिन तो वैसे ही मरना है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 16/12/2016 - हर मृत्यु एक सन्देश है और यह सन्देश है जीवन का। जो मृत्यु को स्वीकार करके चल सकता है वास्तव में वही तो जी सकता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 05/01/2017 - मनुष्य जीवन की सार्थकता इसी में है कि हम मनुष्य होने के भाव से ऊपर उठ सकें। उससे पहले स्त्री स्त्री होने के भाव से और पुरुष पुरुष होने के भाव से...लेकिन यहाँ तो अभी तक कपड़ा पुराण ही चल रहा है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 20/01/2016 - जीते जी कोई पूछता तक नहीं...मरने के बाद भगवान बना देते हैं लोग। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 20/01/2017 - हमने सदा लहरों को जीवन समझा और गहरे सागर को भूल गए। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 07/10/2016 - मरने से पहले...जी लेना चाहिए। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • जीवन हमारे लिए क्या लेकर आएगा...यह भले ही हम तय न कर सकें, लेकिन उसका स्वागत हम कैसे करेंगे यह तय करना हमारे हाथ में है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • असंतुष्टि और सुस्मृति भूत की, संचय और भय भविष्य के, वर्तमान कहीं नदारद है। जो वर्तमान में जीना आ जाता तो सही मायनों में जीना आ जाता। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • कभी-कभी जीने के लिए अपने भीतर बहुत कुछ मारना होता है। क्यों ऐसे गुनाहों की सजा भी मिलती है जो हमने किये ही नहीं होते? ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 20/07/2015 - दुनिया नहीं जीने देती। अगर संघर्षों, मुश्किलों, ग़मों, तकलीफों, दर्द और तन्हाईयों के विशाल सागर से घिरे होते हुए भी आपको मुस्कुराना, चहकना और खिलखिलाना आ जाता है, तो बहुत सम्भावना है कि आपकी तकलीफों को नाटक करार दे दिया जाएगा। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 15/03/2015 - ज़िन्दगी तो बार-बार आवाज़ देती है - यह तुम्हारे लिए नहीं है, नहीं है, नहीं है...बिल्कुल भी नहीं है। पर हम बाहरी दुनिया के शोर में ज़िन्दगी की आवाज़ को अनसुना कर बैठते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 05/06/2016 - जीवन का उद्देश्य ही यह जान लेना है कि जीवन का कोई उद्देश्य नहीं, वह सिर्फ जीवन है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 15/06/2016 - ज़िन्दगी की दाल में मीठे नीम सी वह...अलग होना उसकी नियति थी। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 17/06/2016 - जरा सी दुनिया और जीवन के प्रति आसक्ति बढ़ी नहीं कि एक तमाचा इंतजार कर रहा होता है...और फिर? फिर क्या...मोह भंग! ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • कभी-कभी जिंदगी में सबसे आसान सवाल ही जवाब देने में सबसे मुश्किल लगने लगते हैं. ~ Monika Jain ‘पंछी’
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Thursday, April 6, 2017

Meditation Quotes in Hindi

ध्यान, होश, जागरूकता, भक्ति, समर्पण, एकाग्रता विचार. Meditation Quotes in Hindi. Awareness Sayings, Devotion Status, Dedication Slogans, Concentration Sms.

Meditation Quotes
  • 22/02/2017 -...कि जब उसे घास लाने को कहा गया और वह देर तक नहीं लौटा तो उसकी खोज शुरू हुई। वह घास के मैदान में मिला। उससे जब कारण पूछा गया तो उसने कहा, 'मैं घास हो गया था।'...मतलब कितने निर्दोष से किस्से हैं...आँखें भीग जाती हैं...मुस्कुराहट दौड़ कर होठों पर तैरने लगती है। कुछ बेहद जरुरी...नहीं बेहद नहीं...सबसे जरुरी याद आ जाता है। उस दिन मैंने जिक्र किया था न?...कि कृष्णमूर्ति पूछते हैं - क्या आपने कभी किसी पेड़ को देखा है? पेड़ को देखने के लिए पेड़ हो जाना पड़ता है...हाँ, पेड़ ही हो जाना पड़ता है...और कोई उपाय ही नहीं। :) ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 18/01/2017 - अपरिचित में भी चिर परिचित का दर्शन यही तो प्रेम (सुमिरन) है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 21/01/2017 - कृत्य चाहे कोई भी हो उससे कुछ हिंसा तो होगी ही। मुख्य बात यह है कि वह कृत्य हमारे अहंकार से उपजा है या फिर हमारे होश, समर्पण और ध्यान से। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 18/12/2016 - सामान्यत: हर चीज का कारण तो होता है लेकिन उस कारण का भी कारण खोजते-खोजते-खोजते-खोजते ...वह हमेशा अकारण तक ही पहुँचता है। ईश्वर उस अकारण से भिन्न और क्या है? जिसमें सारे कारण विलय हो जाते हैं। और भक्ति, प्रेम, ध्यान? वह बस उस अकारण के प्रति समर्पण और अपने ईश्वरत्व को उपलब्ध हो जाने का मार्ग है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 15/11/2016 - भक्ति तो सहज ध्यान है, लेकिन जो सबसे सहज है उसके लिए ही हम सहज नहीं। इस समूचे अस्तित्व के प्रति समर्पण ही भक्ति है लेकिन हमारा अहंकार समर्पण नहीं करना चाहता। 'भक्त' शब्द व्यंग्य के रूप में बहुत प्रचलित है यहाँ।...पर सच यह भी तो है कि हमारे सारे प्रयास अनजाने में ही सही उस आनंद की खोज में ही है जो 'भक्त' को प्राप्त है। बात बस इतनी सी है कि जब तक प्रयास है भक्त हो जाना मयस्सर ही नहीं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 23/02/2017 - I don’t want god to be always with me, rather I want to be always with god. ईश्वर (परम तत्व) को अपने अनुकूल बनाने से कई बेहतर है...परम तत्व के अनुकूल बन जाना। हम परम तत्व को निर्देश न दें, बल्कि उससे निर्देश लें। यही तो भक्ति है, यही तो प्रार्थना है...और यही तो है ध्यान। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 11/09/2016 - सहज भक्ति/प्रेम/ध्यान को उपलब्ध हो जाना...इससे बड़ी उपलब्धि और क्या हो सकती है? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 10/09/2015 - सारी समस्यायों का कारण ध्यान (एकाग्रता) है। सारी समस्यायों का समाधान भी ध्यान (होश) ही है। निर्भर करता है ध्यान कहाँ लगाया जा रहा है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 22/10/2015 - जब हम किसी कार्य को पूरी तरह समर्पित होकर करते हैं (खुद को पूरी तरह भुलाकर) तो जो परिणाम आता है वह इतना अप्रत्याशित होता है कि कर्ता को विश्वास ही नहीं होता कि यह काम उसने किया है। मनुष्य की क्षमताओं के रास्ते का सबसे बड़ा बाधक उसका 'मैं' ही होता है। इसलिए सफलता हो, प्रेम हो, चाहे मुक्ति...समर्पण पहली शर्त है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 16/10/2016 - कुछ लोग कहते हैं दिल (करुणा) को सुनना चाहिए।
    और कुछ कहते हैं दिमाग (प्रज्ञा) को सुनना चाहिए।
    समस्या किसे सुनना चाहिए यह नहीं है। समस्या दिल और दिमाग के अलग-अलग (द्वंद्व) होने की है। जैसे-जैसे प्रज्ञा और करुणा एक होते जायेंगे, हम जो भी सुनेंगे सही सुनेंगे। :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • चाहे आप में कितनी ही योग्यता क्यों ना हो, केवल एकाग्र चित्त होकर ही आप महान कार्य कर सकते हैं। ~ बिल गेट्स / Bill Gates 
  • पार्श्व गायन केवल आवाज़ का मामला नहीं है, एक अर्थपूर्ण और सफल गीत के लिए हमें दिमाग, शरीर, दिल और आत्मा से काम करना पड़ता है। ~ मुकेश, प्रसिद्ध गायक / Mukesh
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Tuesday, February 21, 2017

Poem on Smile in Hindi

मुस्कुराहट पर कविता, मुस्कान शायरी. Poem on Smile in Hindi. Falling in Love with a Book Writer Poetry, Smiling while Reading Rhymes, Infatuation Lines, Picture.
तुम और मुस्कुराहट

किताब के पन्ने पलटते
तुम्हारे शब्दों को पढ़ते
तुम्हारी भावनाओं को महसूस करते
और तुम्हारी संवेदनाओं को जीते…
एक दिन कब अचानक नज़र
किताब के पीछे बने
तुम्हारे अक्स पर जा टिकी
पता ही न चला।

कि आसान होता है
तस्वीरों को देर तक निहारना।
कि आसान होता है
तस्वीरों को अपना
हाल-ए-दिल सुना देना।
कि आसान होता है
तस्वीरों को चूम लेना भी...
और आसान होता है
उन्हें सीने से लगा लेना।

पर मेरे लिए इनमें से कुछ भी
आसान कहाँ था?
आसान था कुछ तो वो था
बस मुस्कुरा देना
और मुस्कुराते-मुस्कुराते
तुम्हारी किताब के कुछ पन्ने
और पलट देना।

Monika Jain ‘पंछी’
(20/02/2017)

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Saturday, February 18, 2017

Inspirational Story in Hindi

प्रेरणादायक कहानी, प्रेरक प्रसंग, जिम्मेदारी. Inspirational Story in Hindi. Sardar Vallabhbhai Patel Life Incident. Responsibility, Duty, Will Power Tales.
Inspirational Story in Hindi

(1)

फर्ज

वकालत के दौरान सरदार पटेल के पास हत्या का एक बेहद उलझा हुआ केस आया। मुकदमे को अपने हाथ में लेने से पहले सरदार पटेल ने बहुत सोचा और जब उन्हें यह भरोसा हो गया कि आरोपी बेगुनाह है तो उन्होंने मुकदमा अपने हाथ में ले लिया। पैरवी में हुई छोटी सी भूल भी आरोपी को फांसी दिला सकती थी इसलिए उन्होंने आरोपी को बचाने के लिए दिन-रात एक कर दिए।

एक दिन जब इस विषय पर महत्वपूर्ण बहस चल रही थी और फैसला इसी बहस पर टिका था और सरदार पटेल बहस में व्यस्त थे, तभी उनके नाम से एक तार आया। सरदार पटेल ने तार पढ़ा तो उनके चेहरे पर दुःख के भाव साफ-साफ नजर आने लगे। उन्होंने तार को वापस अपनी जेब में रख लिया और फिर बहस करने लगे।

