Thursday, January 26, 2017

Moral Thoughts in Hindi

नैतिक विचार, नैतिकता उद्धरण. Moral Thoughts in Hindi for Students. Ethical Education Status, Morality Quotes, Slogans, Messages, Sms, Sayings, Lines, Proverbs.

Moral Thoughts

  • विजय आवश्यक नहीं है, किन्तु सत्य परायण होना मेरे लिए आवश्यक है। सफलता आवश्यक नहीं है, किंतु जो प्रकाश मुझे प्राप्त है, उसका अनुकरण करना मेरे लिए आवश्यक है। ~ अब्राहम लिंकन / Abraham Lincoln
  • बिना किसी दंड और शस्त्र के पृथ्वी को जीतना चाहिए। ~ अंगुतर निकाया / Anguttara Nikaya
  • वह विजय स्थिर नहीं है जो पराजय में बदल जाए। श्रेष्ठ विजय कभी पराजय में नहीं बदलती। ~ जातक कथा
  • चुनौतियाँ स्वीकार करें, तभी आप विजय के हर्ष का आनंद उठा सकेंगे। ~ जॉर्ज एस पैट्टोन / George S Patton
  • वास्तविक कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है। केवल कल्पनात्मक कठिनाइयों को ही पराजित नहीं किया जा सकता। ~ जेम्स एलन / James Allen
  • स्वयं से लड़े, बाहरी दुश्मन से क्या लड़ना? स्वयं पर विजय पाकर आनंद मिलता है। ~ महावीर / Mahavira
  • यदि आपने अपनी मनोवृत्तियों पर विजय प्राप्त नहीं की तो मनोवृत्तियां आप पर विजय प्राप्त कर लेंगी। Napoleon Hill / नेपोलियन हिल
  • स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेना सर्वश्रेष्ठ और महानतम विजय है। ~ प्लेटो / Plato
  • नरम शब्दों से सख्त दिलों को जीता जा सकता है। ~ सुकरात / Sukrat
  • समय कभी प्रतीक्षा नहीं करता। ~ प्रसिद्ध कथन
  • मुझे यह लगता है कि समय सभी चीजो को परिपक्व कर देता है, समय के साथ सभी चीजे उजागर हो जाती है, समय सत्य का प्रणेता है। ~ अज्ञात / Unknown
  • समय बर्बाद करें और अपने भविष्य को भी बर्बाद होता देखें। ~ बी सी फ़ोर्ब्स / B C Forbs
  • चाहे वह आपका सबसे अच्छा समय हो या सबसे खराब, हमारे पास केवल और केवल समय ही होता है। ~ आर्ट बचवाल्ड / Art Buchwald
  • बीत चुके समय को आप बदल नहीं सकते, भविष्य अभी भी आपके हाथ में है। ~ एच व्हाइट / H White
  • मुझे आने वाले कल का भय नहीं है क्योंकि मैंने बीता हुआ कल देखा है और मुझे आज से प्यार है। ~ William Allen White / विलियम ए. व्हाइट
  • जो अपने वक्त का सबसे अधिक दुरूपयोग करते हैं वें ही वक्त की कमी की सबसे अधिक शिकायत करते हैं। ~ ब्रूयर / Bruyere
  • समय और धैर्य सबसे शक्तिशाली योद्धा है। ~ लियो टालस्टाय / Leo Tolstoy
  • इंतजार मत करो। सही समय कभी नहीं आता। ~ Napoleon Hill / नेपोलियन हिल
  • आपका समय सीमित है, इसलिए इसे किसी और की जिंदगी जी कर व्यर्थ मत करिए। बेकार की सोच में मत फंसिए, अपनी जिंदगी को दूसरों के हिसाब से मत चलाइये। औरों के विचारों के शोर में अपनी अन्दर की आवाज़ और अंतर्ज्ञान को मत डूबने दीजिये। ~ स्टीव जॉब्स / Steve Jobs
  • बिस्तर पर चिंताओं को ले जाना, अपनी पीठ पर गठ्ठर बांधकर सोना है। ~ थॉमस सी हेलिबर्टन / Thomas C Haliburton 
  • हर सुबह मैं पंद्रह मिनट अपने मस्तिष्क में प्रभु की भावनाएं समाहित करता हूँ, इस तरह चिंता के लिए इसमें कोई स्थान रिक्त नहीं रहता। ~ एच सी क्रिस्टी / Howard Chandler Christy
  • बाहरी एकांत वास्तविक नहीं है। मन में चिंता और शंका का प्रवेश न हो तभी एकांत माना जाए। ~ आविस / Avis
  • अगर तुम्हे नींद नहीं आ रही तो उठो और कुछ करो बजाय लेटे रहने और चिंता करने के। नींद की कमी नहीं चिंता तुम्हे नुकसान पहुँचाती है। ~ डेल कारनेगी / Dale Carnegie
  • समस्या होने पर हमें कार्यवाही की ओर जाना चाहिए, अवसाद की ओर नहीं। ~ पाउलो कोएलो / Paulo Coelho
  • सभी चिंताओं का परित्याग कर निश्चिन्र हो जाना ही उचित है। ~ वेदव्यास / Ved Vyas
  • हमारी पीढ़ी के सबसे बड़े आदमी की यह आकांक्षा रही है कि प्रत्येक आँख के प्रत्येक आंसू को पोंछ दिया जाये। ऐसा करना हमारी शक्ति से बाहर हो सकता है, लेकिन जब तक आंसू हैं और पीड़ा है, तब तक हमारा काम पूरा नहीं होगा। ~ जवाहरलाल नेहरु / Jawaharlal Nehru
  • प्रश्न पूछने वाला छात्र पांच मिनट के लिए मूर्ख रहता है, लेकिन प्रश्न न पूछने वाला जीवन भर मूर्ख ही रहता है। ~ चीनी कहावत / Chinese Proverb
  • जहाँ अनुकरण है, वहाँ सिर्फ दिखावट होगी। जहाँ खाली दिखावट है वहाँ कोरी मुर्खता होगी। ~ जॉनसन / Johnson 
  • मुर्ख व्यक्ति की समृद्धि से समझदार व्यक्ति की मुफलिसी ज्यादा अच्छी होती है। ~ एपिक्यूरस / Epicurus 
  • मुर्ख व्यक्ति खुद को बुद्धिमान मानता है जबकि बुद्धिमान खुद को मुर्ख मानता है। ~ विलियम शेक्सपीयर / William Shakespeare
  • बुद्धिमान व्यक्तियों की सलाह की आवश्यकता नहीं होती है और मुर्ख लोग इसे स्वीकार नहीं करते हैं। ~ बेंजामिन फ्रेंकलिन / Benjamin Franklin
  • अज्ञानी होना उतना शर्मनाक नहीं है, जितना कुछ न सीखने की भावना रखना है। ~ बेंजामिन फ्रेंकलिन / Benjamin Franklin
  • अज्ञानी आदमी के लिए ख़ामोशी से बढ़कर कोई चीज नहीं और अगर उसमें यह समझने की बुद्धि है तो वह अज्ञानी नहीं रहेगा। ~ शेख सादी / Sheikh Saadi 
  • यदि हम चाहते हैं कि हमें कोई चस्का लगे, जो प्रत्येक दशा में हमारा सहारा हो और जो जीवन में हमें आनंद और प्रसन्नता प्रदान करें, उसकी बुराइयों से हमें बचाएं, हमें चाहिए कि हम पढ़ने का चस्का लगायें। ~ आचार्य रामचंद्र शुक्ल / Acharya Ramchandra Shukla
  • ऐसे लोगों को खोजना आसान है, जो स्वेच्छा से मरने को तैयार हो जायेंगे। लेकिन ऐसे लोगों को खोजना कठिन है, जो संयम के साथ जूझना चाहेंगे। ~ जुलियस सीजर / Julius Caesar
  • जितना कठिन संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी। ~ थॉमस पेन / Thomas Penn
  • कठिनाइयाँ भगवान का सन्देश होती है। उनका सामना करते समय हमें भगवान के विश्वास के रूप में, भगवान से अभिनन्दन के रूप में उनका सम्मान करना चाहिए। ~ हेनरी वार्ड बीचर / Henry Ward Beecher
  • कार्यक्षेत्र में, स्वार्थों की संघर्षस्थली में महान आदर्शों की रक्षा करना कठिन काम है। ~ हजारी प्रसाद द्विवेदी / Hazari Prasad Dwivedi 
  • इंसान को कठिनाइयों की आवश्यकता होती है, क्योंकि सफलता का आनंद उठाने के लिए ये जरुरी हैं। ~ अब्दुल कलाम / Abdul Kalam
  • कष्ट पड़ने पर भी साधु पुरुष मलिन नहीं होते, जैसे सोने को जितना तपाया जाता है वह उतना ही निखरता है। ~ कबीर / Kabeer 
  • जिस हालत (कष्ट) में हो, ईश्वर का धन्यवाद करो। संसार में इससे भी अधिक कष्ट हैं। ~ लियो टालस्टाय / Leo Tolstoy
  • एक बड़े पहाड़ पर चढ़ने के बाद यही पता चलता है कि अभी ऐसे कई पहाड़ चढ़ने के लिए बाकी है। ~ नेल्सन मंडेला / Nelson Mandela
  • सच्चा साहसी वह है, जो बड़ी से बड़ी विपत्ति को बुद्धिमतापूर्वक सह सकता है। ~ विलियम शेक्सपीयर / Shakespeare
  • प्रतिकूल परिस्थितियों से कुछ व्यक्ति टूट जाते हैं, जबकि कुछ व्यक्ति सारे पिछले रिकॉर्डों को तोड़ डालते हैं। ~ William Arthur Ward / विलियम आर्थर वार्ड
 
