Friday, February 24, 2017

Meditation Quotes in Hindi

ध्यान, होश, जागरूकता, भक्ति, समर्पण, एकाग्रता विचार. Meditation Quotes in Hindi. Awareness Sayings, Devotion Status, Dedication Slogans, Concentration Sms.
Meditation Quotes in Hindi
Meditation Quotes

  • ...कि जब उसे घास लाने को कहा गया और वह देर तक नहीं लौटा तो उसकी खोज शुरू हुई। वह घास के मैदान में मिला। उससे जब कारण पूछा गया तो उसने कहा, 'मैं घास हो गया था।'...मतलब कितने निर्दोष से किस्से हैं...आँखें भीग जाती हैं...मुस्कुराहट दौड़ कर होठों पर तैरने लगती है...कुछ बेहद जरुरी...नहीं बेहद नहीं...सबसे जरुरी याद आ जाता है। उस दिन मैंने जिक्र किया था न?...कि कृष्णमूर्ति पूछते हैं - क्या आपने कभी किसी पेड़ को देखा है? पेड़ को देखने के लिए पेड़ हो जाना पड़ता है...हाँ, पेड़ ही हो जाना पड़ता है।...और कोई उपाय ही नहीं। :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (22/02/2017) 
  • अपरिचित में भी चिर परिचित का दर्शन यही तो प्रेम (सुमिरन) है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (18/01/2017) 
  • कृत्य चाहे कोई भी हो उससे कुछ हिंसा तो होगी ही। मुख्य बात यह है कि वह कृत्य हमारे अहंकार से उपजा है या फिर हमारे होश, समर्पण और ध्यान से। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (21/01/2017)   
  • सामान्यत: हर चीज का कारण तो होता है लेकिन उस कारण का भी कारण खोजते-खोजते-खोजते-खोजते ...वह हमेशा अकारण तक ही पहुँचता है। ईश्वर उस अकारण से भिन्न और क्या है? जिसमें सारे कारण विलय हो जाते हैं। और भक्ति, प्रेम, ध्यान? वह बस उस अकारण के प्रति समर्पण और अपने ईश्वरत्व को उपलब्ध हो जाने का मार्ग है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (18/12/2016) 
  • भक्ति तो सहज ध्यान है, लेकिन जो सबसे सहज है उसके लिए ही हम सहज नहीं। इस समूचे अस्तित्व के प्रति समर्पण ही भक्ति है लेकिन हमारा अहंकार समर्पण नहीं करना चाहता। 'भक्त' शब्द व्यंग्य के रूप में बहुत प्रचलित है यहाँ।...पर सच यह भी तो है कि हमारे सारे प्रयास अनजाने में ही सही उस आनंद की खोज में ही है जो 'भक्त' को प्राप्त है। बात बस इतनी सी है कि जब तक प्रयास है भक्त हो जाना मयस्सर ही नहीं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (15/11/2016) 
  • I don’t want god to be always with me, rather I want to be always with god. ईश्वर (परम तत्व) को अपने अनुकूल बनाने से कई बेहतर है...परम तत्व के अनुकूल बन जाना। हम परम तत्व को निर्देश न दें, बल्कि उससे निर्देश लें। यही तो भक्ति है, यही तो प्रार्थना है...और यही तो है ध्यान। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (23/02/2017)  
  • सहज भक्ति/प्रेम/ध्यान को उपलब्ध हो जाना...इससे बड़ी उपलब्धि और क्या हो सकती है? ~ Monika Jain ‘पंछी’ (11/09/2016) 
  • सारी समस्यायों का कारण ध्यान (एकाग्रता) है। सारी समस्यायों का समाधान भी ध्यान (होश) ही है। निर्भर करता है ध्यान कहाँ लगाया जा रहा है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (10/09/2015)  
  • जब हम किसी कार्य को पूरी तरह समर्पित होकर करते हैं (खुद को पूरी तरह भुलाकर) तो जो परिणाम आता है वह इतना अप्रत्याशित होता है कि कर्ता को विश्वास ही नहीं होता कि यह काम उसने किया है। मनुष्य की क्षमताओं के रास्ते का सबसे बड़ा बाधक उसका 'मैं' ही होता है। इसलिए सफलता हो, प्रेम हो, चाहे मुक्ति...समर्पण पहली शर्त है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (22/10/2015) 
  • कुछ लोग कहते हैं दिल (करुणा) को सुनना चाहिए।
    और कुछ कहते हैं दिमाग (प्रज्ञा) को सुनना चाहिए।
    समस्या किसे सुनना चाहिए यह नहीं है। समस्या दिल और दिमाग के अलग-अलग (द्वंद्व) होने की है। जैसे-जैसे प्रज्ञा और करुणा एक होते जायेंगे, हम जो भी सुनेंगे सही सुनेंगे। :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (16/10/2016)  
  • चाहे आप में कितनी ही योग्यता क्यों ना हो, केवल एकाग्र चित्त होकर ही आप महान कार्य कर सकते हैं ~ बिल गेट्स / Bill Gates 
  • पार्श्व गायन केवल आवाज़ का मामला नहीं है, एक अर्थपूर्ण और सफल गीत के लिए हमें दिमाग, शरीर, दिल और आत्मा से काम करना पड़ता है। ~ मुकेश, प्रसिद्ध गायक
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