जब मुक़दमे की बहस खत्म हो गयी तो उनके एक साथी ने उनसे उस तार के बारे में पूछा। सरदार पटेल ने बताया कि उनकी पत्नी की मृत्यु हो गयी है और इसी का समाचार उस तार में था। सरदार पटेल का जवाब सुनकर सब हैरान रह गए। उनके करीबी मित्र ने उनसे पूछा, ‘तुमने बहस जारी क्यों रखी?’ सरदार पटेल ने कहा, ‘वह दुनिया छोड़ चुकी थी, मैं अगर बहस छोड़ देता तो एक बेगुनाह को फांसी हो जाती। मुझे बहस जारी रखना ही सही लगा। यही मेरा फर्ज था।’

Source - Unknown

(2)

सच्ची लगन

नॉर्वे में एक रईस रहता था जिसका नाम फलेरा था। उसके यहाँ एंटोनियो नाम का एक नौकर काम करता था। पास ही में एक मूर्तिकार की दूकान थी। एंटोनियो को जब भी खाली समय मिलता वह मूर्तिकार की दूकान के पास खड़ा होकर मूर्तियाँ बनते हुए देखता था। उसे मूर्तियों की काफी कुछ समझ आ गयी थी और वह कभी-कभी वहां कार्य कर रहे कारीगरों की मदद भी कर देता था।

एक दिन दुकानदार ने कहा, ‘यहाँ आकर तुम अपना समय क्यों नष्ट करते हो?’ एंटोनियों बोला, ‘मुझे यहाँ आकर मूर्तियाँ बनते देखना अच्छा लगता है।’ इस तरह उसका आना निरंतर जारी रहा।

एक बार मालिक फलेरा के यहाँ दावत थी। भोजन स्थल की सजावट का कार्य मुख्य बैरे को सौंपा गया था लेकिन उससे सजावट का कार्य सही ढंग से नहीं हो पा रहा था। वह परेशान हो गया। उसे परेशान देखकर एंटोनियो ने कहा, ‘अगर तुम चाहो तो मै तुम्हारी मदद कर सकता हूँ।’ बैरे ने हामी भर दी।

एंटोनियों ने सबसे पहले बाज़ार से मक्खन मंगवाया। जमे हुए मक्खन से उसने चीते की एक आकर्षक मूर्ति बनायीं और उसे दावत स्थल के बीचोंबीच मेज पर सजा दिया। सभी मेहमानों ने मूर्ति की बहुत तारीफ की। उन्हीं मेहमानों में से एक व्यक्ति मूर्तिकला विशेषज्ञ था। उसे जब यह मालूम चला कि यह मूर्ति एक सामान्य से नौकर ने बनायी है तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा। उसने हैरान होकर एंटोनियो से पूछा, ‘तुमने मूर्तिकला का प्रशिक्षण कहाँ से लिया?’ एंटोनियो ने जवाब दिया, ‘पास की ही दूकान पर वह रोज मूर्तियाँ बनते हुए देखता है। बस वहीँ से उसे प्रेरणा मिली।’

Moral : लगन, निष्ठा, समर्पण और इच्छाशक्ति हमें कुछ भी सिखा सकती है और हर कार्य में सफलता दिला सकती है।

Source - Unknown

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Thursday, February 16, 2017

Laghu Kahani in Hindi

जीवनदान लघु कहानी, डरावना सपना. Save Animals Story in Hindi. Giving Boon of Life to Birds, Insects. Horrible Dream, Reality, Mask, Double Standard Tales.
Laghu Kahani in Hindi

(1)

प्रेम की कमी...

आजकल आसपास चल रहे व्यक्ति को दूर से ही आगाह कर देती हूँ कि यहाँ एक कीड़ा चल रहा है, इस पर पाँव नहीं रख देना। क्योंकि कभी-कभी ऐसा होता है कि कुछ काम करते समय या पढ़ते समय किसी कीड़े को आसपास चलता हुआ देखती हूँ और कोई भी व्यक्ति आसपास चल रहा होता है तो मन में एक अंदेशा हो जाता है उस पर आये ख़तरे को लेकर। जब निश्चिन्त हो जाती हूँ कि चल रहा व्यक्ति इधर नहीं आ रहा है तो फिर अपने काम में लग जाती हूँ। लेकिन कुछ ही देर बाद मेरी आशंका सच सिद्ध हो जाती है। एकदम वह व्यक्ति वहां से गुजर जाता है और अनजाने में उस कीड़े को कुचलकर चला जाता है।

कुछ दिनों पहले भी तो ऐसा ही हुआ था। वह दिवाली की सफाई में व्यस्त थी। छत पर बने कमरे से बाहर वाश बेसिन के ऊपर वाली ताक में चिड़िया कई दिनों से घोंसला डालने में जुटी थी। आज जब वह सफाई करने को आई तो उस घोंसले को उठाकर बाहर डालने लगी। चिड़िया आसपास कहीं नहीं थी लेकिन अचानक मुझे ख़याल आया - क्या पता इसमें अंडे हों तो मैं भीतर से टेबल ले लायी। उसने टेबल पर चढ़कर देखा तो उसे कोई अंडा नजर नहीं आया। पर घोंसला लगभग पूरा तैयार था तो मैंने कहा, ‘हम अगर इसे फेंक देंगे तो चिड़िया फिर अंडा कहाँ देगी? और इतनी जल्दी घोंसला कैसे बनाएगी? और फिर थोड़े ही दिनों की तो बात है।’ यूँ वह जीवों के प्रति संवेदनशील है, लेकिन कचरे की समस्या तो सफाई करने वाला ही जानता है, इसलिए हमेशा संवेदना को बरक़रार भी नहीं रखा जा सकता। उसने एक पल सोचा और फिर कहा, ‘और भी तो बहुत सी जगह हैं बनाने के लिए।’ और ऐसा कहकर उसने घोंसला उठा लिया।

कुछ ही देर बाद एक छोटा सा अंडा लुढ़ककर नीचे आ गिरा और फूट गया। वह अचंभित हुई। अंडा उसे दिखा नहीं था और किसी छेद से निकलकर शायद फर्श पर पहले से पड़ा था या उठाने के दौरान चला गया था। उसे इस जीव हत्या पर बहुत पछतावा हो रहा था। पता नहीं क्यों उस दिन मुझे उस फूटे हुए अंडे को देखकर तो कोई विचलन या दुःख नहीं हुआ। मुझे उसकी मृत्यु स्वीकार्य थी पर भीतर आकर बस यही ख़याल आया कि अभी मेरे भीतर का प्रेम बहुत कम है, वरना वह उस जीवन को बचा पाने में जरुर सफल होता।

By Monika Jain ‘पंछी’
(01/10/2016)

(2)

सपने की हकीकत

कल रात मैंने एक अजीब सा सपना देखा - मैं एक शांत, सुव्यवस्थित और बड़े ही मनोहर से शहर के बीचों-बीच खड़ी थी। कई सभ्य, शालीन और सुसंस्कृत से दिखाई पड़ने वाले लोगों की बैठके जगह-जगह चल रही थी। उनमें से एक समूह अहिंसावादियों का था, जहाँ अहिंसा के महत्व को समझाया जा रहा था। एक समूह नारीवादियों का था, जो नारी स्वतंत्रता, सम्मान और सुरक्षा पर चर्चा कर रहा था। एक समूह धार्मिक साधु, संतों और सन्यासियों का था जो धर्म, त्याग, मोक्ष, तप और ब्रह्मचर्य आदि विषयों पर चिंतन-मनन कर रहा था और एक समूह भ्रष्टाचार के उन्मूलन के उपायों पर विमर्श कर रहा था। ऐसे ही कई समूह थे जिनमें कई अच्छे-अच्छे विषयों पर चर्चाएँ चल रही थी।

मैं बहुत खुश थी। क्योंकि दुनिया एक बेहतर जगह बन रही थी। धीरे-धीरे शाम होने लगी, अँधेरा गिरने लगा। मुझे टक-टक सी कुछ गिरने की आवाजें आने लगी। ध्यान से देखा तो मालूम चला बहुत सारे मुखौटे जमीन पर गिर रहे थे। ये सब मुखौटे उन सभ्य और शालीन लोगों के चेहरों से मिल रहे थे जिन्हें मैंने दिन में देखा था। चारों ओर नज़र दौड़ाई तो देखा वह शहर एक भयानक जंगल में तब्दील हो चुका था और वे सभ्य और शालीन से दिखने वाले लोग खूंखार भेड़ियों में।

एक तरफ एक अहिंसावादी किसी की निर्मम हत्या करके उसका खून पी रहा था। दूसरी ओर एक नारीवादी एक औरत को बेरहमी से पीट कर उसका बलात्कार कर रहा था। पास ही में एक भ्रष्टाचार विरोधी पैसों से भरा एक सूटकेस छिपाने के लिए जमीन में एक गड्डा खोद रहा था, जो अभी-अभी उसे कोई देकर गया था। और एक धर्म गुरु शराब और अफीम के नशे में धुत होकर कई लड़कियों के साथ अय्याशी कर रहा था।

अचानक मेरी आँख खुली। मैं पसीने से लथपथ और बहुत घबराई हुई थी। मेरे जीवन का यह सबसे भयानक सपना था जो दुर्भाग्य से इस दुनिया की हकीकत भी है।

By Monika Jain ‘पंछी’
(12/10/2013)

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Wednesday, February 15, 2017

Question and Answer in Hindi

सवाल जवाब, प्रश्न उत्तर. Question Answer Conversation between Girl and Boy in Hindi. Friends Query Sms, Problem Solution Status, Doubt Messages, Quotes.

Questions and Answers

(1)

Question : आप जीवों से बहुत प्रेम करती हैं। प्रेम में एक नॉन वेजीटेरियन से शादी के बारे में क्या ख़याल हैं आपका?