Feel free to add your views about these moral thoughts of various great people.

Anger Quotes in Hindi

क्रोध पर विचार, गुस्सा नियंत्रण. Anger Management Quotes in Hindi. Krodh Niyantran, Gussa, Angry Sms, Temper Messages, Annoyed Status, Annoying Sayings, Lines.
Anger Quotes in Hindi
Anger Quotes

  • कुछ लोग किस बात का खार (खुन्नस) खाए बैठे रहते हैं समझ ही नहीं आता। अच्छी बात यह है कि आजकल गुस्सा कम आता है, मुस्कुराहट ज्यादा। :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (14/01/2017) 
  • आवेश क्षीण होकर गुम हो जाते हैं, बस हम उन्हें सहयोग न दें तो। आवेश में उठने के इच्छुक कदम को हरसंभव निरस्त करते जाना चाहिए। अक्सर ही आवेश के खत्म हो जाने पर यह अहसास होता है कि अगर वह कदम उठ जाता तो कितना गलत होता। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (28/06/2016)  
  • नाराज हो जाओ कभी तो बस इतने से फासले पर होना जो एक कदम, एक स्पर्श, एक मुस्कुराहट, एक आंसू, एक शब्द या प्रेम की एक नजर भर से भरा जा सके।...और भरावन हो ऐसी कि कभी नाराज हुए थे, ये याद भी न रह सके। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (17/04/2016)  
  • जिससे प्यार करते हैं, कभी-कभी उसी पर ढेर सारा गुस्सा निकालने का मन होता है। वह झेल लेगा न, शायद इसलिए। :p ~ Monika Jain ‘पंछी’ (10/05/2016)  
  • ...क्योंकि असल वाली कट्टी कहकर नहीं होते। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (25/06/2016)  
  • क्रोध और बैर का भेद केवल कालकृत है। दुःख पहुँचने के साथ ही दुखदाता को पीड़ित करने की प्रेरणा करने वाला मनोविकार क्रोध है और कुछ काल बीत जाने पर प्रेरणा करने वाला भाव बैर है। ~ आचार्य रामचंद्र शुक्ल  
  • क्रोध को जीतने में मौन सबसे अधिक सहायक है। ~ महात्मा गाँधी / Mahatma Gandhi  
  • मुर्ख मनुष्य क्रोध को जोर-शोर से प्रकट करता है, किन्तु बुद्धिमान शांति से उसे वश में करता है। ~ बाइबिल / Bible  
  • क्रोध मुर्खता से प्रारंभ और पश्चाताप पर खत्म होता है। ~ पाईथागोरस / Pythagoras  
  • जो मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप में नहीं कह सकता, उसी को क्रोध अधिक आता है। ~ रवीन्द्रनाथ ठाकुर / Rabindranath Thakur  
  • क्रोध मस्तिष्क के दीपक को बुझा देता है। अतः हमें सदैव शांत व स्थिरचित्त रहना चाहिए। ~ इंगरसोल / Ingersoll  
  • सुबह से शाम तक काम करके आदमी उतना नहीं थकता जितना क्रोध या चिंता से पल भर में थक जाता है। ~ जेम्स एलन / James Allen  
  • हमारा क्षणिक आवेश संसार के लिए कितना अहितकर है, जो दूसरों की जान तक ले लेता है। ~ चन्द्रप्रभ / Chandra Prabh  
  • उस मनुष्य के पास कौन बैठना चाहेगा, उस मनुष्य को कौन अपने पास बिठाना चाहेगा जो हमेशा बारूद का ढेर बने घूमता है और जिसका पता नहीं कि वह कब फट पड़े। ~ जेम्स एलन / James Allen
  • जिस मनुष्य को अन्याय पर क्रोध आता है, जो अपमान को सह नहीं सकता, वही पुरुष कहलाता है। जिस मनुष्य में क्रोध या चिढ़ नहीं है, वह नपुंसक ही है। ~ लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक / Bal Gangadhar Tilak  
  • क्रोधित होना आसान है लेकिन सही व्यक्ति से सही सीमा में, सही समय पर और सही उद्देश्य के साथ क्रोधित होना, सभी के बस की बात नहीं है और यह आसान नहीं है। ~ अरस्तु / Arastu 
  • क्रोध को पाले रखना गर्म कोयले को किसी और पर फेंकने की नीयत से पकड़े रहने के समान है, इसमें आप ही जलते हैं। ~ गौतम बुद्ध / Gautam Buddha  
  • वह आदमी वास्तव में बुद्धिमान है जो क्रोध में भी गलत बात मुंह से नहीं निकालता। ~ शेख सादी / Sheikh Saadi

Feel free to add your views about these quotes on anger. 