Answer : शादी खुद ही एक बहुत बुरा ख़याल है :p...बड़ी वाली हिंसा...सो कैंसिल। :D बाकी जब प्यार करते समय वेज-नॉनवेज नहीं देखते, दोस्ती करते समय नहीं देखते, तो फिर शादी कौनसे खेत की मूली है? बस दोनों ओर से थोड़ी अधिक अंडरस्टैंडिंग की जरुरत है। वैसे एक दोस्त था जिससे बाद में मैंने शादी के बारे में भी सोचा था। वह एक बंगाली, परिवर्तित क्रिश्चियन व नॉन वेजीटेरियन ही था। यह बात अलग है कि वह नॉनवेज खाता है इस बात का पता मुझे तब चला जब किसी ने उसे खाने को साथ चलने को कहा तो वह नहीं गया और उसने बताया कि कुछ महीनों से उसने खाना छोड़ दिया है। मैंने कारण पूछा तो उसने कहा, ‘क्योंकि तुम नहीं खाती हो।’ उस समय तो मैंने उसे यही कहा कि जो तुम्हारा दिल कहे सिर्फ वो करना, किसी भी बेवजह के दबाव में नहीं। लेकिन आज भी यही लगता है कि अगर कोई बचपन से संस्कारित है तो उससे जबरदस्ती नहीं छुड़वाया जा सकता। वह किसी दबाव में छोड़ भी दे लेकिन अगर उसके मन में इच्छा शेष है तो यह संस्कार किसी और रूप में निकलेगा, लेकिन निकलेगा जरुर। सिर्फ प्रेम ही काम कर सकता है और कुछ नहीं। वह भी प्रेमी या प्रेमिका के लिए छोड़ने (यह भी अच्छा ही है) से अधिक बेहतर है कि पशु-पक्षियों और खुद के प्रेम में छोड़ा जाए। 

(2)

Question : जब सब बुद्ध हो जायेंगे तो क्या होगा?

Answer : यह सवाल नहीं होगा और क्या? :) 

(3)

Question : आप टीवी नहीं देखती, गाने नहीं सुनती, मूवीज नहीं देखती, न्यूज़ पेपर नहीं पढ़ती...etc...etc...तो आप करती क्या हैं?

Answer : मैं दिन में भी तारे देखती हूँ। (जोक्स अपार्ट) मुझे अपने साथ रहना अच्छा लगता है। मैं अपने साथ बोर नहीं होती। :p बाकी तो और भी लाखों काम है ज़माने में टीवी, मूवी के सिवा। :)

(4)

Question : What’s the aim of your life?

Answer : To be aimless. :)

(5)

Question : तुम इतनी प्यारी क्यों हों?

Answer : क्या कोई और विकल्प होता है?

(6)

Question : आप एक लड़की हैं, आपको कई अजीबोगरीब मैसेज आते होंगे। कोई परेशानी नहीं होती?

Answer : व्यक्ति को अगर यह समझ आ जाए कि उसे कब और क्या पढ़ना है-नहीं पढ़ना है, सुनना है-नहीं सुनना है, देखना है-नहीं देखना है, बोलना है-नहीं बोलना है, महसूस करना है-नहीं करना है, कुछ करना है-नहीं करना है...और इन सबसे आगे बढ़कर उसे सिर्फ साक्षी या दृष्टा बनना आ जाए तो उसे दुनिया में कुछ भी परेशान नहीं कर सकता। उसकी गर्दन काटी जा रही हो यह भी नहीं। मैं हूँ तो नहीं ऐसी। लेकिन बहरहाल अजीबोगरीब मैसेजेज के लिए समझ आ गया कि वे न अजीब हैं और न ही गरीब हैं, वे सिर्फ मैसेजेज हैं। हाँ, कभी-कभी कोई कार्यवाही करना जरुरी हो तो की जानी चाहिए।

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Thursday, February 9, 2017

Essay on Social Evils in Hindi

समाज सुधार पर निबंध, सामाजिक समस्या लेख. Hindi Essay on Social Evils in Our Society. Reforms Article, Movement Speech, Problems of India Paragraph, Issues. 
Essay on Social Evils in Hindi

सुधार बनाम मानसिकता

(1)

यहाँ हम घर में कुल तीन सदस्य हैं। जब कभी भी घर में किसी को बर्तन साफ़ करने के लिए रखा जाता है तब भी मम्मी और मेरा ख़याल हमेशा यही रहता है कि बर्तन कम से कम हो। अभी जो आती हैं, वे बुजुर्ग हैं तो थोड़ा एक्स्ट्रा ख़याल रहता है। उनका मेहनताना, समय-समय पर दी जाने वाली खाने-पीने की चीजें और पहनने के कपड़े देना ये सब तो बहुत आम सी बातें हैं। मुझे जो चीज अच्छी लगती है वो है मम्मा द्वारा बराबर उनका हालचाल और परेशानियाँ पूछते रहना। उनका हल बताते रहना। एक दिन बर्तन साफ़ करते समय उनके हाथों में हल्की सी खरोंच आ गयी तो मम्मा अपने हाथों से उनको दवाई लगा रही थी और पट्टी बाँध रही थी। मैं सीढ़ियों से नीचे आ रही थी। बात तो यह भी मामूली सी थी लेकिन पता नहीं क्यों उस दृश्य में अद्भुत सा सम्मोहन था। दोनों के एक्सप्रेशन्स देखते ही बनते थे। जैसे माँ-बेटी हों। मेरी आँखें ऐसे दृश्यों के लिए कैमरे का काम करती है। :) कभी-कभी सोचती हूँ : क्रांति और सुधार के हौव्वे से इतर सभी को कितनी छोटी-छोटी सी चीजों को समझ लेने की जरुरत भर है।

Monika Jain ‘पंछी’
(23/01/2017)

(2)
 
 एक बात जो अक्सर सोचती हूँ कि अच्छे लोग भी हैं, समाज सुधारक भी हैं, फिर भी सुधार हमेशा इतना ज्यादा वक्त क्यों लेते हैं? कुछ अच्छा जल्दी से नज़र क्यों नहीं आता? आदर्श स्थायी क्यों नहीं होते? परिवर्तन इतना बलिदान क्यों चाहता है?

अपने अनुभव से बस इतना ही जान पायी हूँ कि बुराई में प्राय: मतभेद नहीं होते, बुराई की ओर ज्यादातर लोगों का आकर्षण होता है और वो आसानी से विस्तार भी पा लेती है। जो बहुत लालची है, उसके चोर बनने की गुंजाईश हमेशा रहती है। जो क्रूर है, उसके हत्यारा बनने का रास्ता भी खुला है। जिसके मन में नारी के लिए सम्मान नहीं, कल को वो बलात्कारी बन जाए तो आश्चर्य नहीं।

लेकिन अच्छाई का आकर्षण कम है। उसका विस्तार भी कुछ अपवादों को छोड़कर नहीं हो पाता। फिर हर व्यक्ति के लिए इसकी अलग-अलग परिभाषाएं हैं, भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण है। जो सुधार चाहते हैं उनमें मतभेद भी बहुत ज्यादा मिलते हैं। वे कब मनभेद बनकर उन्हें एक दूसरे के ही विरुद्ध खड़ा कर दे पता नहीं चलता। सुधार की इच्छा रखने वालों में अहंकार भी कम नहीं होता। अपना नाम उन्हें बड़ा प्रिय होता है। किसी भी सुधार को हमेशा सुधार चाहने वालों का ही विरोध सबसे पहले झेलना पड़ता है। ये मनभेद, ये अहंकार ही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है। मतभेदों का तो कोई विकल्प है ही नहीं, पर मनभेद, अहंकार और यश की चाह पर विजय पाना बहुत जरुरी है। सुधार के रास्ते में ये ही हमारे सबसे बड़े दुश्मन है और हमेशा रहेंगे।

Monika Jain 'पंछी'
(01/03/2013)

(3)

मौत दामिनी की नहीं हुई है, मौत हुई है इंसानियत की। वह इंसानियत जो आज हर गली, हर चौराहे, हर नुक्कड़, हर घर और हर दिल में दम तोड़ती नज़र आ रही है। मैंने कई बार पढ़ा है कि मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी है और मानव जीवन बहुत दुर्लभ है जो 84 हजार योनियों में भटकने के बाद मिलता है। लेकिन यदि यह तथाकथित सभ्य मानव समाज ऐसा है तो नहीं चाहिए ऐसा दुर्लभ मानव जन्म!

दामिनी के साथ जो हुआ वह सम्पूर्ण मानव जाति को शर्मसार करता है...लेकिन मेरी सोच और समझ से बाहर है वे बलात्कार की घटनायें जो अभी भी बदस्तूर जारी है। पिता का बेटी के साथ दुष्कर्म, पड़ोसी का पड़ोसी के साथ दुष्कर्म, 6 महीने की बच्ची का बलात्कार ...क्या हो गया है लोगों को? दो पल की भूख के लिए किसी की जिंदगी नर्क से भी बद्दतर बना देने में नहीं हिचकते।

एक छोटी मासूम सी बच्ची जिसे देखकर सिर्फ ममता उमड़नी चाहिए उसे भी अपनी दरिंदगी का शिकार बना देने वाले लोग कौनसी दुनिया के हैं? और वो लोग जो ईश्वर को सर्वशक्तिमान मानते हैं उनका ईश्वर कहाँ छिपा है?

कई लोगों से बहस होती है मेरी इस बात को लेकर कि दुनिया ईश्वर ने बनाई है और जो भी होता है ईश्वर की मर्जी से होता है...उन सभी लोगों से पूछना है मुझे ...क्या वो ईश्वर कहलाने लायक है जिसकी मर्जी से ये सब हो रहा है? लोगों के कुतर्कों की फिर भी कमी नहीं...कहेंगे कि पापों का फल भुगतना पड़ता है। मगर मुझे कोई ये समझाए कि अगर ईश्वर में इतनी ताकत है कि वह किसी के पापों का फल दे सकते हैं तो फिर उनमें क्या इतनी शक्ति नहीं कि वह पाप होने ही न दे? ईश्वर ऐसा कभी हो ही नहीं सकता। सच तो यह है कि हम इंसान कहें जाने वाले लोग अपनी करतूतों को छिपाने के लिए ऐसे ही घटिया तर्कों का इस्तेमाल करते हैं और जब तक हमारी मानसिकता ऐसे ही संकीर्ण विचारों के इर्द गिर्द घूमेगी तब तक कुछ भी नहीं बदल सकता...कुछ भी नहीं।

Monika Jain 'पंछी'
(29/12/2012)

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Thursday, January 26, 2017

Moral Thoughts in Hindi

नैतिक विचार, नैतिकता उद्धरण. Moral Thoughts in Hindi for Students. Ethical Education Status, Morality Quotes, Slogans, Messages, Sms, Sayings, Lines, Proverbs.

Moral Thoughts

  • विजय आवश्यक नहीं है, किन्तु सत्य परायण होना मेरे लिए आवश्यक है। सफलता आवश्यक नहीं है, किंतु जो प्रकाश मुझे प्राप्त है, उसका अनुकरण करना मेरे लिए आवश्यक है। ~ अब्राहम लिंकन / Abraham Lincoln
  • बिना किसी दंड और शस्त्र के पृथ्वी को जीतना चाहिए। ~ अंगुतर निकाया / Anguttara Nikaya
  • वह विजय स्थिर नहीं है जो पराजय में बदल जाए। श्रेष्ठ विजय कभी पराजय में नहीं बदलती। ~ जातक कथा
  • चुनौतियाँ स्वीकार करें, तभी आप विजय के हर्ष का आनंद उठा सकेंगे। ~ जॉर्ज एस पैट्टोन / George S Patton
  • वास्तविक कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है। केवल कल्पनात्मक कठिनाइयों को ही पराजित नहीं किया जा सकता। ~ जेम्स एलन / James Allen
  • स्वयं से लड़े, बाहरी दुश्मन से क्या लड़ना? स्वयं पर विजय पाकर आनंद मिलता है। ~ महावीर / Mahavira
  • यदि आपने अपनी मनोवृत्तियों पर विजय प्राप्त नहीं की तो मनोवृत्तियां आप पर विजय प्राप्त कर लेंगी। Napoleon Hill / नेपोलियन हिल
  • स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेना सर्वश्रेष्ठ और महानतम विजय है। ~ प्लेटो / Plato
  • नरम शब्दों से सख्त दिलों को जीता जा सकता है। ~ सुकरात / Sukrat
  • समय कभी प्रतीक्षा नहीं करता। ~ प्रसिद्ध कथन
  • मुझे यह लगता है कि समय सभी चीजो को परिपक्व कर देता है, समय के साथ सभी चीजे उजागर हो जाती है, समय सत्य का प्रणेता है। ~ अज्ञात / Unknown
  • समय बर्बाद करें और अपने भविष्य को भी बर्बाद होता देखें। ~ बी सी फ़ोर्ब्स / B C Forbs
  • चाहे वह आपका सबसे अच्छा समय हो या सबसे खराब, हमारे पास केवल और केवल समय ही होता है। ~ आर्ट बचवाल्ड / Art Buchwald
  • बीत चुके समय को आप बदल नहीं सकते, भविष्य अभी भी आपके हाथ में है। ~ एच व्हाइट / H White
  • मुझे आने वाले कल का भय नहीं है क्योंकि मैंने बीता हुआ कल देखा है और मुझे आज से प्यार है। ~ William Allen White / विलियम ए. व्हाइट
  • जो अपने वक्त का सबसे अधिक दुरूपयोग करते हैं वें ही वक्त की कमी की सबसे अधिक शिकायत करते हैं। ~ ब्रूयर / Bruyere
  • समय और धैर्य सबसे शक्तिशाली योद्धा है। ~ लियो टालस्टाय / Leo Tolstoy
  • इंतजार मत करो। सही समय कभी नहीं आता। ~ Napoleon Hill / नेपोलियन हिल
  • आपका समय सीमित है, इसलिए इसे किसी और की जिंदगी जी कर व्यर्थ मत करिए। बेकार की सोच में मत फंसिए, अपनी जिंदगी को दूसरों के हिसाब से मत चलाइये। औरों के विचारों के शोर में अपनी अन्दर की आवाज़ और अंतर्ज्ञान को मत डूबने दीजिये। ~ स्टीव जॉब्स / Steve Jobs
  • बिस्तर पर चिंताओं को ले जाना, अपनी पीठ पर गठ्ठर बांधकर सोना है। ~ थॉमस सी हेलिबर्टन / Thomas C Haliburton 
  • हर सुबह मैं पंद्रह मिनट अपने मस्तिष्क में प्रभु की भावनाएं समाहित करता हूँ, इस तरह चिंता के लिए इसमें कोई स्थान रिक्त नहीं रहता। ~ एच सी क्रिस्टी / Howard Chandler Christy
  • बाहरी एकांत वास्तविक नहीं है। मन में चिंता और शंका का प्रवेश न हो तभी एकांत माना जाए। ~ आविस / Avis
  • अगर तुम्हे नींद नहीं आ रही तो उठो और कुछ करो बजाय लेटे रहने और चिंता करने के। नींद की कमी नहीं चिंता तुम्हे नुकसान पहुँचाती है। ~ डेल कारनेगी / Dale Carnegie
  • समस्या होने पर हमें कार्यवाही की ओर जाना चाहिए, अवसाद की ओर नहीं। ~ पाउलो कोएलो / Paulo Coelho
  • सभी चिंताओं का परित्याग कर निश्चिन्र हो जाना ही उचित है। ~ वेदव्यास / Ved Vyas
  • हमारी पीढ़ी के सबसे बड़े आदमी की यह आकांक्षा रही है कि प्रत्येक आँख के प्रत्येक आंसू को पोंछ दिया जाये। ऐसा करना हमारी शक्ति से बाहर हो सकता है, लेकिन जब तक आंसू हैं और पीड़ा है, तब तक हमारा काम पूरा नहीं होगा। ~ जवाहरलाल नेहरु / Jawaharlal Nehru
  • प्रश्न पूछने वाला छात्र पांच मिनट के लिए मूर्ख रहता है, लेकिन प्रश्न न पूछने वाला जीवन भर मूर्ख ही रहता है। ~ चीनी कहावत / Chinese Proverb
  • जहाँ अनुकरण है, वहाँ सिर्फ दिखावट होगी। जहाँ खाली दिखावट है वहाँ कोरी मुर्खता होगी। ~ जॉनसन / Johnson 
  • मुर्ख व्यक्ति की समृद्धि से समझदार व्यक्ति की मुफलिसी ज्यादा अच्छी होती है। ~ एपिक्यूरस / Epicurus 
  • मुर्ख व्यक्ति खुद को बुद्धिमान मानता है जबकि बुद्धिमान खुद को मुर्ख मानता है। ~ विलियम शेक्सपीयर / William Shakespeare
  • बुद्धिमान व्यक्तियों की सलाह की आवश्यकता नहीं होती है और मुर्ख लोग इसे स्वीकार नहीं करते हैं। ~ बेंजामिन फ्रेंकलिन / Benjamin Franklin
  • अज्ञानी होना उतना शर्मनाक नहीं है, जितना कुछ न सीखने की भावना रखना है। ~ बेंजामिन फ्रेंकलिन / Benjamin Franklin
  • अज्ञानी आदमी के लिए ख़ामोशी से बढ़कर कोई चीज नहीं और अगर उसमें यह समझने की बुद्धि है तो वह अज्ञानी नहीं रहेगा। ~ शेख सादी / Sheikh Saadi 
  • यदि हम चाहते हैं कि हमें कोई चस्का लगे, जो प्रत्येक दशा में हमारा सहारा हो और जो जीवन में हमें आनंद और प्रसन्नता प्रदान करें, उसकी बुराइयों से हमें बचाएं, हमें चाहिए कि हम पढ़ने का चस्का लगायें। ~ आचार्य रामचंद्र शुक्ल / Acharya Ramchandra Shukla
  • ऐसे लोगों को खोजना आसान है, जो स्वेच्छा से मरने को तैयार हो जायेंगे। लेकिन ऐसे लोगों को खोजना कठिन है, जो संयम के साथ जूझना चाहेंगे। ~ जुलियस सीजर / Julius Caesar
  • जितना कठिन संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी। ~ थॉमस पेन / Thomas Penn
  • कठिनाइयाँ भगवान का सन्देश होती है। उनका सामना करते समय हमें भगवान के विश्वास के रूप में, भगवान से अभिनन्दन के रूप में उनका सम्मान करना चाहिए। ~ हेनरी वार्ड बीचर / Henry Ward Beecher
  • कार्यक्षेत्र में, स्वार्थों की संघर्षस्थली में महान आदर्शों की रक्षा करना कठिन काम है। ~ हजारी प्रसाद द्विवेदी / Hazari Prasad Dwivedi 
  • इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है, क्योंकि सफलता का आनंद उठाने के लिए ये जरुरी हैं। ~ अब्दुल कलाम / Abdul Kalam
  • कष्ट पड़ने पर भी साधु पुरुष मलिन नहीं होते, जैसे सोने को जितना तपाया जाता है वह उतना ही निखरता है। ~ कबीर / Kabeer 
  • जिस हालत (कष्ट) में हो, ईश्वर का धन्यवाद करो। संसार में इससे भी अधिक कष्ट हैं। ~ लियो टालस्टाय / Leo Tolstoy
  • एक बड़े पहाड़ पर चढ़ने के बाद यही पता चलता है कि अभी ऐसे कई पहाड़ चढ़ने के लिए बाकी है। ~ नेल्सन मंडेला / Nelson Mandela
  • सच्चा साहसी वह है, जो बड़ी से बड़ी विपत्ति को बुद्धिमतापूर्वक सह सकता है। ~ विलियम शेक्सपीयर / Shakespeare
  • प्रतिकूल परिस्थितियों से कुछ व्यक्ति टूट जाते हैं, जबकि कुछ व्यक्ति सारे पिछले रिकॉर्डों को तोड़ डालते हैं। ~ William Arthur Ward / विलियम आर्थर वार्ड
 
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Anger Quotes in Hindi

क्रोध पर विचार, गुस्सा नियंत्रण. Anger Management Quotes in Hindi. Krodh Niyantran, Gussa, Angry Sms, Temper Messages, Annoyed Status, Annoying Sayings, Lines.
Anger Quotes in Hindi
Anger Quotes