Wednesday, January 25, 2017

Poem on Mehangai in Hindi

बढ़ती महंगाई की मार समस्या पर कविता, आर्थिक असमानता शायरी. Poem on Inflation in Hindi. Dearness Poetry Lines, Economic Development Inequality Slogans, Rhymes. 
Poem on Mehangai in Hindi

हाय! मार गयी महंगाई

जाड़े में ठिठुरता बदन
सड़कों पर अधनंगा तन
बरसात में टपकता छप्पर
बर्तन बिछे हुए फर्श पर।

सब्जी के है भाव चढ़े
पेट्रोल के भी दाम बढ़े
सुरसा सी बढ़ती महंगाई
कौन हनुमान करेगा लड़ाई?

विकास की दर बढ़ाने की बात
गरीब के पेट पर मारकर लात
विश्व के नक़्शे पर चमकने की चाह
आर्थिक असमानता की नहीं परवाह।

ये कैसा झूठा विकास?
तोड़ कर आम जनता की आस
नेताओं की ये बेवफाई
हाय! मार गयी महंगाई।

By Monika Jain 'पंछी'

(22/01/2013)
 
Feel free to add your views about this poem on inflation. 

Tuesday, January 24, 2017

Essay on Spirituality in Hindi

अध्यात्म ज्ञान, आध्यात्मिक रहस्य लेख. Essay on Spirituality in Hindi. Spiritual Life Science Article, Meditation Power Speech, Spiritualism, Knowledge World.
Essay on Spirituality in Hindi
अध्यात्म : भ्रम व निवारण

1. भ्रम : दुनिया में बदलाव की सोच छोड़कर मुक्ति की इच्छा एक बेहद स्वार्थी विचार है।

निवारण : अक्सर हम लोग दुनिया को बदलने की बात करते हैं। लेकिन दुनिया में परिवर्तन और सुधार के लिए कुछ कर गुजरने की भावना जितनी गहरी होगी वह उतना ही बड़ा अहंकार होगा। आतंकवादी ऐसे ही तो होते हैं न? अपने नजरिये से तो वे भी दुनिया को सुधारने में ही लगे हैं। माया सिर्फ बिगाड़ने के नाम पर हम पर हावी नहीं होती, यह सुधारने के नाम पर भी हम पर हावी हो सकती है। बाकी यह ब्रह्माण्ड और इसका बोध इतना गहरा और विशाल है कि न तो हमारे किये कुछ होता है और न ही हमारे न करने से कुछ होता है। सम्पूर्ण तंत्र है यहाँ और जब सम्पूर्ण तंत्र काम करता है तो कोई जीव विशेष कर्ता रह ही नहीं जाता क्योंकि कार्य-कारण की एक अनन्त श्रृंखला चलती है। समष्टि को छोड़कर केवल व्यष्टि को भी स्थूल रूप से हम देखें तो हमारे शरीर के जो सबसे महत्वपूर्ण कार्य हैं उन पर हमारा कोई भी नियंत्रण नहीं। सूक्ष्म रूप से देखेंगे तब तो और भी बहुत कुछ नज़र आ जाएगा। ऐसे में ‘मेरे करने से ही होगा’ और ‘मेरे न करने से ही होगा’ दोनों में ही कर्ता भाव है। अकर्ता न ‘करता है’ और न ही ‘नहीं करता है’। अकर्मण्यता (आलस) और अकर्ता हो जाने (परम/सम्पूर्ण के प्रति समर्पण) में जमीन-आसमान का अंतर है। आध्यात्मिक प्रक्रिया चेतना को ब्रह्मांडीय चेतना के साथ एकाकार करती जाती है ऐसे में बस होता है : सहज, सरल, प्रवाहमय! और जो भी होता है वह उस बोध के अनुपात में सही होता है। इसलिए सबसे बड़ी सेवा मुक्त होना ही है या सबसे बड़ा सुधार आत्म सुधार ही है। हाँ, समाज सुधार इसका परिणाम अवश्य होगा। यह तो हम सबका अनुभव होता ही है। बचपन से ही अपनी क्षमता और परिस्थितियों के अनुरूप परिचित-अपरिचित सभी की जितनी और जिस भी तरह से मदद करने में सक्षम हूँ मदद करने को तत्पर रही हूँ। कई व्यक्ति जो जीवन में जुड़ते हैं, वे कहकर भी जाते हैं कि आपसे जुड़कर जीवन में बहुत सकारात्मक परिवर्तन हुए हैं या जीवन में हमेशा याद रहोगी। हाँ, बंधने और बाँधने में कभी अधिक रूचि रही नहीं। जिसके कारण अक्सर वह मदद लोगों द्वारा विस्मृत हो जाती है। लेकिन जहाँ-जहाँ मोह वश मैंने रूचि ली, वहां भी कभी अच्छे परिणाम मिले नहीं तो एक स्वतंत्र मैत्री भावना सबसे बेहतर लगती है। जिसकी खासियत यह है कि यह सारे प्राणियों से स्थापित की जा सकती है। जितना किसी भी प्राणी के लिए कुछ कर सको उतना करो (स्वयं और उसे मोह से मुक्त रखते हुए) और अब तो यह भी समझने लगी हूँ कि हमारा किया कुछ भी हमारा कहाँ होता है? जो भी हमें मिला है वह इसी संसार से मिला है। हाँ, अहंकार के क्षणों में हम यह बात विस्मृत कर जाते हैं। और अफ़सोस यह है कि हमारा अधिकांश जीवन इन्हीं क्षणों (मैं, मेरा) में ही बीतता है। बाकी जिस क्षण किसी को परम मिलना शुरू होता है, उस क्षण से ही उसका बांटना शुरू हो जाता है। वह नहीं बांटेगा तो परम से भी दूर ही रहेगा। हाँ, एक जाग्रत व्यक्ति दुनिया को क्या और किस तरह बाँटता है इसे भौतिक दृष्टि वाले व्यक्ति नहीं समझ सकते। हाँ, उस मदद में जितनी मात्रा में वस्तुएं और पैसे होंगे वह तो उन्हें नजर आ जाएगा, बाकी नहीं नज़र आएगा। यहाँ एक बात और कि अधिकांश व्यक्ति जब भी पढ़ते हैं तो पूर्ण आदर्श बातों को किताबी बातें मानकर उपेक्षित कर देते हैं। लेकिन कोई भी आदर्श सिर्फ इतना बताता है कि अभी आपके पास आत्मिक विकास के लिए बहुत-बहुत लम्बा रास्ता है। कम से कम हम चलना तो शुरू करें