  • कुछ लोग किस बात का खार (खुन्नस) खाए बैठे रहते हैं समझ ही नहीं आता। अच्छी बात यह है कि आजकल गुस्सा कम आता है, मुस्कुराहट ज्यादा। :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (14/01/2017) 
  • आवेश क्षीण होकर गुम हो जाते हैं, बस हम उन्हें सहयोग न दें तो। आवेश में उठने के इच्छुक कदम को हरसंभव निरस्त करते जाना चाहिए। अक्सर ही आवेश के खत्म हो जाने पर यह अहसास होता है कि अगर वह कदम उठ जाता तो कितना गलत होता। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (28/06/2016)  
  • नाराज हो जाओ कभी तो बस इतने से फासले पर होना जो एक कदम, एक स्पर्श, एक मुस्कुराहट, एक आंसू, एक शब्द या प्रेम की एक नजर भर से भरा जा सके।...और भरावन हो ऐसी कि कभी नाराज हुए थे, ये याद भी न रह सके। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (17/04/2016)  
  • जिससे प्यार करते हैं, कभी-कभी उसी पर ढेर सारा गुस्सा निकालने का मन होता है। वह झेल लेगा न, शायद इसलिए। :p ~ Monika Jain ‘पंछी’ (10/05/2016)  
  • ...क्योंकि असल वाली कट्टी कहकर नहीं होते। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (25/06/2016)  
  • क्रोध और बैर का भेद केवल कालकृत है। दुःख पहुँचने के साथ ही दुखदाता को पीड़ित करने की प्रेरणा करने वाला मनोविकार क्रोध है और कुछ काल बीत जाने पर प्रेरणा करने वाला भाव बैर है। ~ आचार्य रामचंद्र शुक्ल  
  • क्रोध को जीतने में मौन सबसे अधिक सहायक है। ~ महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi  
  • मुर्ख मनुष्य क्रोध को जोर-शोर से प्रकट करता है, किन्तु बुद्धिमान शांति से उसे वश में करता है। ~ बाइबिल / Bible  
  • क्रोध मुर्खता से प्रारंभ और पश्चाताप पर खत्म होता है। ~ पाईथागोरस / Pythagoras  
  • जो मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप में नहीं कह सकता, उसी को क्रोध अधिक आता है। ~ रवीन्द्रनाथ ठाकुर / Rabindranath Thakur  
  • क्रोध मस्तिष्क के दीपक को बुझा देता है। अतः हमें सदैव शांत व स्थिरचित्त रहना चाहिए। ~ इंगरसोल / Ingersoll  
  • सुबह से शाम तक काम करके आदमी उतना नहीं थकता जितना क्रोध या चिंता से पल भर में थक जाता है। ~ जेम्स एलन / James Allen  
  • हमारा क्षणिक आवेश संसार के लिए कितना अहितकर है, जो दूसरों की जान तक ले लेता है। ~ चन्द्रप्रभ / Chandra Prabh  
  • उस मनुष्य के पास कौन बैठना चाहेगा, उस मनुष्य को कौन अपने पास बिठाना चाहेगा जो हमेशा बारूद का ढेर बने घूमता है और जिसका पता नहीं कि वह कब फट पड़े। ~ जेम्स एलन / James Allen
  • जिस मनुष्य को अन्याय पर क्रोध आता है, जो अपमान को सह नहीं सकता, वही पुरुष कहलाता है। जिस मनुष्य में क्रोध या चिढ़ नहीं है, वह नपुंसक ही है। ~ लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक / Bal Gangadhar Tilak  
  • क्रोधित होना आसान है लेकिन सही व्यक्ति से सही सीमा में, सही समय पर और सही उद्देश्य के साथ क्रोधित होना, सभी के बस की बात नहीं है और यह आसान नहीं है। ~ अरस्तु / Arastu 
  • क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है, इसमें आप ही जलते हैं। ~ गौतम बुद्ध / Gautam Buddha  
  • वह आदमी वास्तव में बुद्धिमान है जो क्रोध में भी गलत बात मुंह से नहीं निकालता। ~ शेख सादी / Sheikh Saadi

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Wednesday, January 25, 2017

Poem on Mehangai in Hindi

बढ़ती महंगाई की मार समस्या पर कविता, आर्थिक असमानता शायरी. Poem on Inflation in Hindi. Dearness Poetry Lines, Economic Development Inequality Slogans, Rhymes. 
Poem on Mehangai in Hindi

हाय! मार गयी महंगाई

जाड़े में ठिठुरता बदन
सड़कों पर अधनंगा तन
बरसात में टपकता छप्पर
बर्तन बिछे हुए फर्श पर।

सब्जी के है भाव चढ़े
पेट्रोल के भी दाम बढ़े
सुरसा सी बढ़ती महंगाई
कौन हनुमान करेगा लड़ाई?

विकास की दर बढ़ाने की बात
गरीब के पेट पर मारकर लात
विश्व के नक़्शे पर चमकने की चाह
आर्थिक असमानता की नहीं परवाह।

ये कैसा झूठा विकास?
तोड़ कर आम जनता की आस
नेताओं की ये बेवफाई
हाय! मार गयी महंगाई।

By Monika Jain 'पंछी'

(22/01/2013)
 
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Tuesday, January 24, 2017

Essay on Spirituality in Hindi

अध्यात्म ज्ञान, आध्यात्मिक रहस्य लेख. Essay on Spirituality in Hindi. Spiritual Life Science Article, Meditation Power Speech, Spiritualism, Knowledge World.
Essay on Spirituality in Hindi
अध्यात्म : भ्रम व निवारण

1. भ्रम : दुनिया में बदलाव की सोच छोड़कर मुक्ति की इच्छा एक बेहद स्वार्थी विचार है।

निवारण : अक्सर हम लोग दुनिया को बदलने की बात करते हैं। लेकिन दुनिया में परिवर्तन और सुधार के लिए कुछ कर गुजरने की भावना जितनी गहरी होगी वह उतना ही बड़ा अहंकार होगा। आतंकवादी ऐसे ही तो होते हैं न? अपने नजरिये से तो वे भी दुनिया को सुधारने में ही लगे हैं। माया सिर्फ बिगाड़ने के नाम पर हम पर हावी नहीं होती, यह सुधारने के नाम पर भी हम पर हावी हो सकती है। बाकी यह ब्रह्माण्ड और इसका बोध इतना गहरा और विशाल है कि न तो हमारे किये कुछ होता है और न ही हमारे न करने से कुछ होता है। सम्पूर्ण तंत्र है यहाँ और जब सम्पूर्ण तंत्र काम करता है तो कोई जीव विशेष कर्ता रह ही नहीं जाता क्योंकि कार्य-कारण की एक अनन्त श्रृंखला चलती है। समष्टि को छोड़कर केवल व्यष्टि को भी स्थूल रूप से हम देखें तो हमारे शरीर के जो सबसे महत्वपूर्ण कार्य हैं उन पर हमारा कोई भी नियंत्रण नहीं। सूक्ष्म रूप से देखेंगे तब तो और भी बहुत कुछ नज़र आ जाएगा। ऐसे में ‘मेरे करने से ही होगा’ और ‘मेरे न करने से ही होगा’ दोनों में ही कर्ता भाव है। अकर्ता न ‘करता है’ और न ही ‘नहीं करता है’। अकर्मण्यता (आलस) और अकर्ता हो जाने (परम/सम्पूर्ण के प्रति समर्पण) में जमीन-आसमान का अंतर है। आध्यात्मिक प्रक्रिया चेतना को ब्रह्मांडीय चेतना के साथ एकाकार करती जाती है ऐसे में बस होता है : सहज, सरल, प्रवाहमय! और जो भी होता है वह उस बोध के अनुपात में सही होता है। इसलिए सबसे बड़ी सेवा मुक्त होना ही है या सबसे बड़ा सुधार आत्म सुधार ही है। हाँ, समाज सुधार इसका परिणाम अवश्य होगा। यह तो हम सबका अनुभव होता ही है। बचपन से ही अपनी क्षमता और परिस्थितियों के अनुरूप परिचित-अपरिचित सभी की जितनी और जिस भी तरह से मदद करने में सक्षम हूँ मदद करने को तत्पर रही हूँ। कई व्यक्ति जो जीवन में जुड़ते हैं, वे कहकर भी जाते हैं कि आपसे जुड़कर जीवन में बहुत सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं या जीवन में हमेशा याद रहोगी। हाँ, बंधने और बाँधने में कभी अधिक रूचि रही नहीं। जिसके कारण अक्सर वह मदद लोगों द्वारा विस्मृत हो जाती है। लेकिन जहाँ-जहाँ मोह वश मैंने रूचि ली, वहां भी कभी अच्छे परिणाम मिले नहीं तो एक स्वतंत्र मैत्री भावना सबसे बेहतर लगती है। जिसकी खासियत यह है कि यह सारे प्राणियों से स्थापित की जा सकती है। जितना किसी भी प्राणी के लिए कुछ कर सको उतना करो (स्वयं और उसे मोह से मुक्त रखते हुए) और अब तो यह भी समझने लगी हूँ कि हमारा किया कुछ भी हमारा कहाँ होता है? जो भी हमें मिला है वह इसी संसार से मिला है। हाँ, अहंकार के क्षणों में हम यह बात विस्मृत कर जाते हैं। और अफ़सोस यह है कि हमारा अधिकांश जीवन इन्हीं क्षणों (मैं, मेरा) में ही बीतता है। बाकी जिस क्षण किसी को परम मिलना शुरू होता है, उस क्षण से ही उसका बांटना शुरू हो जाता है। वह नहीं बांटेगा तो परम से भी दूर ही रहेगा। हाँ, एक जाग्रत व्यक्ति दुनिया को क्या और किस तरह बाँटता है इसे भौतिक दृष्टि वाले व्यक्ति नहीं समझ सकते। हाँ, उस मदद में जितनी मात्रा में वस्तुएं और पैसे होंगे वह तो उन्हें नजर आ जाएगा, बाकी नहीं नज़र आएगा। यहाँ एक बात और कि अधिकांश व्यक्ति जब भी पढ़ते हैं तो पूर्ण आदर्श बातों को किताबी बातें मानकर उपेक्षित कर देते हैं। लेकिन कोई भी आदर्श सिर्फ इतना बताता है कि अभी आपके पास आत्मिक विकास के लिए बहुत-बहुत लम्बा रास्ता है। कम से कम हम चलना तो शुरू करें

2. भ्रम : मुक्ति पलायन है।

निवारण : मुक्ति क्या है...इसे बस वही समझ सकता है जिसने कभी निर्दोषिता के आनंद को चखा हो। यह पलायन नहीं! पलायन तो संसार है, बंधन है। अपने मूल स्वभाव की ओर लौटना पलायन नहीं होता। हाँ, उससे दूर जाना और भटकना जरुर होता है। महावीर, बुद्ध जैसे कई महात्माओं के वन या हिमालय गमन को पलायन कहा जाता है। लेकिन किसी बीमारी से स्वास्थ्य की अवस्था तक पहुँचने के लिए जैसे कुछ परहेजों की जरुरत होती है। इसी तरह कषायों (मन के संस्कारों) से निर्दोषिता तक पहुँचने के लिए भी परहेज की जरुरत है। साधना को सुरक्षित रखने के लिए कुछ बचाव जरुरी होते हैं। जिसे आत्मबोध हो चुका है उसे तो कुछ भी प्रभावित नहीं कर सकता, लेकिन उससे पूर्व तो प्रभावों से ऊपर उठने के लिए प्रभावों से बचना भी होगा। यह केवल व्यक्तिगत हित की बात नहीं है, यह व्यापक हित की ही बात है। क्योंकि किसी के प्रभाव में आप अपने गुण-स्थान (अपनी चेतना के स्तर) से एक कदम भी नीचे सरके तो यह सिर्फ आपके लिए नुकसानदायक नहीं होगा, यह जीव मात्र के लिए नुकसानदायक है। सुसंगति और कुसंगति के असर की बातें इसलिए ही कही जाती है। बाकी हर महावीर और हर बुद्ध आत्मबोध के बाद अगर उनकी आयु शेष हो तो संसार के उद्धार के लिए वापस आते ही हैं। महावीर और बुद्ध ने तो 40 वर्षों तक यही काम किया। कोई न भी आये तब भी उससे इस प्रक्रिया तक बहुत कुछ हो चुका होता है।

हाँ, मुक्त होने के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं। अगर आपको पता चले कि जिस व्यक्ति/प्राणी से आप लड़ने वाले हो वह आप ही हैं तो तो या तो आप नहीं लड़ोगे जो कि बुद्ध और महावीर का मार्ग (अहिंसा) है, या फिर लड़ोगे लेकिन जीत और हार (फल) के प्रश्न को बिल्कुल दरकिनार रखकर बस उस क्षण की जरुरत को समझकर...जो कि कृष्ण का मार्ग है (कर्मयोग)। कहने को तो कृष्ण को भी रणछोर कहा जाता है। तो क्या करना है और क्या नहीं यह उस व्यक्ति के उस क्षण की जागरूकता, परिस्थितियों और समझ पर निर्भर करता है। एक मार्ग भक्ति भी है। कर्म-कर्म करने वालों को (जो कि निष्काम कर्म या कर्मयोग के जरा भी आसपास नहीं फटकते, क्योंकि जो फटकेगा वो तो चिड़ सकता ही नहीं) उन्हें भक्ति, ध्यान और ज्ञान में रत साधकों जैसे मीरा, महावीर, बुद्ध आदि से बेहद चिड़ होती है। लेकिन, जो बहुत आलसी हों उनसे वास्तविक भक्ति, ध्यान और साक्षी की साधना भी नहीं हो सकती। अध्यात्म में भिक्षु बन जाना (भिखारी नहीं) कोई छोटी बात नहीं। कोई आजीवन ध्यानमग्न बैठा हो वो भी एक असंभव के निकट सी बात है। सामान्यत: जो सबसे सरल और सबसे सहज होते हैं वहीँ भक्तिमय हो पाते हैं। अर्थात् भक्ति सबसे सरल प्राणियों का मार्ग है। (यह भक्ति वह वाली भक्ति नहीं जो फेसबुक पर कटाक्ष करने के लिए प्रचलित है। उससे इसका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं। और वह भी नहीं जिसमें दिन-रात गाड़ी, बंगला, कार, पैसे, नौकरी...आदि मांगी जाती रहती है।) भक्ति के बाद ज्ञान थोड़े जटिल (जिज्ञासुओं) का मार्ग है और कर्मयोग (सेवा) थोड़े और जटिल व्यक्तियों का मार्ग है। इसके बाद बचे दुनिया के 99.99 % लोग जो सबसे अधिक जटिल होते हैं। जिन्हें अपने बंधनों का पता ही नहीं होता और ताउम्र उनकी अंधी दौड़ पद, सम्मान, पैसे, प्रतिष्ठा, शोहरत, मनोरंजन आदि के नाम पर बस बाहर की ओर होती है। उन्हें खुद तो कभी कुछ नहीं मिलता (मिलता होता तो दौड़ थम चुकी होती) लेकिन दूसरों को भी इसी दौड़ में शामिल कर लेना चाहते हैं। यहाँ यह समझना जरुरी है कि ज्ञान, भक्ति और कर्म के मार्ग में बहुत कुछ ओवरलैप भी करता रहता है। मतलब किसी भी व्यक्ति का मार्ग इन सभी के मिश्रण से ही बनता है, बात बस प्रधानता की हो जाती है। जो व्यक्ति आजीवन ध्यानमग्न है उस व्यक्ति ने तो इस सृष्टि के जीवमात्र को प्रेम, मुक्ति और अहिंसा दी है (बिल्कुल जैसे परमात्मा द्वारा हमें प्राप्त है।) वह तो परम तत्व के बहुत निकट है। शब्द, कार्य, उपदेश ये सब तो बहुत स्थूल चीजें हैं। जो सबसे मूल तत्व है (प्रेम या अहिंसा) वह तो बहुत सूक्ष्म बल्कि अदृश्य है। मुख्य कार्य तो वही करती है। इसलिए ही यह होता है कि बहुत से योगियों के पास हिंसक से हिंसक पशु-पक्षी भी अपनी हिंसा छोड़ देते हैं (अभी भी कई उदाहरण हम देखते ही हैं)। उनकी ऊर्जा का प्रभाव है। जैसे महावीर जिस रास्ते चलते थे वहां सामान्यत: बहुत लम्बी दूरी तक तक कोई हिंसक घटना नहीं होती थी। अजगर भी एकदम शांत और आनंदित होकर बैठ जाता था। इस दुनिया में जितना भी मोह रहित निस्वार्थ प्रेम है वह उन्हीं व्यक्तियों का परिणाम है जो-जो जिस-जिस मात्रा में मुक्त हुए हैं या परम के निकट हैं। यहाँ एक चीज बता देना आवश्यक है कि बाहरी आडम्बरों और क्रियाकलापों से यह आवश्यक नहीं है कि किसी के भीतर को भी पहचाना जा सके। कोई संसारी नज़र आते हुए भी भीतर मुक्त (अनछुआ) हो सकता है और कोई बहुत ज्यादा धार्मिक/आध्यात्मिक नज़र आते हुए भी गहरे बंधन में हो सकता है। बेहतर है आत्मनिरीक्षण की एक प्रणाली हम विकसित करें। जिस भी व्यक्ति (कुछ और भी हो सकता है) की निकटता में हममें निर्मलता, निच्छलता, शांति और सुकून बढ़े, वह फिर बाहर से कैसा भी नजर आये कोई फर्क नहीं पड़ता, उसे अपना गुरु/मित्र जानिये

3. भ्रम : अध्यात्म कामचोरों का काम है।

निवारण : कामचोरों के लिए नहीं है अध्यात्म। वास्तव में जो क्षमता होते हुए भी बहुत अधिक आलसी और अकर्मण्य हों, वह तो आध्यात्मिक हो ही नहीं सकता। हाँ, अध्यात्म हमें पसंद और नापसंद (सभी तरह के भेदों) से ऊपर उठाता है। लेकिन इसका मतलब यह जरुरी नहीं कि आप सारे ही तरह का काम करें। क्या करना है और क्या नहीं यह हमारे बोध और परिस्थितियों पर निर्भर करता है और उसी अनुरूप हमारे श्रम की दिशा और रूप तय होता है। फिर चाहे आप झाड़ू लगा रहे हों या किसी अन्तराष्ट्रीय संस्था में भाषण दे रहे हों या बैठकर ध्यान कर रहे हों अगर समर्पण है (कार्य के दौरान फल और अहंकार की विस्मृति) तो सभी क्रियाएं आध्यात्मिक हो जाती है। समस्या दुनिया के साथ यह है कि यहाँ कर्म का मतलब ही बस यही है कि उससे कितना पैसा, कितनी इज्जत, कितना सम्मान मिलेगा या फिर अहंकार को कितनी तृप्ति मिलेगी। हमारे घर में सामान्यत: सभी घरेलु कार्य खुद ही किये जाते हैं। किसी सहायक को रखना कम ही होता है। बचपन से ही पढ़ाई के साथ-साथ ढेर सारी अतिरिक्त गतिविधियाँ जीवन में समय-समय पर जुड़ती चली गयी। हाँ, जहाँ तक घरेलु कामों की बात है तो कुकिंग को छोड़कर बाकी कामों में रूचि नहीं थी। आते सभी थे। बहुत जरुरत होने पर किये भी जाते रहे। लेकिन फिर भी तुलना तो थी ही। लेकिन पिछले कुछ समय में मैंने जो अंतर महसूस किया है वह यह है कि कई बार ऐसा हुआ है जब मुझे चाहे लेखन से सम्बंधित कोई काम करना हो, पढ़ना हो, पढ़ाना हो, कोई असाइनमेंट, कोई भी अन्य रचनात्मक कार्य, झाड़ू लगाना हो, बर्तन साफ़ करने हो, कपड़े धोने हो, खाना बनाना हो, कोई अनाज साफ़ करना हो, खेलना हो या कोई भी अन्य काम...इन्हें करने के दौरान मैंने कोई विशेष अंतर महसूस नहीं किया। बल्कि कभी-कभी तो तिल, सौंफ साफ़ करते समय या झाड़ू लगाते समय भी बहुत सुकून दायक लगा है। हालाँकि मैं बहुत आध्यात्मिक नहीं हूँ ( बहुत शुरूआती स्तर समझ सकते हैं) लेकिन कुछ इतनी विलक्षण अनुभूतियाँ हैं कि यह स्वत: ही अपनी ओर खींचता है। उत्कृष्टता किसी कृत्य की मोहताज नहीं। और अध्यात्म कामचोरों का नहीं हरफनमौलाओं का क्षेत्र है। 


4. भ्रम : भूख, गरीबी, बेरोजगारी जैसी समस्यायों के रहते अध्यात्म एक मजाक जैसा है।

निवारण : भूखे पेट को समस्या किसने बनाया? भूखे मन ने। वरना क्या संसार में कुछ कमी थी खाने-पीने की? कुछ लोगों के मन की भूख ने बाकियों के पेट को भी न भरने दिया। और मन की यह भूख सिर्फ जरुरत लायक कुछ पैसों, घर, कपड़ों तक सीमित नहीं...बात नाम, शोहरत, इज्जत, देशों-प्रदेशों के नाम पर धरती और संसाधनों पर अधिकार... न जाने कहाँ-कहाँ तक पहुँचती है। और यह भूख ऐसी है कि मिटने का नाम लेती ही नहीं। इंसान मिट जाता है लेकिन यह भूख नहीं मिटती। मुझे बड़ा ताज्जुब होता है जब पेट की इस भूख का नाम लेकर अध्यात्म पर व्यंग्य किया जाता है। भई! अध्यात्म मन की भूख मिटाने का ही साधन है। यह आपके पेट के खिलाफ कहीं से भी और किसी भी तरह नहीं है। यह बात अलग है मन की भूख मिटने पर कुछ लोगों (अपवाद) के पेट की भूख भी गायब हो जाती है। बड़े भयंकर भ्रम है अध्यात्म को लेकर। पूर्वाग्रही मत बनिए, जिज्ञासु बनिए। भारत जिज्ञासुओं और खोजियों की भूमि के लिए ही जाना जाता रहा है। बाकी वास्तव में आध्यात्मिक जो भी होगा उसके द्वारा किसी न किसी न रूप में, कहीं न कहीं स्वत: ही समष्टि का कल्याण हो ही रहा होगा। वह हर सूचना आप तक पहुंचाए यह जरुरी नहीं। सच तो यह है कि वह अगर आजीवन एक जगह मौन बैठा हो तब भी यह कल्याण होगा। आप कितने भी बड़े जासूस हों तब भी नहीं समझ पायेंगे कि कैसे? समझने के लिए आपको इस तल पर उतरना ही होगा और अपनी दृष्टि को व्यापक भी करना होगा।  