2. भ्रम : मुक्ति पलायन है।

निवारण : मुक्ति क्या है...इसे बस वही समझ सकता है जिसने कभी निर्दोषिता के आनंद को चखा हो। यह पलायन नहीं! पलायन तो संसार है, बंधन है। अपने मूल स्वभाव की ओर लौटना पलायन नहीं होता। हाँ, उससे दूर जाना और भटकना जरुर होता है। महावीर, बुद्ध जैसे कई महात्माओं के वन या हिमालय गमन को पलायन कहा जाता है। लेकिन किसी बीमारी से स्वास्थ्य की अवस्था तक पहुँचने के लिए जैसे कुछ परहेजों की जरुरत होती है। इसी तरह कषायों (मन के संस्कारों) से निर्दोषिता तक पहुँचने के लिए भी परहेज की जरुरत है। साधना को सुरक्षित रखने के लिए कुछ बचाव जरुरी होते हैं। जिसे आत्मबोध हो चुका है उसे तो कुछ भी प्रभावित नहीं कर सकता, लेकिन उससे पूर्व तो प्रभावों से ऊपर उठने के लिए प्रभावों से बचना भी होगा। यह केवल व्यक्तिगत हित की बात नहीं है, यह व्यापक हित की ही बात है। क्योंकि किसी के प्रभाव में आप अपने गुण-स्थान (अपनी चेतना के स्तर) से एक कदम भी नीचे सरके तो यह सिर्फ आपके लिए नुकसानदायक नहीं होगा, यह जीव मात्र के लिए नुकसानदायक है। सुसंगति और कुसंगति के असर की बातें इसलिए ही कही जाती है। बाकी हर महावीर और हर बुद्ध आत्मबोध के बाद अगर उनकी आयु शेष हो तो संसार के उद्धार के लिए वापस आते ही हैं। महावीर और बुद्ध ने तो 40 वर्षों तक यही काम किया। कोई न भी आये तब भी उससे इस प्रक्रिया तक बहुत कुछ हो चुका होता है।

हाँ, मुक्त होने के रास्ते अलग-अलग हो सकते हैं। अगर आपको पता चले कि जिस व्यक्ति/प्राणी से आप लड़ने वाले हो वह आप ही हैं तो तो या तो आप नहीं लड़ोगे जो कि बुद्ध और महावीर का मार्ग (अहिंसा) है, या फिर लड़ोगे लेकिन जीत और हार (फल) के प्रश्न को बिल्कुल दरकिनार रखकर बस उस क्षण की जरुरत को समझकर...जो कि कृष्ण का मार्ग है (कर्मयोग)। कहने को तो कृष्ण को भी रणछोर कहा जाता है। तो क्या करना है और क्या नहीं यह उस व्यक्ति के उस क्षण की जागरूकता, परिस्थितियों और समझ पर निर्भर करता है। एक मार्ग भक्ति भी है। कर्म-कर्म करने वालों को (जो कि निष्काम कर्म या कर्मयोग के जरा भी आसपास नहीं फटकते, क्योंकि जो फटकेगा वो तो चिड़ सकता ही नहीं) उन्हें भक्ति, ध्यान और ज्ञान में रत साधकों जैसे मीरा, महावीर, बुद्ध आदि से बेहद चिड़ होती है। लेकिन, जो बहुत आलसी हों उनसे वास्तविक भक्ति, ध्यान और साक्षी की साधना भी नहीं हो सकती। अध्यात्म में भिक्षु बन जाना (भिखारी नहीं) कोई छोटी बात नहीं। कोई आजीवन ध्यानमग्न बैठा हो वो भी एक असंभव के निकट सी बात है। सामान्यत: जो सबसे सरल और सबसे सहज होते हैं वहीँ भक्तिमय हो पाते हैं। अर्थात् भक्ति सबसे सरल प्राणियों का मार्ग है। (यह भक्ति वह वाली भक्ति नहीं जो फेसबुक पर कटाक्ष करने के लिए प्रचलित है। उससे इसका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं। और वह भी नहीं जिसमें दिन-रात गाड़ी, बंगला, कार, पैसे, नौकरी...आदि मांगी जाती रहती है।) भक्ति के बाद ज्ञान थोड़े जटिल (जिज्ञासुओं) का मार्ग है और कर्मयोग (सेवा) थोड़े और जटिल व्यक्तियों का मार्ग है। इसके बाद बचे दुनिया के 99.99 % लोग जो सबसे अधिक जटिल होते हैं। जिन्हें अपने बंधनों का पता ही नहीं होता और ताउम्र उनकी अंधी दौड़ पद, सम्मान, पैसे, प्रतिष्ठा, शोहरत, मनोरंजन आदि के नाम पर बस बाहर की ओर होती है। उन्हें खुद तो कभी कुछ नहीं मिलता (मिलता होता तो दौड़ थम चुकी होती) लेकिन दूसरों को भी इसी दौड़ में शामिल कर लेना चाहते हैं। यहाँ यह समझना जरुरी है कि ज्ञान, भक्ति और कर्म के मार्ग में बहुत कुछ ओवरलैप भी करता रहता है। मतलब किसी भी व्यक्ति का मार्ग इन सभी के मिश्रण से ही बनता है, बात बस प्रधानता की हो जाती है। जो व्यक्ति आजीवन ध्यानमग्न है उस व्यक्ति ने तो इस सृष्टि के जीवमात्र को प्रेम, मुक्ति और अहिंसा दी है (बिल्कुल जैसे परमात्मा द्वारा हमें प्राप्त है।) वह तो परम तत्व के बहुत निकट है। शब्द, कार्य, उपदेश ये सब तो बहुत स्थूल चीजें हैं। जो सबसे मूल तत्व है (प्रेम या अहिंसा) वह तो बहुत सूक्ष्म बल्कि अदृश्य है। मुख्य कार्य तो वही करती है। इसलिए ही यह होता है कि बहुत से योगियों के पास हिंसक से हिंसक पशु-पक्षी भी अपनी हिंसा छोड़ देते हैं (अभी भी कई उदाहरण हम देखते ही हैं)। उनकी ऊर्जा का प्रभाव है। जैसे महावीर जिस रास्ते चलते थे वहां सामान्यत: बहुत लम्बी दूरी तक तक कोई हिंसक घटना नहीं होती थी। अजगर भी एकदम शांत और आनंदित होकर बैठ जाता था। इस दुनिया में जितना भी मोह रहित निस्वार्थ प्रेम है वह उन्हीं व्यक्तियों का परिणाम है जो-जो जिस-जिस मात्रा में मुक्त हुए हैं या परम के निकट हैं। यहाँ एक चीज बता देना आवश्यक है कि बाहरी आडम्बरों और क्रियाकलापों से यह आवश्यक नहीं है कि किसी के भीतर को भी पहचाना जा सके। कोई संसारी नज़र आते हुए भी भीतर मुक्त (अनछुआ) हो सकता है और कोई बहुत ज्यादा धार्मिक/आध्यात्मिक नज़र आते हुए भी गहरे बंधन में हो सकता है। बेहतर है आत्मनिरीक्षण की एक प्रणाली हम विकसित करें। जिस भी व्यक्ति (कुछ और भी हो सकता है) की निकटता में हममें निर्मलता, निच्छलता, शांति और सुकून बढ़े, वह फिर बाहर से कैसा भी नजर आये कोई फर्क नहीं पड़ता, उसे अपना गुरु/मित्र जानिये