By Monika Jain 'पंछी'

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Monday, January 23, 2017

Poem on Fear in Hindi

प्यार में डर कविता, भय शायरी, उलझन, अविश्वास, प्रेम, भरोसा. Poem on Fear in Hindi. Confusion in Love Poetry, Lack of Self Trust Rhymes, Relationship Phobia.
Poem on Fear in Hindi
उलझन

कितनी अजीब बात है न!
तुम कहते हो, तुम्हें डर लगता है
कि क्या तुम मुझे खुश रख पाओगे।
और मैं कहती हूँ, मुझे डर लगता है
कि क्या मैं तुम्हें खुश रख पाऊँगी।

हमारा ऐसा सोचना क्या दर्शाता है?
यह कि हमें एक दुसरे पर ज्यादा भरोसा है
या यह कि हमें खुद पर विश्वास नहीं।
यह कि हमें एक दूसरे की ज्यादा परवाह है
या यह कि हमें अपने प्यार पर एतबार नहीं।

एक अजीब सी उलझन में हूँ -
सुना है जहाँ प्यार होता है वहाँ डर नहीं होता
और जहाँ डर है वहाँ प्यार नहीं
इसलिए डरती हूँ हमारे इस डर से
कि कहीं यह हमारे प्यार पर हावी न हो जाये।

By Monika Jain 'पंछी'
(22/01/2013)

Saturday, January 21, 2017

He She Conversation in Hindi

दो दोस्तों के बीच बातचीत, लड़का लड़की संवाद. He She Conversation in Hindi. Talks Between Girl & Boy, Two Friends Cute Funny Discussion, Lovely Convos, Chit Chat.
He She Conversation in Hindi
(1)

He : किसी के इश्क में होना रूई के फाहों के बीच होने जैसा है।

She : और खुद इश्क होना रूई का फाहा होना है। :)

 
(2)

He : तुम नदी हो।

She : डूब जाओगे। नाव का इंतजार करो।

He : तुम नदी और नाव दोनों हो।

She (मन ही मन में) : अब क्या बोलूं? :p

 
(3)

He : तुम्हारी बातें बहुत हाई लेवल की होती है। ज्यादा नहीं पच पाती।

She : इसलिए तो तुम्हें बोलने को कहती हूँ। तुम अपने लेवल की बात करो।

He : क्या बात करूँ, तुम ही बताओ।

She : मैं तो अपने लेवल की ही बताऊंगी न? अच्छा, तुम तो मुझे हमेशा बच्ची कहते हो। तो पहले तुम ये डीसाइड करो कि मैं हाई लेवल की हूँ या बच्चों के लेवल की।

He : तुम हाई लेवल की बच्ची हो। :p :D

 
(4)

He : दुनिया और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को छोड़कर मुक्ति की इच्छा एक बेहद स्वार्थी और अश्लील विचार है।

She : जितना मेरे नन्हें से दिमाग ने अब तक जाना है, आप दुनिया और अपने लिए इससे बेहतर कुछ भी नहीं कर सकते कि आप अपनी ओर से दुनिया में उत्पन्न प्रतिरोध (शारीरिक-मानसिक, प्रकट-अप्रकट) को न्यूनतम कर दें। अपनी जरूरतों और आवश्यकताओं को सीमित से सीमित कर दें। कुछ लोग आत्महत्या (जो कि आवेश में की जाती है) की सलाह देंगे। पर अफसोसजनक बात यह है कि वह प्रतिरोध को कम नहीं करता, वह तो बढ़े हुए प्रतिरोध का सूचक है।) क्योंकि इस दुनिया में कुछ भी खत्म नहीं होता। वह सिर्फ रूप बदलता है। बाकी किसी के मुक्त होने और मुक्त होने तक की प्रक्रिया स्वत: ही दुनिया के लिए बहुत कुछ कर जाती है।

 
(5)

कुछ आरोप इतने मासूम होते हैं कि उन्हें पढ़ते ही सबसे पहले सहज मुस्कुराहट आती है। :)

He : आपका कोई पोस्ट हटाना उस पोस्ट पर आये विचारों की हत्या है।

She : भई...हो सकता है मैं तो किसी दिन अकाउंट भी डिलीट कर दूँ। तब तो मैं बहुत बड़ी हत्यारण बन जाऊँगी। :)

 
(6)

He : कैसी हो?

She : अच्छी हूँ।

He : जब देखो तब बस अपनी तारीफ़ करवा लो।
:p :D

 
(7)

He : सलमान खान बाइज्जत बरी हो गया।

She : Who is Salman Khan?

Moral of the Story : इज्जत (जिन चीजों को दुनिया मुख्य रूप से देती है), उतनी ही दो जितनी बरी होते देखी जा सके और अफ़सोस न हो। बड़े और छोटे के भेद जितने गहरे होंगे परिणाम वैसे न होंगे तो और कैसे होंगे?

Thursday, January 19, 2017

Poem on Home in Hindi

घर की याद पर कविता, मेरा मकान शायरी. Poem on Home in Hindi for Kids. Missing My Sweet House Poetry, Homesickness Nursery Rhymes, Household Lines, Residence.
Poem on Home in Hindi

अपना घर है सबसे प्यारा

घर से निकली पंख पसार
देख लिया सारा संसार
उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम
कर आई चहुँ ओर भ्रमण।

सुन्दर था जग का हर कोना
फिर भी मुझको पड़ा लौटना
सुन्दरता जग की ना भायी
घर की मुझको याद सताई।

नैना मेरे थे बेचैन
घर लौटी तब आया चैन
माना मेरे दिल ने यारा
अपना घर है सबसे प्यारा।

By Monika Jain 'पंछी'

 
Watch/Listen the video of this poem about home : 


Monday, January 16, 2017

Funny Quotes in Hindi

चुटकुले, हास्य उद्धरण. Funny Quotes in Hindi. Comic Dialogues, Laughing Status, One Liners Jokes, Comedy Lines, Laughter Messages, Sayings, Comments, Sentences.
Funny Quotes in Hindi
Funny Quotes

  • 'स्टेप हेयर कट' के लिए माँ कहती है - चूहों ने बाल कुतर दिए हो जैसे। :p ~ Monika Jain ‘पंछी’ (11/01/2016) 
  • बच्चे के रूप में करीब-करीब ईश्वर ही जन्म लेता है। फिर माता-पिता और समाज उसे बिगाड़ने का कार्य करते हैं। :p ~ Monika Jain ‘पंछी’ (29/12/2016) 
  • कुछ लोगों को आपकी पोस्ट्स इतनी पसंद आती है, इतनी पसंद आती है, इतनी पसंद आती है कि वे उसे अपनी ही बना लेते हैं। उनके लिए यह स्वीकार करना संभव ही नहीं होता कि यह उन्होंने नहीं लिखी है। :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (21/12/2016) 
  • एक ज़माने में मैं इतनी बुद्धू थी (अभी भी कम नहीं :p ) कि एक दोस्त ने मेरे मजे लेने के लिए मुझसे कहा, 'हमारे यहाँ पर बेस्ट फ्रेंड को मुर्गीचोर कहा जाता है।' मैंने थोड़ा संदेह जताया तो उसने कहा, 'चाहो तो किसी और से पूछ लो!' और मैं आराम से वहीँ पर रहने वाले एक कॉमन फ्रेंड से पूछ भी आई कि क्या आपके यहाँ बेस्ट फ्रेंड को मुर्गीचोर कहते हैं? ~ Monika Jain ‘पंछी’ (27/09/2016) 
  • अपने घर में मैं नास्तिक समझी जाती हूँ। मेरी जन्मकुंडली में लिखा है मैं बहुत बड़ी धर्मात्मा बनूँगी और यहाँ फेसबुक पर शायद आध्यात्मिक समझते हैं मित्र। और फिर मैंने इनमें से कुछ भी बनना कैंसिल कर दिया। :p :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (30/08/2016)  
  • मित्र के सालों पुराने नंबर पर कॉल करने...जो कुछ सालों तक बंद रहकर अब किसी ख़तरनाक लड़की :p का नंबर हो चुका हो। जहाँ सामने वाली आपको कोई और लड़की (रिमझिम) समझ रही है (जिससे उसका 36 का आँकड़ा है शायद) और आप उसे मित्र की वाइफ समझ कर बहुत सहजता से बात कर रहे हैं। तब इस ख़तरनाक ग़लतफ़हमी के बीच कुछ अज़ब वार्तालाप के साथ-साथ उसका कहना, 'देखो! तुम इतनी ज्यादा स्वीट मत बनो।'...मुझे रह-रहकर अभी तक हंसी आ रही है। :D अच्छी-खासी आवाज़ का इस तरह से कचरा भी हो सकता है। :'( मन कर रहा था उसे कह दूँ, मैं स्वीट बन नहीं रही...आलरेडी स्वीट हूँ। :p ;) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (21/08/2016) 
  • हमारी शिक्षा प्रणाली इतनी बोरिंग है कि बच्चे यह तक कहते पाए जाते हैं कि काश! बाढ़ आ जाए तो स्कूल ही नहीं जाना पड़ेगा। :D ~ Monika Jain ‘पंछी’ (04/09/2016)  
  • बच्चों का स्वागत और बच्चों द्वारा स्वागत आज भी दरवाजे के पीछे छिपकर 'हो' से ही होता है। :p :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (18/08/2016)  
  • जिन्हें शब्दों से अति प्रेम हो या फिर जिनके लिए चर्चा सिर्फ हार या जीत का प्रश्न हो उनके साथ चर्चा में पड़ना मतलब ’आ बैल मुझे मार!’ :p ~ Monika Jain ‘पंछी’ (01/12/2015)  
  • किचन एक्सपेरिमेंट के नाम पर किसी ने कहा, 'आप आलू-मुर्गा बना लो।' हमने कहा, 'आलू हम बना लेंगे, आप मुर्गा बन जाना।' :o :p ~ Monika Jain ‘पंछी’ (07/12/2015)  
  • काहें का 'फ्रीडम 251'! सबको तो गुलाम बना छोड़ा है। इत्ते तो अभी शक्ल भी नहीं देखी ढंग से। अफवाहों का बाज़ार भी गर्म है। वैसे टेंशन न लो कोई। कुछ ठीक न रहा तब भी बच्चों के खेलने के काम तो आ ही जाएगा। :p ~ Monika Jain ‘पंछी’ (19/02/2016) 
  • न सोयेंगे और न सोने देंगे वाले प्राणियों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। :’( ~ Monika Jain ‘पंछी’ (07/11/2016)

Thursday, January 12, 2017

Small Story in Hindi with Moral

व्यक्तित्व पर कहानी, दान की महिमा कथा, मनुष्यता, मानवता, चरित्र. Small Story in Hindi with Moral for Kids. Donation, Personality, Character, Humanity Tales.
Small Story in Hindi with Moral
 (1)

दान की महिमा

वैशाख महीने की भीषण गर्मी में एक बार महाकवि कालिदास किसी कार्यवश भयानक जंगल में पहुँचे। उन्होंने वहां एक रुग्ण व्यक्ति को देखा। वह फटेहाल था। वह चल रहा था किन्तु भूमि इतनी तपी हुई थी कि उससे चला नहीं जा रहा था। मुंह से आह निकल रही थी। इसे देखकर महाकवि पसीज गए। उसे उठाकर एक वृक्ष के नीचे रख दिया और अपने पदत्राण भी उसे दे दिए और वे औषधि लाने चल पड़े। वे कुछ चले ही थे कि एक महावत हाथी लेकर आ रहा था। महाकवि को देखकर उसने उन्हें हाथी पर बिठा लिया। राजा भोज ने कालिदास को हाथी पर आरूढ़ देखा तो पूछा- हाथी पर कैसे बैठे हो? कवि ने कहा - ‘जो व्यक्ति नहीं देते, उनकी संपत्ति नष्ट हो जाती है’।


Source : स्वाध्याय सन्देश

(2)

व्यक्तित्व

जब विवेकानंद जी विश्व शिकागो धर्म सम्मलेन में भाग लेने के लिए शिकागो (अमेरिका) गए तो उनके साफे और भगवा वेशभूषा को देखकर एक महिला ने खिल्ली उड़ाई और पूछा - यह क्या है? स्वामी जी हाजिर जवाब थे। उन्होंने तुरंत कहा, ‘मैडम! यह आपका देश है जहाँ दर्जी व्यक्तित्व का निर्माण करता है पर हमारे देश में चरित्र व्यक्तित्व का निर्माण करता है।’


Source : Unknown

(3)

मनुष्यता का रिश्ता

रूस में सड़क के किनारे एक मेजर खड़े-खड़े शराब पी रहा था। तभी वहां एक आदमी आया जो अपने कपड़ों से ग्रामीण लग रहा था। उसने मेजर से किसी स्थान का पता पूछा। मेजर के अहंकार को ठेस लगी। उसने सोचा, ‘एक साधारण से आदमी की हिम्मत कैसे हुई कि उससे बात करे।’

मेजर कुछ बोला नहीं, बस उंगली के इशारे से उस जगह का पता बता दिया। पर वह व्यक्ति वहीँ का वहीँ खड़ा रहा। इससे मेजर को गुस्सा आ गया। वह बोला, ‘अब जाते क्यों नहीं?’

व्यक्ति ने कहा, ‘जा रहा हूँ। बस ये जानना चाहता था कि आप किस पद पर कार्यरत हैं?’

मेजर अहंकार से हँसते हुए बोला, ‘तुम खुद ही अनुमान लगाओ।’

ग्रामीण व्यक्ति ने कहा, ‘आप जरुर केप्टन होंगे?’ मेजर ने ना में सिर हिलाया। ‘तो आप लेफ्टिनेंट होंगे?’ ग्रामीण ने कहा। मेजर ने फिर से इनकार में सिर हिलाया। ग्रामीण बोला, ‘तब तो आप मेजर होंगे?’ मेजर ने खुश होकर कहा, ‘हाँ, तुमने सही पहचाना।’

ग्रामीण व्यक्ति ने मेजर को सलाम किया तो मेजर को संतोष हुआ। ग्रामीण व्यक्ति बोला, ‘आप बता सकते हैं कि मैं कौन हूँ?’

मेजर ने उसे हिकारत भरी नजर से देखते हुए कहा, ‘तुम गाँव के चोकीदार वगैरह होंगे।’ ग्रामीण ने ना में सर हिलाया। मेजर ने पूछा ‘सिपाही?’ ग्रामीण ने कहा, ‘उससे ऊपर।’ मेजर ने आश्चर्य से पूछा ‘कैप्टन?’ ग्रामीण ने कहा, ‘उससे भी ऊपर।’ इस तरह बात जनरल तक पहुँच गयी। ग्रामीण ने कहा, ‘मैं जनरल से भी ऊपर यहाँ का राजा हूँ।’

मेजर का नशा टूटा। उसने राजा को सलाम किया।

राजा ने कहा, ‘मेजर बनकर तुम यह भूल गए कि सबसे पहले तुम एक मनुष्य हो। मैं भी एक मनुष्य हूँ। कोई चाहे किसी भी पद पर कार्यरत हो पर मनुष्यता का रिश्ता सबसे बड़ा है।’

मेजर को अपने व्यवहार पर पछतावा हुआ। उसने राजा से माफ़ी मांगी।


Source : Unknown

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Wednesday, January 11, 2017

Poem on Basant Ritu in Hindi for Kids

बसंत पंचमी पर कविता, ऋतुराज वसंत गीत, मधुमास शायरी. Poem on Basant Ritu in Hindi for Kids. Spring Season Rhymes Lines, Vasant Panchami Festival Slogans, Poetry.
 Poem on Basant Ritu in Hindi for Kids

ऋतुओं की रानी है आई

ऋतुओं की रानी है आई
धानी चुनर अपने संग लायी
जिसे ओढ़ धरती मुस्काई
कण-कण में उमंग है छायी।

डाल-डाल नव पल्लव आया
जैसे बचपन फिर खिल आया
रंग-बिरंगे फूलों पर
देखो! भँवरा फिर मंडराया।

तितली भी मुस्काती है
बहती हवा बासंती है
नील गगन में उड़ते पंछी
के मन को हर्षाती है।

रंग-बिरंगे फूल खिले हैं
पीले, लाल, गुलाबी, हरे हैं
कोयल की कूंकूं के संग
स्वर गीतों के भी बिखरे हैं
स्वर गीतों के भी बिखरे हैं।

By Monika Jain 'पंछी'

(19/03/2013)

Watch/Listen the video of this poem about Spring Season (Basant Ritu) in my voice :


Thursday, January 5, 2017

Illusion Quotes in Hindi

मिथ्या भ्रम, मोह माया. Life is an Illusion Quotes in Hindi. Moh Maya, Bharam, Illusionist, Illusioned, False Sayings, Delusion Status, Hallucination Quotations.
 Illusion Quotes in Hindi
 Illusion Quotes

  • समस्या हमारी कट्टर धारणाएं व भ्रम होते हैं। नाम कुछ भी दिया जाए उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। दृष्टि में अगर भेद न हो तो शब्द क्या कर सकते हैं? हाँ, किसी शब्द के साथ बहुत ज्यादा नकारात्मक भाव जुड़ गए हो तो उससे बचा जा सकता है, पर शब्द मिटा देने मात्र से दृष्टि का भेद मिट नहीं सकता। उसके लिए किसी और ही रूपांतरण की जरूरत होती है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (29/12/2016) 
  • हम हर चीज को वर्गीकृत कर लेना चाहते हैं और यह नहीं देख पाते कि वर्गीकरण कितना बड़ा भ्रम है। भाषा और मन द्वैत में ही जीते हैं, यह सही है लेकिन मन की इस प्रकृति को समझ लेना भी तो जरुरी है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • भ्रम के बीज बोये जाते हैं और बोये जाते रहेंगे। बात बस इतनी है कि इनसे फैली कंटीली झाड़ियों की खरोंचों से हम अपने प्रेम और विश्वास को कैसे बचा पाते हैं। क्योंकि किसी एक के भी विश्वास पर आई खरोंचों की कीमत कहीं ना कहीं पूरी मानवता को चुकानी पड़ती है। काश! कुछ लोग ये समझ पाते। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (10/02/2015) 
  • अच्छी खासी 'वर्ड पोस्ट' पर जब कोई 'नाइस पिक', 'लवली पिक', 'ब्यूटीफुल पिक' लिख जाता है तो बहुत बेइज्जती टाइप फील होता है। और जब कोई लेख और कहानी को बिना पढ़े ओवरकांफिडेंस में 'अच्छी कविता' बता देता है तो फिर मन करता है एक कविता उसी पे लिख डालूं 'अच्छी वाली'! कभी-कभी कुछ पढ़ भी लिया करो प्यारों! लेखक होने का जो भ्रम पाल लिया है उसे यूँ निर्दयता से तो न तोड़ो। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (01/12/2015) 
  • अपनी कमजोरियों को तर्कसंगत बताने के स्टेटमेंट खोजे जा सकते हैं।
    दूसरों के गुणों को कमी करार देने के तर्क भी गढ़े जा सकते हैं।
    लगभग हर बात के लिए तर्क तैयार किये जा सकते हैं।
    बस सापेक्षता को समझना...फिर देखना कितने तर्क तर्काभास के ढेर में जा बैठते हैं। :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (29/05/2016) 
  • सब चीजें सापेक्ष लगती हैं। क्रिकेट को समझने के बाद से पहली बार मैंने वर्ल्ड कप क्रिकेट नहीं देखा। हर बार जब देखती थी तो जीत और हार को महसूस करती थी। रोती थी, हँसती थी। इस बार बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया तो कुछ महसूस भी नहीं हुआ। मतलब हमारे आवेग और आवेश प्रेरित होते हैं। क्षणिक होते हैं। क्षण भर के लिए हम अपने आप में सबसे बड़े देशभक्त को जीने लगते हैं, जबकि होता सब कुछ भ्रम ही है। ये जीत और हार भी तो कितना बड़ा भ्रम है।...और इसके साइड इफेक्ट्स! इन्हें यहाँ फेसबुक पर देख-देखकर यह विश्वास पक्का हुआ जाता है। भ्रम जितने जल्दी टूट जाएँ अच्छा है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (27/03/2015) 
  • हरेक अपनी व्यक्तिगत इकाई को सत्य सिद्ध करने का भ्रमपूर्ण प्रयास करता है। उसे इस भ्रम का ज्ञान अवश्य रहता है, क्योंकि हिंसा की भावना उत्पन्न होने से मनुष्य को कभी आनंद प्राप्त नहीं होता। ~ अमृत लाल नागर / Amrit Lal Nagar

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