3. भ्रम : अध्यात्म कामचोरों का काम है।

निवारण : कामचोरों के लिए नहीं है अध्यात्म। वास्तव में जो क्षमता होते हुए भी बहुत अधिक आलसी और अकर्मण्य हों, वह तो आध्यात्मिक हो ही नहीं सकता। हाँ, अध्यात्म हमें पसंद और नापसंद (सभी तरह के भेदों) से ऊपर उठाता है। लेकिन इसका मतलब यह जरुरी नहीं कि आप सारे ही तरह का काम करें। क्या करना है और क्या नहीं यह हमारे बोध और परिस्थितियों पर निर्भर करता है और उसी अनुरूप हमारे श्रम की दिशा और रूप तय होता है। फिर चाहे आप झाड़ू लगा रहे हों या किसी अन्तराष्ट्रीय संस्था में भाषण दे रहे हों या बैठकर ध्यान कर रहे हों अगर समर्पण है (कार्य के दौरान फल और अहंकार की विस्मृति) तो सभी क्रियाएं आध्यात्मिक हो जाती है। समस्या दुनिया के साथ यह है कि यहाँ कर्म का मतलब ही बस यही है कि उससे कितना पैसा, कितनी इज्जत, कितना सम्मान मिलेगा या फिर अहंकार को कितनी तृप्ति मिलेगी। हमारे घर में सामान्यत: सभी घरेलु कार्य खुद ही किये जाते हैं। किसी सहायक को रखना कम ही होता है। बचपन से ही पढ़ाई के साथ-साथ ढेर सारी अतिरिक्त गतिविधियाँ जीवन में समय-समय पर जुड़ती चली गयी। हाँ, जहाँ तक घरेलु कामों की बात है तो कुकिंग को छोड़कर बाकी कामों में रूचि नहीं थी। आते सभी थे। बहुत जरुरत होने पर किये भी जाते रहे। लेकिन फिर भी तुलना तो थी ही। लेकिन पिछले कुछ समय में मैंने जो अंतर महसूस किया है वह यह है कि कई बार ऐसा हुआ है जब मुझे चाहे लेखन से सम्बंधित कोई काम करना हो, पढ़ना हो, पढ़ाना हो, कोई असाइनमेंट, कोई भी अन्य रचनात्मक कार्य, झाड़ू लगाना हो, बर्तन साफ़ करने हो, कपड़े धोने हो, खाना बनाना हो, कोई अनाज साफ़ करना हो, खेलना हो या कोई भी अन्य काम...इन्हें करने के दौरान मैंने कोई विशेष अंतर महसूस नहीं किया। बल्कि कभी-कभी तो तिल, सौंफ साफ़ करते समय या झाड़ू लगाते समय भी बहुत सुकून दायक लगा है। हालाँकि मैं बहुत आध्यात्मिक नहीं हूँ ( बहुत शुरूआती स्तर समझ सकते हैं) लेकिन कुछ इतनी विलक्षण अनुभूतियाँ हैं कि यह स्वत: ही अपनी ओर खींचता है। उत्कृष्टता किसी कृत्य की मोहताज नहीं। और अध्यात्म कामचोरों का नहीं हरफनमौलाओं का क्षेत्र है। 


4. भ्रम : भूख, गरीबी, बेरोजगारी जैसी समस्यायों के रहते अध्यात्म एक मजाक जैसा है।

निवारण : भूखे पेट को समस्या किसने बनाया? भूखे मन ने। वरना क्या संसार में कुछ कमी थी खाने-पीने की? कुछ लोगों के मन की भूख ने बाकियों के पेट को भी न भरने दिया। और मन की यह भूख सिर्फ जरुरत लायक कुछ पैसों, घर, कपड़ों तक सीमित नहीं...बात नाम, शोहरत, इज्जत, देशों-प्रदेशों के नाम पर धरती और संसाधनों पर अधिकार... न जाने कहाँ-कहाँ तक पहुँचती है। और यह भूख ऐसी है कि मिटने का नाम लेती ही नहीं। इंसान मिट जाता है लेकिन यह भूख नहीं मिटती। मुझे बड़ा ताज्जुब होता है जब पेट की इस भूख का नाम लेकर अध्यात्म पर व्यंग्य किया जाता है। भई! अध्यात्म मन की भूख मिटाने का ही साधन है। यह आपके पेट के खिलाफ कहीं से भी और किसी भी तरह नहीं है। यह बात अलग है मन की भूख मिटने पर कुछ लोगों (अपवाद) के पेट की भूख भी गायब हो जाती है। बड़े भयंकर भ्रम है अध्यात्म को लेकर। पूर्वाग्रही मत बनिए, जिज्ञासु बनिए। भारत जिज्ञासुओं और खोजियों की भूमि के लिए ही जाना जाता रहा है। बाकी वास्तव में आध्यात्मिक जो भी होगा उसके द्वारा किसी न किसी न रूप में, कहीं न कहीं स्वत: ही समष्टि का कल्याण हो ही रहा होगा। वह हर सूचना आप तक पहुंचाए यह जरुरी नहीं। सच तो यह है कि वह अगर आजीवन एक जगह मौन बैठा हो तब भी यह कल्याण होगा। आप कितने भी बड़े जासूस हों तब भी नहीं समझ पायेंगे कि कैसे? समझने के लिए आपको इस तल पर उतरना ही होगा और अपनी दृष्टि को व्यापक भी करना होगा।  


By Monika Jain 'पंछी'

Feel free to add your views about this article on spirituality. 

Monday, January 23, 2017

Poem on Fear in Hindi

प्यार में डर कविता, भय शायरी, उलझन, अविश्वास, प्रेम, भरोसा. Poem on Fear in Hindi. Confusion in Love Poetry, Lack of Self Trust Rhymes, Relationship Phobia.
Poem on Fear in Hindi
उलझन

कितनी अजीब बात है न!
तुम कहते हो, तुम्हें डर लगता है
कि क्या तुम मुझे खुश रख पाओगे।
और मैं कहती हूँ, मुझे डर लगता है
कि क्या मैं तुम्हें खुश रख पाऊँगी।

हमारा ऐसा सोचना क्या दर्शाता है?
यह कि हमें एक दुसरे पर ज्यादा भरोसा है
या यह कि हमें खुद पर विश्वास नहीं।
यह कि हमें एक दूसरे की ज्यादा परवाह है
या यह कि हमें अपने प्यार पर एतबार नहीं।

एक अजीब सी उलझन में हूँ -
सुना है जहाँ प्यार होता है वहाँ डर नहीं होता
और जहाँ डर है वहाँ प्यार नहीं
इसलिए डरती हूँ हमारे इस डर से
कि कहीं यह हमारे प्यार पर हावी न हो जाये।

By Monika Jain 'पंछी'
(22/01/2013)

Saturday, January 21, 2017

He She Conversation in Hindi

दो दोस्तों के बीच बातचीत, लड़का लड़की संवाद. He She Conversation in Hindi. Talks Between Girl & Boy, Two Friends Cute Funny Discussion, Lovely Convos, Chit Chat.
He She Conversation in Hindi
(1)

He : किसी के इश्क में होना रूई के फाहों के बीच होने जैसा है।

She : और खुद इश्क होना रूई का फाहा होना है। :)

 
(2)

He : तुम नदी हो।

She : डूब जाओगे। नाव का इंतजार करो।

He : तुम नदी और नाव दोनों हो।

She (मन ही मन में) : अब क्या बोलूं? :p

 
(3)

He : तुम्हारी बातें बहुत हाई लेवल की होती है। ज्यादा नहीं पच पाती।

She : इसलिए तो तुम्हें बोलने को कहती हूँ। तुम अपने लेवल की बात करो।

He : क्या बात करूँ, तुम ही बताओ।

She : मैं तो अपने लेवल की ही बताऊंगी न? अच्छा, तुम तो मुझे हमेशा बच्ची कहते हो। तो पहले तुम ये डीसाइड करो कि मैं हाई लेवल की हूँ या बच्चों के लेवल की।

He : तुम हाई लेवल की बच्ची हो। :p :D

 
(4)

He : दुनिया और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को छोड़कर मुक्ति की इच्छा एक बेहद स्वार्थी और अश्लील विचार है।

She : जितना मेरे नन्हें से दिमाग ने अब तक जाना है, आप दुनिया और अपने लिए इससे बेहतर कुछ भी नहीं कर सकते कि आप अपनी ओर से दुनिया में उत्पन्न प्रतिरोध (शारीरिक-मानसिक, प्रकट-अप्रकट) को न्यूनतम कर दें। अपनी जरूरतों और आवश्यकताओं को सीमित से सीमित कर दें। कुछ लोग आत्महत्या (जो कि आवेश में की जाती है) की सलाह देंगे। पर अफसोसजनक बात यह है कि वह प्रतिरोध को कम नहीं करता, वह तो बढ़े हुए प्रतिरोध का सूचक है।) क्योंकि इस दुनिया में कुछ भी खत्म नहीं होता। वह सिर्फ रूप बदलता है। बाकी किसी के मुक्त होने और मुक्त होने तक की प्रक्रिया स्वत: ही दुनिया के लिए बहुत कुछ कर जाती है।

 
(5)

कुछ आरोप इतने मासूम होते हैं कि उन्हें पढ़ते ही सबसे पहले सहज मुस्कुराहट आती है। :)

He : आपका कोई पोस्ट हटाना उस पोस्ट पर आये विचारों की हत्या है।

She : भई...हो सकता है मैं तो किसी दिन अकाउंट भी डिलीट कर दूँ। तब तो मैं बहुत बड़ी हत्यारण बन जाऊँगी। :)

 
(6)

He : कैसी हो?

She : अच्छी हूँ।

He : जब देखो तब बस अपनी तारीफ़ करवा लो।
:p :D

 
(7)

He : सलमान खान बाइज्जत बरी हो गया।

She : Who is Salman Khan?

Moral of the Story : इज्जत (जिन चीजों को दुनिया मुख्य रूप से देती है), उतनी ही दो जितनी बरी होते देखी जा सके और अफ़सोस न हो। बड़े और छोटे के भेद जितने गहरे होंगे परिणाम वैसे न होंगे तो और कैसे होंगे?

Thursday, January 19, 2017

Poem on Home in Hindi

घर की याद पर कविता, मेरा मकान शायरी. Poem on Home in Hindi for Kids. Missing My Sweet House Poetry, Homesickness Nursery Rhymes, Household Lines, Residence.
Poem on Home in Hindi

अपना घर है सबसे प्यारा

घर से निकली पंख पसार
देख लिया सारा संसार
उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम
कर आई चहुँ ओर भ्रमण।

सुन्दर था जग का हर कोना
फिर भी मुझको पड़ा लौटना
सुन्दरता जग की ना भायी
घर की मुझको याद सताई।

नैना मेरे थे बेचैन
घर लौटी तब आया चैन
माना मेरे दिल ने यारा
अपना घर है सबसे प्यारा।

By Monika Jain 'पंछी'

 
Watch/Listen the video of this poem about home : 


Monday, January 16, 2017

Funny Quotes in Hindi

चुटकुले, हास्य उद्धरण. Funny Quotes in Hindi. Comic Dialogues, Laughing Status, One Liners Jokes, Comedy Lines, Laughter Messages, Sayings, Comments, Sentences.
Funny Quotes in Hindi
Funny Quotes

  • 'स्टेप हेयर कट' के लिए माँ कहती है - चूहों ने बाल कुतर दिए हो जैसे। :p ~ Monika Jain ‘पंछी’ (11/01/2016) 
  • बच्चे के रूप में करीब-करीब ईश्वर ही जन्म लेता है। फिर माता-पिता और समाज उसे बिगाड़ने का कार्य करते हैं। :p ~ Monika Jain ‘पंछी’ (29/12/2016) 
  • कुछ लोगों को आपकी पोस्ट्स इतनी पसंद आती है, इतनी पसंद आती है, इतनी पसंद आती है कि वे उसे अपनी ही बना लेते हैं। उनके लिए यह स्वीकार करना संभव ही नहीं होता कि यह उन्होंने नहीं लिखी है। :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (21/12/2016) 
  • एक ज़माने में मैं इतनी बुद्धू थी (अभी भी कम नहीं :p ) कि एक दोस्त ने मेरे मजे लेने के लिए मुझसे कहा, 'हमारे यहाँ पर बेस्ट फ्रेंड को मुर्गीचोर कहा जाता है।' मैंने थोड़ा संदेह जताया तो उसने कहा, 'चाहो तो किसी और से पूछ लो!' और मैं आराम से वहीँ पर रहने वाले एक कॉमन फ्रेंड से पूछ भी आई कि क्या आपके यहाँ बेस्ट फ्रेंड को मुर्गीचोर कहते हैं? ~ Monika Jain ‘पंछी’ (27/09/2016) 
  • अपने घर में मैं नास्तिक समझी जाती हूँ। मेरी जन्मकुंडली में लिखा है मैं बहुत बड़ी धर्मात्मा बनूँगी और यहाँ फेसबुक पर शायद आध्यात्मिक समझते हैं मित्र। और फिर मैंने इनमें से कुछ भी बनना कैंसिल कर दिया। :p :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (30/08/2016)  
  • मित्र के सालों पुराने नंबर पर कॉल करने...जो कुछ सालों तक बंद रहकर अब किसी ख़तरनाक लड़की :p का नंबर हो चुका हो। जहाँ सामने वाली आपको कोई और लड़की (रिमझिम) समझ रही है (जिससे उसका 36 का आँकड़ा है शायद) और आप उसे मित्र की वाइफ समझ कर बहुत सहजता से बात कर रहे हैं। तब इस ख़तरनाक ग़लतफ़हमी के बीच कुछ अज़ब वार्तालाप के साथ-साथ उसका कहना, 'देखो! तुम इतनी ज्यादा स्वीट मत बनो।'...मुझे रह-रहकर अभी तक हंसी आ रही है। :D अच्छी-खासी आवाज़ का इस तरह से कचरा भी हो सकता है। :'( मन कर रहा था उसे कह दूँ, मैं स्वीट बन नहीं रही...आलरेडी स्वीट हूँ। :p ;) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (21/08/2016) 
  • हमारी शिक्षा प्रणाली इतनी बोरिंग है कि बच्चे यह तक कहते पाए जाते हैं कि काश! बाढ़ आ जाए तो स्कूल ही नहीं जाना पड़ेगा। :D ~ Monika Jain ‘पंछी’ (04/09/2016)  
  • बच्चों का स्वागत और बच्चों द्वारा स्वागत आज भी दरवाजे के पीछे छिपकर 'हो' से ही होता है। :p :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (18/08/2016)  
  • जिन्हें शब्दों से अति प्रेम हो या फिर जिनके लिए चर्चा सिर्फ हार या जीत का प्रश्न हो उनके साथ चर्चा में पड़ना मतलब ’आ बैल मुझे मार!’ :p ~ Monika Jain ‘पंछी’ (01/12/2015)  
  • किचन एक्सपेरिमेंट के नाम पर किसी ने कहा, 'आप आलू-मुर्गा बना लो।' हमने कहा, 'आलू हम बना लेंगे, आप मुर्गा बन जाना।' :o :p ~ Monika Jain ‘पंछी’ (07/12/2015)  
  • काहें का 'फ्रीडम 251'! सबको तो गुलाम बना छोड़ा है। इत्ते तो अभी शक्ल भी नहीं देखी ढंग से। अफवाहों का बाज़ार भी गर्म है। वैसे टेंशन न लो कोई। कुछ ठीक न रहा तब भी बच्चों के खेलने के काम तो आ ही जाएगा। :p ~ Monika Jain ‘पंछी’ (19/02/2016) 
  • न सोयेंगे और न सोने देंगे वाले प्राणियों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। :’( ~ Monika Jain ‘पंछी’ (07/11/2016)

Thursday, January 12, 2017

Small Story in Hindi with Moral

व्यक्तित्व पर कहानी, दान की महिमा कथा, मनुष्यता, मानवता, चरित्र. Small Story in Hindi with Moral for Kids. Donation, Personality, Character, Humanity Tales.
Small Story in Hindi with Moral
 (1)

दान की महिमा

वैशाख महीने की भीषण गर्मी में एक बार महाकवि कालिदास किसी कार्यवश भयानक जंगल में पहुँचे। उन्होंने वहां एक रुग्ण व्यक्ति को देखा। वह फटेहाल था। वह चल रहा था किन्तु भूमि इतनी तपी हुई थी कि उससे चला नहीं जा रहा था। मुंह से आह निकल रही थी। इसे देखकर महाकवि पसीज गए। उसे उठाकर एक वृक्ष के नीचे रख दिया और अपने पदत्राण भी उसे दे दिए और वे औषधि लाने चल पड़े। वे कुछ चले ही थे कि एक महावत हाथी लेकर आ रहा था। महाकवि को देखकर उसने उन्हें हाथी पर बिठा लिया। राजा भोज ने कालिदास को हाथी पर आरूढ़ देखा तो पूछा- हाथी पर कैसे बैठे हो? कवि ने कहा - ‘जो व्यक्ति नहीं देते, उनकी संपत्ति नष्ट हो जाती है’।


Source : स्वाध्याय सन्देश

(2)

व्यक्तित्व

जब विवेकानंद जी विश्व शिकागो धर्म सम्मलेन में भाग लेने के लिए शिकागो (अमेरिका) गए तो उनके साफे और भगवा वेशभूषा को देखकर एक महिला ने खिल्ली उड़ाई और पूछा - यह क्या है? स्वामी जी हाजिर जवाब थे। उन्होंने तुरंत कहा, ‘मैडम! यह आपका देश है जहाँ दर्जी व्यक्तित्व का निर्माण करता है पर हमारे देश में चरित्र व्यक्तित्व का निर्माण करता है।’


Source : Unknown

(3)

मनुष्यता का रिश्ता

रूस में सड़क के किनारे एक मेजर खड़े-खड़े शराब पी रहा था। तभी वहां एक आदमी आया जो अपने कपड़ों से ग्रामीण लग रहा था। उसने मेजर से किसी स्थान का पता पूछा। मेजर के अहंकार को ठेस लगी। उसने सोचा, ‘एक साधारण से आदमी की हिम्मत कैसे हुई कि उससे बात करे।’

मेजर कुछ बोला नहीं, बस उंगली के इशारे से उस जगह का पता बता दिया। पर वह व्यक्ति वहीँ का वहीँ खड़ा रहा। इससे मेजर को गुस्सा आ गया। वह बोला, ‘अब जाते क्यों नहीं?’

व्यक्ति ने कहा, ‘जा रहा हूँ। बस ये जानना चाहता था कि आप किस पद पर कार्यरत हैं?’

मेजर अहंकार से हँसते हुए बोला, ‘तुम खुद ही अनुमान लगाओ।’

ग्रामीण व्यक्ति ने कहा, ‘आप जरुर केप्टन होंगे?’ मेजर ने ना में सिर हिलाया। ‘तो आप लेफ्टिनेंट होंगे?’ ग्रामीण ने कहा। मेजर ने फिर से इनकार में सिर हिलाया। ग्रामीण बोला, ‘तब तो आप मेजर होंगे?’ मेजर ने खुश होकर कहा, ‘हाँ, तुमने सही पहचाना।’

ग्रामीण व्यक्ति ने मेजर को सलाम किया तो मेजर को संतोष हुआ। ग्रामीण व्यक्ति बोला, ‘आप बता सकते हैं कि मैं कौन हूँ?’

मेजर ने उसे हिकारत भरी नजर से देखते हुए कहा, ‘तुम गाँव के चोकीदार वगैरह होंगे।’ ग्रामीण ने ना में सर हिलाया। मेजर ने पूछा ‘सिपाही?’ ग्रामीण ने कहा, ‘उससे ऊपर।’ मेजर ने आश्चर्य से पूछा ‘कैप्टन?’ ग्रामीण ने कहा, ‘उससे भी ऊपर।’ इस तरह बात जनरल तक पहुँच गयी। ग्रामीण ने कहा, ‘मैं जनरल से भी ऊपर यहाँ का राजा हूँ।’

मेजर का नशा टूटा। उसने राजा को सलाम किया।

राजा ने कहा, ‘मेजर बनकर तुम यह भूल गए कि सबसे पहले तुम एक मनुष्य हो। मैं भी एक मनुष्य हूँ। कोई चाहे किसी भी पद पर कार्यरत हो पर मनुष्यता का रिश्ता सबसे बड़ा है।’

मेजर को अपने व्यवहार पर पछतावा हुआ। उसने राजा से माफ़ी मांगी।


Source : Unknown

Feel free to add your views about these moral stories on donation, humanity, personality and character. 

Wednesday, January 11, 2017

Poem on Basant Ritu in Hindi for Kids

बसंत पंचमी पर कविता, ऋतुराज वसंत गीत, मधुमास शायरी. Poem on Basant Ritu in Hindi for Kids. Spring Season Rhymes Lines, Vasant Panchami Festival Slogans, Poetry.
 Poem on Basant Ritu in Hindi for Kids

ऋतुओं की रानी है आई

ऋतुओं की रानी है आई
धानी चुनर अपने संग लायी
जिसे ओढ़ धरती मुस्काई
कण-कण में उमंग है छायी।

डाल-डाल नव पल्लव आया
जैसे बचपन फिर खिल आया
रंग-बिरंगे फूलों पर
देखो! भँवरा फिर मंडराया।

तितली भी मुस्काती है
बहती हवा बासंती है
नील गगन में उड़ते पंछी
के मन को हर्षाती है।

रंग-बिरंगे फूल खिले हैं
पीले, लाल, गुलाबी, हरे हैं
कोयल की कूंकूं के संग
स्वर गीतों के भी बिखरे हैं
स्वर गीतों के भी बिखरे हैं।

By Monika Jain 'पंछी'

(19/03/2013)

Watch/Listen the video of this poem about Spring Season (Basant Ritu) in my voice :


Thursday, January 5, 2017

Illusion Quotes in Hindi

मिथ्या भ्रम, मोह माया. Life is an Illusion Quotes in Hindi. Moh Maya, Bharam, Illusionist, Illusioned, False Sayings, Delusion Status, Hallucination Quotations.
 Illusion Quotes in Hindi
 Illusion Quotes

  • समस्या हमारी कट्टर धारणाएं व भ्रम होते हैं। नाम कुछ भी दिया जाए उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। दृष्टि में अगर भेद न हो तो शब्द क्या कर सकते हैं? हाँ, किसी शब्द के साथ बहुत ज्यादा नकारात्मक भाव जुड़ गए हो तो उससे बचा जा सकता है, पर शब्द मिटा देने मात्र से दृष्टि का भेद मिट नहीं सकता। उसके लिए किसी और ही रूपांतरण की जरूरत होती है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (29/12/2016) 
  • हम हर चीज को वर्गीकृत कर लेना चाहते हैं और यह नहीं देख पाते कि वर्गीकरण कितना बड़ा भ्रम है। भाषा और मन द्वैत में ही जीते हैं, यह सही है लेकिन मन की इस प्रकृति को समझ लेना भी तो जरुरी है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • भ्रम के बीज बोये जाते हैं और बोये जाते रहेंगे। बात बस इतनी है कि इनसे फैली कंटीली झाड़ियों की खरोंचों से हम अपने प्रेम और विश्वास को कैसे बचा पाते हैं। क्योंकि किसी एक के भी विश्वास पर आई खरोंचों की कीमत कहीं ना कहीं पूरी मानवता को चुकानी पड़ती है। काश! कुछ लोग ये समझ पाते। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (10/02/2015) 
  • अच्छी खासी 'वर्ड पोस्ट' पर जब कोई 'नाइस पिक', 'लवली पिक', 'ब्यूटीफुल पिक' लिख जाता है तो बहुत बेइज्जती टाइप फील होता है। और जब कोई लेख और कहानी को बिना पढ़े ओवरकांफिडेंस में 'अच्छी कविता' बता देता है तो फिर मन करता है एक कविता उसी पे लिख डालूं 'अच्छी वाली'! कभी-कभी कुछ पढ़ भी लिया करो प्यारों! लेखक होने का जो भ्रम पाल लिया है उसे यूँ निर्दयता से तो न तोड़ो। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (01/12/2015) 
  • अपनी कमजोरियों को तर्कसंगत बताने के स्टेटमेंट खोजे जा सकते हैं।
    दूसरों के गुणों को कमी करार देने के तर्क भी गढ़े जा सकते हैं।
    लगभग हर बात के लिए तर्क तैयार किये जा सकते हैं।
    बस सापेक्षता को समझना...फिर देखना कितने तर्क तर्काभास के ढेर में जा बैठते हैं। :) ~ Monika Jain ‘पंछी’ (29/05/2016) 
  • सब चीजें सापेक्ष लगती हैं। क्रिकेट को समझने के बाद से पहली बार मैंने वर्ल्ड कप क्रिकेट नहीं देखा। हर बार जब देखती थी तो जीत और हार को महसूस करती थी। रोती थी, हँसती थी। इस बार बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया तो कुछ महसूस भी नहीं हुआ। मतलब हमारे आवेग और आवेश प्रेरित होते हैं। क्षणिक होते हैं। क्षण भर के लिए हम अपने आप में सबसे बड़े देशभक्त को जीने लगते हैं, जबकि होता सब कुछ भ्रम ही है। ये जीत और हार भी तो कितना बड़ा भ्रम है।...और इसके साइड इफेक्ट्स! इन्हें यहाँ फेसबुक पर देख-देखकर यह विश्वास पक्का हुआ जाता है। भ्रम जितने जल्दी टूट जाएँ अच्छा है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (27/03/2015) 
  • हरेक अपनी व्यक्तिगत इकाई को सत्य सिद्ध करने का भ्रमपूर्ण प्रयास करता है। उसे इस भ्रम का ज्ञान अवश्य रहता है, क्योंकि हिंसा की भावना उत्पन्न होने से मनुष्य को कभी आनंद प्राप्त नहीं होता। ~ अमृत लाल नागर / Amrit Lal Nagar

Feel free to add your views about these quotes on Illusion. 

Wednesday, January 4, 2017

Happy New Year Poem in Hindi

नए साल की शुभकामनाएं कविता, नूतन नववर्ष मुबारक शायरी. Happy New Year Wishes Poem in Hindi. Resolution Poetry Lines, Greetings, Slogans, Rhymes, Sms, Messages. 
 Happy New Year Poem in Hindi
काश! लिखूँ कुछ ऐसा कि...

नये वर्ष की नयी सुबह
नयी कलम और नयी डायरी
काश! लिखूँ कुछ ऐसा कि
मुग्ध हो जाए दुनिया सारी।

खामोश जुबां के शब्द बनूं
टूटे सपनों के टुकड़े चुनूं
काश! लिखूँ कुछ ऐसा कि
भटके अपनों की राह बुनूं।

दीन-दु:खी जन की पीड़ा
हर दिल तक पहुँचा पाऊँ
काश! लिखूँ कुछ ऐसा कि
सबके दिल को छू जाऊँ।

निर्बल का मान बचा पाऊँ
निर्धन की जान बचा पाऊँ
काश! लिखूँ कुछ ऐसा कि
हर दिल को रोशन कर जाऊँ।

जंग लगे दिल के दरवाजों
के तालों को तोड़ सकूँ
काश! लिखूँ कुछ ऐसा कि
सबके दिलों को जोड़ सकूँ

झूठ का पर्दाफाश करूँ
और सच का मैं आगाज़ करूँ
काश! लिखूँ कुछ ऐसा कि
सबके दिलों पे राज करूँ।

प्रकाश की सविता बन जाऊँ
आस की सरिता बन आऊँ
काश! लिखूँ कुछ ऐसा कि
खुद ही कविता बन जाऊँ।

By Monika Jain 'पंछी'
(01/01/2012)

Wish you all a very Happy New Year. Watch/ Listen the video of this poem about new year in my voice :